8 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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भारतीय खाने में एक ही थाली में कई तरह के कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें शामिल होना आम है। दाल-चावल के साथ रोटी, पूरी के साथ आलू की सब्जी, राजमा-चावल के साथ रोटी या छोले के साथ भटूरे। ये हमारे रोजमर्रा के पसंदीदा कॉम्बिनेशन हैं।
इनमें से कोई एक चीज खाना अपने आप में गलत नहीं है। समस्या तब होती है, जब एक ही मील में जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें एक साथ खाई जाएं। इसे ‘डबल कार्बिंग’ कहते हैं।
डेली ज्यादा मात्रा में कार्ब्स (खासकर रिफाइंड कार्ब्स) लेने से सिर्फ कैलोरी नहीं बढ़ती है। इससे वजन बढ़ता है, ब्लड शुगर बढ़ता है, इंसुलिन बढ़ता है और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की संभावना बढ़ती है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में डबल कार्बिंग की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- डबल कार्बिंग क्यों नुकसानदायक है?
- कार्ब्स खाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- अपना भोजन समझदारी और जिम्मेदारी से कैसे चुनें?
एक्सपर्ट- अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली
सवाल- डबल कार्बिंग क्या है?
जवाब- इसका मतलब ‘एक ही मील में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर दो फूड एक साथ खाना’ है, जैसेकि-
- रोटी के साथ चावल।
- पास्ता के साथ गार्लिक ब्रेड।
- नूडल्स के साथ फ्राइज।
सवाल- डबल कार्बिंग और सिर्फ ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने में क्या अंतर है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
डबल कार्बिंग
- एक ही मील में कार्बोहाइड्रेट के दो सोर्स शामिल करना।
- उदाहरण के लिए रोटी के साथ चावल या पास्ता के साथ गार्लिक ब्रेड खाना।
- इसमें कुल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम या ज्यादा, दोनों हो सकती है।
- फोकस इस बात पर है कि प्लेट में कार्बोहाइड्रेट के कितने सोर्स हैं।
ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाना
- शरीर की जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट लेना।
- उदाहरण के लिए 5-6 रोटियां या 3-4 प्लेट चावल खा लेना।
- इसमें कार्बोहाइड्रेट का एक ही सोर्स भी हो सकता है।
- फोकस कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा पर है।
सवाल- कौन-से कॉमन फूड कॉम्बिनेशन में अनजाने में डबल कार्बिंग हो जाती है?
जवाब- रोजमर्रा के खाने में कई बार मेन कोर्स के साथ स्टार्च वाला साइड फूड (जैसे फ्रेंच फ्राइज, आलू या मैश्ड पोटैटो) जोड़ने से अनजाने में डबल कार्बिंग हो जाती है। ग्राफिक में ऐसे फूड कॉम्बिनेशन की लिस्ट देखिए-

सवाल- क्या दाल-चावल भी डबल कार्बिंग है?
जवाब- यह आमतौर पर डबल कार्बिंग नहीं है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- चावल मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का सोर्स है। जबकि दाल में कार्बोहाइड्रेट के साथ अच्छी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर भी होता है।
- दोनों साथ खाने से मील में कार्ब्स के साथ प्रोटीन और फाइबर भी जुड़ते हैं। लेकिन चावल-दाल की मात्रा ज्यादा हो तो मील में कुल कार्बोहाइड्रेट बढ़ सकता है।
सवाल- क्या सभी कार्बोहाइड्रेट शरीर पर एक जैसा असर डालते हैं?
जवाब- नहीं, सभी कार्बोहाइड्रेट शरीर पर एक जैसा असर नहीं डालते। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
सिंपल कार्ब्स
- ये शरीर में जल्दी पचते और ग्लूकोज में बदलते हैं।
- इनसे शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है।
- चीनी, मिठाई, शुगरी ड्रिंक्स जैसी चीजें इसके उदाहरण हैं।
- ये ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकते हैं।
कॉम्प्लेक्स कार्ब्स
- ये आमतौर पर धीरे पचते हैं और लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं।
- साबुत अनाज, ओट्स, दालें और फलियां इसके उदाहरण हैं।
- इनमें आमतौर पर फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है।
हाई GI कार्ब्स
- इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है।
- ये खाने के बाद ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।
- सफेद ब्रेड और कई रिफाइंड अनाज इसके उदाहरण हैं।
लो GI कार्ब्स
- इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।
- ये ब्लड शुगर को धीरे बढ़ाते हैं।
- दालें, बीन्स और कुछ साबुत अनाज इसके उदाहरण हैं।
सवाल- दो कार्बोहाइड्रेट सोर्स एक साथ खाने पर शरीर में क्या होता है?
जवाब- शरीर इन कार्ब्स को तोड़कर एनर्जी के लिए इस्तेमाल करता है। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कार्ब्स खाने से मेटाबॉलिक हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। ग्राफिक में इसका असर देखिए-

सवाल- डबल कार्बिंग से इंसुलिन ज्यादा क्यों रिलीज होता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- जब एक मील में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा (खासकर रिफाइंड कार्ब्स) ज्यादा होती है, तो वे पचकर ग्लूकोज में बदलते हैं और ब्लड शुगर तेजी से बढ़ाते हैं।
- इसे कंट्रोल करने के लिए पैंक्रियाज इंसुलिन रिलीज करता है।
- इंसुलिन ग्लूकोज को ब्लड से शरीर की सेल्स तक पहुंचाने में मदद करता है, जहां इसका इस्तेमाल एनर्जी के लिए होता है।
- जितना ज्यादा और तेजी से ब्लड ग्लूकोज बढ़ता है। शरीर उसे संभालने के लिए आमतौर पर उतना ज्यादा इंसुलिन रिलीज करता है।
सवाल- क्या रोटी और चावल साथ खाने से वजन बढ़ता है?
जवाब- नहीं, वजन बढ़ना मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि दिनभर में जितनी कैलोरी खर्च करते हैं, उसके मुकाबले कितनी कैलोरी ले रहे हैं। दाल, सब्जी और सलाद के साथ सीमित मात्रा में रोटी-चावल खाने से मील बैलेंस्ड रहता है।
सवाल- क्या रोज दो कार्बोहाइड्रेट सोर्स एक साथ खाने से टाइप-2 डायबिटीज का रिस्क बढ़ता है?
जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह के कार्बोहाइड्रेट और कितनी मात्रा में खा रहे हैं, जैसेकि–
- अगर आप रोज ज्यादा मात्रा में रिफाइंड कार्ब्स खाते हैं, तो ब्लड शुगर बार-बार तेजी से बढ़ता है।
- लंबे समय तक ऐसी डाइट लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का रिस्क बढ़ता है।
सवाल- किन लोगों के लिए ज्यादा कार्ब वाला मील नुकसानदायक है?
जवाब- जिनका मेटाबॉलिज्म पहले से स्लो है, उनके लिए ज्यादा कार्ब्स पचाना मुश्किल हो सकता है। किन्हें ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हेल्दी थाली में कार्ब्स, प्रोटीन और सब्जियों का अनुपात क्या होना चाहिए?
जवाब- हेल्दी थाली में सब्जियों का हिस्सा सबसे ज्यादा, जबकि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का हिस्सा उससे कम रखना चाहिए। ग्राफिक में अनुपात देखिए-

सवाल- कार्ब्स के साथ प्रोटीन और फाइबर खाने से क्या फायदा होता है?
जवाब- कार्ब्स शरीर को मुख्य रूप से एनर्जी देता है। जबकि प्रोटीन मसल्स और टिश्यू की ग्रोथ व रिपेयर में मदद करता है। वहीं फाइबर पाचन व गट हेल्थ के लिए जरूरी है।

सवाल- चावल छोड़ना बेहतर है या उसकी मात्रा कम करना?
जवाब- चावल पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसकी मात्रा अपनी उम्र, फिजिकल एक्टिविटी, कुल डाइट और हेल्थ कंडीशन के अनुसार तय करनी चाहिए।
सवाल- रोटी और चावल दोनों खाने हों तो थाली को कैसे बैलेंस करें?
जवाब- दोनों की मात्रा कम रखें और बाकी थाली में प्रोटीन, सब्जियां और सलाद शामिल करें।
सवाल- डबल कार्बिंग से बचने के लिए खाने में कौन-से बदलाव करें?
जवाब- रोज के मील को इस तरह प्लान करें कि अनजाने में कार्ब्स की मात्रा जरूरत से ज्यादा न हो। डबल कार्बिंग से बचने के टिप्स ग्राफिक में देखिए-

डबल कार्बिंग से जुड़े सवाल-जवाब
सवाल- क्या कभी-कभार डबल कार्बिंग की जा सकती है?
जवाब- हां, एक स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभार डबल कार्बिंग कर सकता है।
सवाल- क्या एक्सरसाइज करने वालों को भी डबल कार्बिंग से बचना चाहिए?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- शरीर एक्सरसाइज के दौरान कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाले ग्लूकोज और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन का इस्तेमाल एनर्जी के लिए करता है।
- लंबे समय तक या हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज करने वालों को पर्याप्त कार्ब्स की जरूरत होती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि वे ज्यादा मात्रा में रिफाइंड कार्ब्स खाएं।
- इसके लिए साबुत अनाज, फल और दूसरे कम प्रोसेस्ड कार्ब सोर्स को प्राथमिकता दें।
सवाल- नाश्ते में डबल कार्बिंग ज्यादा नुकसान करती है या डिनर में?
जवाब- डबल कार्बिंग नाश्ते में हो या डिनर में, उसका असर समय से तय नहीं होता। ज्यादा मायने ये रखता है कि किस तरह के कार्ब्स, कितनी मात्रा में और किन फूड्स के साथ खा रहे हैं।
सवाल- क्या मिलेट (बाजरा, ज्वार, रागी) के साथ चावल या रोटी खाना भी डबल कार्बिंग माना जाएगा?
जवाब- हां, इसमें भी एक ही मील में दो कार्ब सोर्स शामिल होते हैं। हालांकि, मिलेट्स में फाइबर, प्रोटीन और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी मिलते हैं। ऐसे में इन्हें रिफाइंड कार्ब्स के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
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ग्राफिक्स- अंकुर बंसल
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