इंदौर4 मिनट पहले
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13 वर्षीय बालक के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने के मामले में इंदौर की विशेष POCSO कोर्ट ने 60 वर्षीय आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत भी 10 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 15 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला 13 अगस्त को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय ने सुनाया।
अभियोजन के अनुसार पीड़ित बालक के पिता एक बंगले पर ड्राइवर के रूप में काम करते थे और बंगले के पीछे बने क्वार्टर में परिवार के साथ रहते थे। इसी परिसर में आरोपी भी रहता था और बंगले पर खाना बनाने का काम करता था।
13 अक्टूबर 2023 को दोपहर में बालक के पिता घर लौटे तो उनका बेटा घर पर नहीं मिला। पूछताछ करने पर पता चला कि बालक आरोपी के क्वार्टर से बाहर आया था। पिता ने बालक से पूछताछ की तो उसने बताया कि आरोपी ने उसके साथ गलत काम किया।
इसके बाद पिता ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। अभियोजन के अनुसार 15 अक्टूबर तक कोई उचित कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित के पिता, उसकी पत्नी और एक परिचित के साथ तिलकनगर थाने पहुंचे और घटना की सूचना दी।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भादि व की धारा 377 और POCSO एक्ट की धारा 5/6 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
9 गवाहों की गवाही से साबित हुआ मामला
विवेचना के दौरान पुलिस ने संबंधित गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में अभियोग-पत्र पेश किया गया।
अभियोजन ने कोर्ट में 9 गवाहों के बयान कराए। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों की गवाही के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया और सजा सुनाई।
पीड़ित को 4 लाख रुपए मुआवजे की अनुशंसा
कोर्ट ने पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत बालक को हुई शारीरिक और मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए उसे 4 लाख रुपए की राशि दिए जाने की अनुशंसा भी की है।
सजा: POCSO एक्ट की धारा 3/4 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और IPC की धारा 377 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास; कुल 15 हजार रुपए अर्थदंड। शासन की ओर से सीमा शर्मा (विशेष लोक अभियोजक) नेकी।

