अंतिम विदाई को दौरान ढोल की थाप पर नाचती हुई महिलाएं
फाजिल्का में गुरुवार को 108 साल की बुजुर्ग महिला को अनोखी अंतिम विदाई दी गई। घर से श्मशान तक ढोल बजाए गए। साथ में पटाखे छोड़े गए। इस दौरान महिला के परिजनों ने भंगड़ा भी डाला।
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बुजुर्ग की एक सप्ताह पहले तबीयत बिगड़ी थी और उनका इलाज चल रहा था। गुरुवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने अपनी जिंदगी में परिवार की चौथी पीढ़ी को भी देखा। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार के 75 से ज्यादा सदस्य अंतिम संस्कार के लिए जुटे।
परिवार ने गम में डूबने के बजाय उनकी लंबी जिंदगी का जश्न मनाते हुए विदाई दी। गुब्बारों के साथ अर्थी को सजाया गया। पड़पोते ने बताया कि पड़दादी की आखिरी इच्छा थी कि ढोल पर नाच कर उन्हें अंतिम विदाई दी जाए, जो पूरी की गई है।

गुब्बारों के साथ बुजुर्ग महिला की अर्थी को सजाया गया।
एक सप्ताह से चल रहा था इलाज किशनाई बाई फाजिल्की के गांव अरणीवाला की रहने वाली थीं। उनके पोते सुखजीत सिंह ने बताया कि दादी की उम्र करीब 108 साल थी। पाकिस्तान में उनका जन्म हुआ था। इसके बाद भारत में आकर बस गए। एक सप्ताह पहले उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।
किशनाई बाई के दो बेटे और एक बेटी हैं। तीनों की शादी हो चुकी है। उनके बच्चों की भी शादी हुई और आगे उनकी भी संतान हैं। इस तरह परिवार की चौथी पीढ़ी उनके सामने ही आगे बढ़ी।

बुजुर्ग की अंतिम विदाई में पहुंची महिलाएं।
पोते ने कहा- दादी ने परिवार का पालन पोषण सुखजीत सिंह ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले उनकी नानी का देहांत हुआ था। जिनकी उम्र भी 106 वर्ष थी। उनकी दादी नानी से 2 साल बड़ी थी। दादा का काफी समय पहले देहांत हो गया था। जब वह पैदा भी नहीं हुए थे। इसके बाद दादी ने ही परिवार का पालन पोषण किया।
आवाज से परिवार के सदस्यों को पहचानती थीं उन्होंने कहा कि दादी की यादाश्त सही थी, लेकिन आंखों से दिखना थोड़ा कम हो गया था। उम्र के मुताबिक आंखों की रोशनी कम हो गई थी, लेकिन आवाज से वह अपने सदस्य को पहचान लेती थी। दादी ने हमेशा उन्हें मेहनत कर रोटी कमाकर खाने के प्रति प्रेरित किया था।

पड़पोते के साथ बुजुर्ग महिला किशनाई बाई की फोटो।
परिवार में 75 से ज्यादा सदस्य पड़पोते जश्न ने बताया कि पड़दादी की आखिरी इच्छा थी कि जब वह स्वर्गवास हो तो ढोल पर नाच कर उन्हें अंतिम विदाई दी जाए, जो पूरी की गई है। जश्न ने कहा कि पड़दादी उन्हें बताती थी कि वह आजादी के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे। यहां अपना घर बसाया था। परिवार में अब 75 से ज्यादा सदस्य हैं।
ढोल बजाकर और भांगड़ा डालकर दी अंतिम विदाई अंतिम संस्कार के दौरान घर से लेकर श्मशान भूमि तक ढोल बजते रहे। बड़ी संख्या में जुटे परिवार के सदस्यों ने भंगड़ा डाला और पटाखे चलाकर किशनाई बाई को विदाई दी। परिवार ने इसे उनकी लंबी और पूरी जिंदगी के सम्मान के तौर पर मनाया।
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