- Hindi News
- Opinion
- Column By Pt. Vijay Shankar Mehta – Preserve Spirituality While Embracing Technology
3 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

पं. विजयशंकर मेहता
मेरी विदेश यात्राओं के दौरान मुझसे सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न यह रहा कि एआई को आप आध्यात्मिक दृष्टि से कैसे देखते हैं? एआई के उपयोग में हमें विवेक का प्रयोग लगातार करना पड़ेगा, वरना हम जान ही नहीं पाएंगे कि यह खुशबू कब दुर्गंध में बदल जाएगी।
हमारे यहां एक शब्द है- “उभय भांति’। हमें दोनों ही स्थितियों में काम करना आना चाहिए। हमारा धर्म और अध्यात्म भी बचा रहे और हम तकनीक का उपयोग भी करें। यह प्रयोग श्रीराम ने किया था। जब विभीषण उनकी शरण में आए तो अधिकांश लोगों ने सलाह दी कि शत्रु का भाई है, बंदी बना लें।
लेकिन राम ने कहा था- “उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत, जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत।’ दोनों ही स्थिति में उसे ले आओ। हनुमान जी अंगद लेने चले गए।
राम जी यह कहते हैं कि वो शत्रुभाव से आया है तो लक्ष्मण काफी हैं और शरणागति से आया है तो मेरी नीति ही शरणागति की है। एआई विभीषण की तरह हमारे सामने है। हमें “उभय भांति’ की तरह उसका उपयोग करना चाहिए।

