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CM Dhami Stays Dehradun-Rishikesh Highway Tree Felling


अब तक करीब 350 पेड़ काटे जा चुके हैं।

देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना के तहत सात मोड़ के जंगल में प्रस्तावित 4369 पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। हालांकि अभी तक 350 से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्थानीय लोगों, पर्यावरणविदों और अ

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मुख्यमंत्री का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सात मोड़ में पिछले कई दिनों से पेड़ कटान के विरोध में आंदोलन चल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के देहरादून दौरे के दौरान भी प्रदर्शनकारियों ने उनका काफिला रोककर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की थी।

CM की 5 बड़ी बातें…

1. प्रमुख सचिव को दोबारा बातचीत की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ फिर से विस्तृत संवाद करें। उनका कहना है कि सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही आगे का रास्ता तय किया जाएगा।

2. विकास जरूरी, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं

सीएम ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए आधारभूत ढांचा जरूरी है, लेकिन इसके लिए जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। सरकार विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की नीति पर काम करेगी।

3. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम

धामी ने बताया कि परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के लिए करीब 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास बनाया जाएगा। इसके अलावा छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट भी प्रस्तावित हैं, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत की घटनाएं कम हों।

4. हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप होगी आगे की कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय के सभी निर्देशों और निर्णयों का पूरा सम्मान किया जाएगा। आगे की प्रक्रिया भी तय कानूनी और पर्यावरणीय प्रावधानों के तहत ही आगे बढ़ेगी।

5. सरकार की प्राथमिकता- प्रकृति, जनभावना और विकास

सीएम ने कहा कि उत्तराखंड की प्रकृति, जनता की भावनाएं और राज्य का विकास तीनों सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर आगे बढ़ेगी।

13 दिन तक चला विरोध, ‘ब्लैक हरेला’ भी मनाया

सात मोड़ में पेड़ कटान के विरोध में पिछले 13 दिनों से प्रदर्शन चल रहा था। स्थानीय लोगों, पर्यावरणविदों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ये धरना जारी रखा। कई मौकों पर प्रदर्शनकारी पेड़ों से चिपक गए और कटान रोकने की कोशिश की। इस दौरान NHAI की टीम और आंदोलनकारियों के बीच कई बार नोकझोंक भी हुई।

हरेला के दिन आंदोलनकारियों ने ‘ब्लैक हरेला’ मनाकर विरोध दर्ज कराया। पौधारोपण की जगह लोगों ने हाथों में काले पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन किया। पूरे आंदोलन के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के नेता कई बार धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया।

राहुल गांधी ने आंदोलनकारियों से की मुलाकात

शुक्रवार रात ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद जौलीग्रांट एयरपोर्ट लौटते समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देहरादून-ऋषिकेश हाईवे पर सात मोड़ के पास अपना काफिला रोक दिया था। यहां पिछले 12 दिनों से पेड़ कटान के विरोध में धरने पर बैठे आंदोलनकारियों ने उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी।

राहुल गांधी ने उनकी बातें सुनीं और कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल से चर्चा करेंगे। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ी तो इस मामले को संसद और अन्य उचित मंचों पर भी उठाया जाएगा।

बीती रात प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी की कार को रोक कर अपनी बात रखी।

बीती रात प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी की कार को रोक कर अपनी बात रखी।

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पिछले नौ दिनों से हम यहीं बैठे हैं। हर साल हरेला पर पेड़ लगाते थे, लेकिन इस बार उन्हीं पेड़ों को बचाने के लिए धरना देना पड़ रहा है। विकास के नाम पर सदियों पुराने साल के जंगल काटे जा रहे हैं। आखिर यह कैसा हरेला है? (पढ़ें पूरी खबर)



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