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अमृतसर में अकाल तख्त के जत्थेदार से मिलने पहुंचे जगदीश सिंह झींडा।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGMC) के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने अकाल तख्त साहिब में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज से मुलाकात की। उन्होंने देशभर के गुरुद्वारों के लिए ‘ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट’ बनाने और बेहतर प्रबंधन की मांग की।
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झींडा ने कहा कि 1925 का सिख गुरुद्वारा एक्ट पुराना है। देश के बंटवारे के बाद सिख कई राज्यों में फैल गए हैं। मौजूदा व्यवस्था देशभर के सिखों का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं कर पा रही। इस मौके पर कमेटी सदस्य सुखविंदर सिंह मंडाना (लाडवा), इंद्रजीत सिंह (पिहोवा) और हरमनप्रीत सिंह (थानेसर) भी मौजूद रहे।
उन्होंने केंद्र सरकार से ‘नेशनल सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी’ (NSGMC) बनाने की मांग की। यह संस्था सिखों की संसद की तरह काम करे, जिसमें देशभर के सिखों के चुने हुए प्रतिनिधि हों।
झींडा ने महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सिखों को राष्ट्रीय प्रबंधन में उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही। नए कानून का मसौदा 1986 में जस्टिस हरबंस सिंह के मसौदे पर आधारित होगा।
राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को सौंपेंगे मांगपत्र झींडा ने कहा कि इस मांग को लेकर वह हाल ही में लेह-लद्दाख के डिवीजनल कमिश्नर और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को मांगपत्र सौंप चुके हैं। अब देश के विभिन्न राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को भी मांगपत्र दिए जाएंगे। इसके जरिए केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री तक यह मुद्दा पहुंचाया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने की दिशा में पहल हो सके।
पंथक एकता के लिए आगे आएं अकाल तख्त सिख पंथ की एकता पर जोर देते हुए झींडा ने कहा कि राजनीतिक गुटबाजी और पद की लालसा के कारण सिख समुदाय में बंटवारा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मूल अकाली दल के सिद्धांतों को पीछे छोड़कर कई राजनीतिक गुट बन गए हैं। ऐसे समय में सिख समुदाय को ‘एक झंडा, एक निशान’ के तहत एकजुट करने की जरूरत है। उन्होंने जत्थेदार से अपील की कि वे पंथक एकता के लिए आगे आएं और सिख समुदाय का मार्गदर्शन करें।
अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को राजनीति से दूर रखने की अपील अकाल तख्त साहिब से जुड़े हालिया विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए झींडा ने कहा कि धार्मिक तख्तों की मर्यादा को राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक विवादों को धार्मिक संस्थाओं से दूर रखें तथा श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्च मर्यादा और सम्मान बनाए रखें।
