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IDFC First Bank Scam | ED Raid Chandigarh Mohali Panchkula Jewellers


ट्राईसिटी में ईडी के रेड के दौरान कोठी के बाहर खड़े पैरामिलिट्री के जवान।

IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े 645 करोड़ रुपये के चर्चित सरकारी फंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-II की टीमों ने मंगलवार को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में एक साथ 14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।

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यह पूरी कार्रवाई हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों के पैसों में हुई धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में की गई है। ED की जांच में सामने आया है कि सरकारी खातों से गायब की गई रकम को ज्वेलर्स और उनसे जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इस रकम को सामान्य कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाकर पैसों की असली उत्पत्ति को छिपाया गया और उसे ‘सफेद’ करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, बिचौलिए गौरव कंसल ने सरकारी फंड को अलग-अलग फर्जी व ज्वेलर्स के खातों में रूट और लेयर करने में मुख्य भूमिका निभाई।

IAS अधिकारियों तक पहुंची रिश्वत की आंच

ED के आरोपों के मुताबिक, फर्जीवाड़े की इस रकम का एक बड़ा हिस्सा IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में शामिल हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को बतौर रिश्वत पहुंचाया गया। इस मामले में CBI पहले ही पंचकूला की विशेष अदालत में अपनी तीसरी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें इन अधिकारियों को नामजद किया गया है।

FIR से खुला था फर्जीवाड़ा

मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज FIR से हुई थी। जांच में पता चला था कि हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी खातों के बैलेंस में भारी गड़बड़ी है। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।

नए व पुख्ता सुबूत का दावा

ED का कहना है कि ताजा छापेमारी के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग, पैसों की लेयरिंग और सरकारी फंड के रूटिंग से जुड़े कई नए और पुख्ता सबूत मिले हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, जिससे कई और बड़े नामों का खुलासा होने की संभावना है।



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