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China-Nepal Border Landslide Tragedy | Rescue Operation & Missing People


35 मिनट पहले

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ से प्रभावित इलाके में पहली बार इंटरनेशनल मीडिया को जाने की इजाजत दी गई है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने रविवार को रॉयटर्स समेत कई विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग का दौरा कराया।

यह इलाका 26 अगस्त को पानी, कीचड़ और मलबे की तेज लहर की चपेट में आया था। चीन और नेपाल को मिलाकर इस आपदा में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।

तिब्बत-नेपाल हादसे से जुड़े 5 फोटोज

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर बाढ़ और मलबे से हुई तबाही की जानकारी देते चीनी अधिकारी।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर बाढ़ और मलबे से हुई तबाही की जानकारी देते चीनी अधिकारी।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर आपदा की जानकारी देते चीनी वैज्ञानिक सु पेंगचेंग, साथ में चीन-नेपाल सीमा का नक्शा।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर आपदा की जानकारी देते चीनी वैज्ञानिक सु पेंगचेंग, साथ में चीन-नेपाल सीमा का नक्शा।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर चीनी झंडे के पास मलबे में लोगों की तलाश करते बचावकर्मी।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर चीनी झंडे के पास मलबे में लोगों की तलाश करते बचावकर्मी।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके में मलबे की तलाश करते बचावकर्मी।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके में मलबे की तलाश करते बचावकर्मी।

चीन-नेपाल सीमा पर बाढ़ में बह गई इमिग्रेशन बिल्डिंग की जगह पर मलबा हटाते बचावकर्मी।

चीन-नेपाल सीमा पर बाढ़ में बह गई इमिग्रेशन बिल्डिंग की जगह पर मलबा हटाते बचावकर्मी।

चीन ने पहली बार विदेशी मीडिया को दिखाई तबाही

दौरे के दौरान पत्रकारों ने प्रभावित इलाके में चल रहे बचाव अभियान को देखा। नारंगी रंग की वर्दी पहने बचावकर्मी खुदाई मशीनों, फावड़ों और जमीन के नीचे तलाश करने वाले रडार की मदद से लोगों और शवों को खोज रहे हैं।

आपदा से पहले यहां चीन की पांच मंजिला कस्टम्स बिल्डिंग थी, लेकिन अब उसका कोई निशान नहीं बचा है। करीब 20 मीटर ऊंचा बॉर्डर गेट भी मलबे में दब गया है। वहां सिर्फ पास के पानी के टावर का एक हिस्सा दिखाई दे रहा है।

जहां पहले बॉर्डर गेट था, वहां चीन का झंडा लगाया गया है। आसपास का पूरा इलाका भूरे-काले मलबे से ढका हुआ है। बचावकर्मी चेतावनी वाले बोर्ड के पीछे लगातार खुदाई कर रहे हैं।

तिब्बत-नेपाल सीमा पर बनाए गए ग्यिरोंग पोर्ट पर 26 अगस्त को आई बाढ़ के मलबे में कई लोग दब गए।

तिब्बत-नेपाल सीमा पर बनाए गए ग्यिरोंग पोर्ट पर 26 अगस्त को आई बाढ़ के मलबे में कई लोग दब गए।

खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

लाइव अपडेट्स

37 मिनट पहले

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चीन का दावा- नेपाल की तरफ ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही

26 अगस्त को नेपाल की तरफ ग्लेशियर टूटने के बाद पानी, मिट्टी और मलबे की तेज लहर चीन की सीमा तक पहुंची। इसने ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग को पूरी तरह तबाह कर दिया।

हादसे के वीडियो में पानी, मिट्टी और मलबे की काली लहर तेजी से बॉर्डर क्रॉसिंग की ओर बढ़ती दिखाई देती है। लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने का ज्यादा समय नहीं मिला।

चीन का कहना है कि हादसे की शुरुआत नेपाल की तरफ ग्लेशियर टूटने से हुई थी। इसके बाद चीन ने प्रभावित इलाके में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया।

37 मिनट पहले

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शवों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट-टैटू का रिकॉर्ड

मलबे से मिले शवों की पहचान के लिए बचाव दल फिंगरप्रिंट और टैटू जैसे पहचान वाले निशानों का रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। मौके से अब तक 993 निजी सामान भी मिले हैं, जिनसे लापता लोगों की पहचान में मदद मिल सकती है।

हालांकि, लापता विदेशी नागरिकों के परिवार और उनके देशों के राजनयिक चीन से ज्यादा जानकारी साझा करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने नागरिकों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही।

रॉयटर्स से बातचीत में चार देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि चीन ने अभी यह साफ नहीं किया है कि बरामद शवों की DNA जांच कैसे होगी। उन्होंने यह भी पूछा कि बॉर्डर की CCTV और चेहरे पहचानने वाली फुटेज से शवों की पहचान की जाएगी या नहीं और क्या यह जानकारी परिवारों को दी जाएगी।

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बाढ़ को लेकर दी गई जानकारी पारदर्शी और समय पर है। मंत्रालय ने दूसरे देशों और एजेंसियों के साथ काम करने की तैयारी भी जताई है।

37 मिनट पहले

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नेपाल-तिब्बत के बीच कारोबार और कैलाश यात्रा का अहम रास्ता

ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग चीन के तिब्बत और नेपाल के बीच कारोबार और आवाजाही का अहम रास्ता है।

2015 के भूकंप में पूर्व की तरफ मौजूद दूसरे रास्ते को नुकसान पहुंचने के बाद ग्यिरोंग नेपाल और तिब्बत के बीच कारोबार और लोगों की आवाजाही का मुख्य रास्ता बन गया था।

इस रास्ते से चीन से नेपाल की ओर इलेक्ट्रिक वाहनों समेत कई तरह का सामान भेजा जाता था। नेपाल के रास्ते तिब्बत में माउंट कैलाश जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी यह अहम रास्ता है।

चीन अब इस बॉर्डर क्रॉसिंग को दोबारा बनाने पर विचार कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इसे फिर से बनाया गया तो डिजाइन में बदलाव किया जा सकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

तबाही से पहले ग्योरोंग पोर्ट दिखने में ऐसा था।

तबाही से पहले ग्योरोंग पोर्ट दिखने में ऐसा था।

38 मिनट पहले

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पहले भी ग्लेशियर की बाढ़ से बंद हुआ था बॉर्डर

ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग इससे पहले भी पिछले साल जुलाई से जनवरी तक बंद रहा था। उस समय ग्लेशियर से आई बाढ़ के कारण रास्ता बंद करना पड़ा था।

इस घटना के बाद ग्लेशियर और उनसे बनने वाली झीलों की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

जुलाई 2025 में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट में भूस्खलन के बाद का दृश्य। यह आपदा ग्लेशियर की झील का पानी बाहर निकलने से आई बाढ़ के कारण हुई थी।

जुलाई 2025 में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट में भूस्खलन के बाद का दृश्य। यह आपदा ग्लेशियर की झील का पानी बाहर निकलने से आई बाढ़ के कारण हुई थी।

चीनी वैज्ञानिकों के मुताबिक, तिब्बत और आसपास के इलाकों में 3,000 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें हैं। इनमें से 187 को ज्यादा जोखिम वाली झीलों के तौर पर चिन्हित किया गया है। इनकी निगरानी जमीन पर और दूर से सेंसर की मदद से की जाती है।

चीन के आपातकालीन बचाव मुख्यालय के उप प्रमुख नोरबू त्सेरिंग ने कहा कि ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए निगरानी और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया।

38 मिनट पहले

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चीन में 43 की मौत, 519 लोग अब भी लापता

चीनी अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार तक चीन की तरफ 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 519 लोग लापता थे। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता लोगों में 49 भारतीय भी हैं।

लापता विदेशी नागरिकों में कई तीर्थयात्री हैं, जो नेपाल के रास्ते तिब्बत में माउंट कैलाश की यात्रा पर गए थे।



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