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Chirag Paswan NDA Rift | Bihar Government Statement Controversy 5 Disagreements In 17 Days


बिहार और केंद्र सरकार में NDA के सहयोगी चिराग पासवान अपनी ही सरकार पर हमलावर हैं। 17 दिन में 5 बार सरकार के खिलाफ बयान दिया है। वहीं, केंद्र सरकार पर चुप हैं। चुनाव आयोग और UCC बिल पर अपना पक्ष रखा है।

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बिहार में गिरती कानून व्यवस्था पर यहां तक कह दिया कि अपनी सरकार से शर्मिंदगी महसूस हो रही है। UP चुनाव से ठीक पहले चिराग पासवान के इस रुख पर बिहार में सियासत शुरू हो गई है। विपक्ष उन्हें सरकार से इस्तीफा देने की मांग कर रहा है तो सत्ता पक्ष के मंत्री बिहार में वक्त गुजारने की नसीहत दे रहे हैं।

क्या अपने पिता के नक्शेकदम पर चल रहे हैं चिराग। क्या NDA से अलग होने वाले हैं। क्या सम्राट सरकार से खुश नहीं हैं। 5 पॉइंट में चिराग के बयान के मायने समझिए….

पहले चिराग के बयान पढ़िए

27 सितंबर: बेटियों के खिलाफ हिंसा के मामले पर

‘आज की तारीख में बिहार में कोई सुरक्षित नहीं महसूस कर पा रहा है। ये हमारी सरकार की चिंता है। मुझे खुद शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि मैं ऐसी सरकार के साथ हूं जहां ऐसी घटना हो रही हैं। मैं जिस सरकार का हिस्सा हूं, मेरी वो सरकार अगर सुरक्षा की भावना ना दे, ये तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा।’

25 सितंबर: चुनाव आयोग के विवाद पर

‘सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करना चाहता। अगर जनता का चुनावी व्यवस्था से भरोसा उठने लगे तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं होगा। चुनाव आयोग को और अधिक मजबूती से अपना स्पष्टीकरण सबके सामने रखना चाहिए। जनता के मन में जो शंकाएं पैदा हुई हैं, उन्हें दूर करना चाहिए।’

14 सितंबर: UCC बिल पर

‘भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएं और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पहले यूसीसी का ड्राफ्ट सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो, उसके बाद सभी स्थितियों का देखकर पार्टी अपना मत रखेगी।’

अब 6 सवालों में इस बयान के मायने जानिए

सवाल 1- क्या चिराग केंद्र में बड़ा मंत्रालय चाहते हैं?

जवाब: तीन टर्म के सांसद चिराग पासवान को 2024 में पहली बार मोदी सरकार में मंत्री बनाया गया। वे सीधे केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाए गए, लेकिन उन्हें जो मंत्रालय मिला उससे ज्यादा की डिमांड वे लगातार करते रहे हैं।

चिराग पासवान को मोदी कैबिनेट में फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री मिली। ये वही मंत्रालय है जो उनसे पहले उनके चाचा पशुपति पारस के पास था। बजट के लिहाज से केंद्र के लोएस्ट 5 मिनिस्ट्री में आता है। इस मंत्रालय को इस वित्तीय वर्ष में 4064 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।

अब जब एक बार फिर से केंद्रीय कैबिनेट विस्तार की बात हो रही है तो चिराग अपने लिए अच्छा पोर्टफोलियो चाहते हैं। सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडेय बताते हैं, चिराग पासवान इस बात को अच्छे से समझते कि कब किस चीज के लिए बार्गेनिंग करनी है। उनके पिता केंद्र में कई बड़े मंत्रालय संभाल चुके हैं। ऐसे में चिराग की भी ये चाहत है कि उन्हें पिता का मंत्रालय मिले। इसके साथ ही वे बिहार में एक और मंत्री पद चाहते हैं।’

अगर रामविलास पासवान के मंत्रालय को देखें तो 1999 की वाजपेयी सरकार में उन्हें संचार विभाग मिला था। बाद में वे कोयला एवं खान मंत्री रहे। 2014 में मोदी सरकार में उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय मिला था। इससे पहले UPA सरकार में वे इस्पात, रेल, संचार और संसदीय कार्य मंत्री बने थे।

सवाल 2- राज्यसभा के बाद MLC चुनाव में तवज्जो नहीं मिलने से नाराज हैं?

जवाब: सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडेय बताते हैं, ‘राज्यसभा चुनाव में चिराग पासवान की इच्छा थी कि एक सीट मिले। उन्हें सीट नहीं मिली। उनके विधायकों ने NDA के कैंडिडेट को समर्थन दिया। अब शिक्षक और टीचर निर्वाचन कोटे की 8 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। BJP और JDU ने 4-4 सीट आपस में बांट ली। उन्हें तवज्जो नहीं मिली। चिराग एक अच्छे बार्गेनर हैं। उन्हें पता है कि कब किस मुद्दे को कितना उठाना है।’

सवाल 3- क्या UP चुनाव में गठबंधन का दबाव बना रहे हैं?

जवाब: चिराग पासवान बिहार, झारखंड और नागालैंड के बाद अब यूपी और पंजाब में भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। बिहार में उनकी पार्टी सत्ता में है। झारखंड में उनके एक विधायक हैं। नागालैंड में LJP(R) के दो विधायक हैं। ऐसे में अब अगर उनकी पार्टी एक या दो राज्यों में अपना खाता खोलने में सफल रहती है तो राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सकता है।

चिराग पासवान की कोशिश थी कि झारखंड में भी उनका BJP के साथ गठबंधन हो, लेकिन वे इसमें फेल रहे। अकेले चुनाव लड़े। एक सीट जीतने में भी सफल रहे। अब उनका फोकस यूपी में है।

यहां फिलहाल वे गठबंधन में कुछ भी स्पष्ट नहीं बोल रहे हैं, लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं, ताकि यूपी में भी उनकी पार्टी का प्रदर्शन बेहतर हो सके।

सवाल 4: क्या है नेशनल पार्टी का दर्जा मिलने के नियम?

जवाब: इलेक्शन कमीशन के नियमों के मुताबिक किसी राजनीतिक दल को नेशनल पार्टी का दर्जा मिलने के लिए तीन में से कोई एक शर्त पूरी करनी होती है..

पार्टी को लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम चार अलग-अलग राज्यों में कुल वैध वोटों का कम से कम 6% वोट मिले हों। इसके अलावा उसने किसी एक राज्य या राज्यों से लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीती हों।

पार्टी ने लोकसभा चुनाव में कम से कम 2% सीटें जीती हों, ये सांसद कम से कम तीन अलग-अलग राज्यों से चुने गए हों। पार्टी को कम से कम चार राज्यों में क्षेत्रीय या राज्य पार्टी का दर्जा प्राप्त हो।

सवाल-5. क्या अपने पिता के नक्शेकदम पर चल रहे चिराग?

जवाब: चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान को भारत की सियासत का मौसम वैज्ञानिक माना जाता है। वे अक्सर उस गठबंधन का हिस्सा रहे जो सरकार में रही।

रामविलास पासवान की सियासत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि 2002 में उन्होंने जिस NDA का साथ मोदी विरोध के नाम पर छोड़ा, 2014 में NDA का हिस्सा उसी मोदी के नाम पर बने। 2004 में कांग्रेस के साथ मिलकर UPA का हिस्सा रहे। 2009 के चुनाव में कांग्रेस का साथ छोड़कर लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर कांग्रेस के विरोध में चुनाव लड़े।

सीनियर जर्नलिस्ट संतोष यादव बताते हैं ,’चिराग पासवान मौसम वैज्ञानिक के बेटे हैं। मौसम भांप रहे हैं। एक नई राह वे तलाश रहे हैं। ताकि अगर नाव डूबने लगे तो वे बाहर निकल जाएं। ये अभी भूमिका बनाना शुरू किए हैं। पहले से हर मुद्दा उठाते रहे हैं।’

सवाल-6: क्या चिराग की नाराजगी का असर सरकार पर पड़ सकता है?

जवाब: जमुई सांसद और चिराग के बहनोई अरुण भारती ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि न तो बिहार सरकार को और न ही केंद्र सरकार को कोई समस्या है। सरकार पूरी तरह स्थिर है और आगे भी रहेगी।

अरुण भारती ने कहा, ‘ये कहां लिखा है कि सरकार में रहने के बाद समस्याओं पर ध्यान नहीं दीजिएगा। अगर कोई समस्या नहीं बताएगा तो समाधान कैसे होगा। समाजवादी शुरू से ही मुखर होकर बोलते रहे हैं।’

BJP का जवाब- मीडिया में नहीं सरकार के पास बोलिए

सीएम सम्राट चौधरी के लीडरशिप में इस बार BJP भी चिराग को खुली छूट देने के लिए राजी नहीं है। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते चिराग जब सरकार पर हमलावर होते थे तब BJP के नेता शांत रहते थे।

इस बार BJP भी उन्हें घेरने की तैयारी कर रही है। यही कारण है चिराग को जवाब देने के लिए पार्टी ने उन्हीं के इलाके और जाति के नेता लखेंद्र पासवान को आगे किया।

लखेंद्र पासवान ने कहा, ‘लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की आजादी है। इन्हें कोई रोक नहीं सकता है। जिन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही है मैं उनसे निवेदन करूंगा कि बिहार पर ध्यान दें, बिहार आइए। सरकार आपकी राय और आपके विचार मानने की स्थिति में है। मीडिया में बोलने की जगह सरकार के पास आकर बोलिए।’



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