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Jasmine Bhasin Concussion Diagnosis; Traumatic Brain Injury Symptoms & Safety Tips


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11 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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हाल ही में टीवी एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन ने बताया कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ के एक स्टंट के बाद कुछ समय के लिए उनकी याददाश्त चली गई थी।

टेस्ट में उन्हें ‘माइल्ड कनकशन’ डायग्नोज हुआ। यह एक प्रकार की ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी (TBI) है, जो सिर पर चोट या तेज झटके के बाद हो सकती है। इससे कुछ समय के लिए ब्रेन की नॉर्मल फंक्शनिंग प्रभावित हो सकती है। कनकशन खेल, सड़क दुर्घटना या किसी अन्य हादसे के बाद भी हो सकता है। ऐसे में इसके संकेतों और रिस्क को समझना जरूरी है।

इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में कनकशन के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके लक्षण क्या हैं?
  • किन लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है?

एक्सपर्ट: डॉ. उत्कर्ष भगत, सीनियर कंसल्टेंट, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम

सवाल- कनकशन क्या होता है?

जवाब- यह एक ब्रेन इंजरी है। इसमें सिर पर चोट या अचानक तेज झटका लगने के बाद ब्रेन पर प्रेशर पड़ता है। इससे ब्रेन कुछ समय के लिए सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता।

सवाल- कनकशन कैसे होता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • ब्रेन का टिश्यू बहुत सॉफ्ट होता है। यह सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) से घिरा रहता है।
  • यह ब्रेन और खोपड़ी के बीच कुशन की तरह काम करता है।
  • इसे ऐसे समझिए, जैसे किसी कांच के बर्तन में जेली रखी हो। अगर बर्तन को जोर से झटका दिया जाए तो जेली भी हिलने लगती है। कनकशन के दौरान भी कुछ ऐसा ही होता है।
  • जब सिर, गर्दन या शरीर पर तेज चोट लगती है तो उसका झटका ब्रेन तक पहुंचता है और उसे हिला देता है।
  • इस वजह से ब्रेन की छोटी नसें और ब्लड वेसल्स मुड़ सकती हैं या डैमेज हो सकती हैं। यही कनकशन की वजह बनता है।

ग्राफिक में इसके सभी कारण देखिए-

सवाल- क्या सिर में कोई भी चोट लगे तो कनकशन हो जाता है?

जवाब- नहीं, कई बार चोट सिर्फ बाहरी हिस्से तक सीमित रहती है। इसमें सिर्फ मामूली सूजन, कट या दर्द होता है। कनकशन तभी होता है, जब चोट या झटके का असर ब्रेन पर पड़े। डॉक्टर चोट के बाद दिखने वाले लक्षणों और जांच के आधार पर कनकशन की पहचान करते हैं।

सवाल- किन्हें कनकशन का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कनकशन किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- जो लोग किसी खास मेडिकेशन पर हैं, क्या उनमें इसका रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- हां, ऐसे लागों में सिर की चोट के बाद गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स का रिस्क ज्यादा होता है। पॉइंटर्स से समझिए-

  • जो लोग ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली) दवाएं लेते हैं, उनमें सिर की चोट के बाद ब्रेन में ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ जाता है।
  • इनमें वारफरिन, एपिक्साबैन, रिवरोक्साबैन, डैबिगाट्रान और हेपारिन जैसी दवाएं शामिल हैं।
  • डॉक्टर एस्पिरिन और क्लोपिडोग्रेल जैसी एंटीप्लेटलेट दवाएं लेने वाले लोगों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

सवाल- कनकशन के सामान्य लक्षण क्या हैं?

जवाब- कनकशन के लक्षण चोट लगने के तुरंत बाद दिख सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों में ये कई घंटे या कई दिनों बाद भी नजर आ सकते हैं। इसके लक्षण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हो सकते हैं। ग्राफिक में सभी लक्षण देखिए-

सवाल- क्या बच्चों में कनकशन के अलग लक्षण होते हैं?

जवाब- हां, छोटे बच्चों में कनकशन के लक्षण वयस्कों से कुछ अलग हो सकते हैं। कई बार बच्चे अपनी परेशानी ठीक से बता नहीं पाते, इसलिए उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। इनमें ये बदलाव शामिल हैं-

  • चिड़चिड़ापन
  • लगातार रोना
  • बार-बार उल्टी होना
  • ज्यादा सुस्ती या थकान
  • खाने-पीने में रुचि कम होना
  • नींद के पैटर्न में बदलाव
  • खेलकूद या पसंदीदा एक्टिविटीज में रुचि कम होना
  • संतुलन बनाने में परेशानी
  • फोकस करने में दिक्कत

सवाल- कौन से लक्षण इमरजेंसी हैं?

जवाब- कनकशन के ये लक्षण इमरजेंसी के संकेत हैं-

  • सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो।
  • बार-बार उल्टी हो।
  • बोलने, चलने या समझने में दिक्कत हो।
  • व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखे।
  • शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन हो।
  • आंखों की पुतलियां असामान्य दिखें।
  • दौरे पड़ें।
  • बेहोशी हो।

सवाल- कनकशन डायग्नोस कैसे होता है?

जवाब- कनकशन का कोई एक खास टेस्ट नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर लक्षणों, इंजरी हिस्ट्री और न्यूरोलॉजिकल चेकअप के आधार पर इसका पता लगाते हैं। इसके लिए-

  • डॉक्टर मरीज की याददाश्त, संतुलन, फोकस, आंखों का मूवमेंट और रिएक्शन टाइम चेक करते हैं।
  • ब्रेन में ब्लीडिंग, फ्रैक्चर या किसी गंभीर चोट का शक होने पर CT स्कैन या MRI की सलाह देते हैं।

सवाल- सिर में चोट लगे तो तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • कुछ समय तक खेल, व्यायाम और हैवी फिजिकल एक्टिविटी से न करें। तुरंत आराम करें।
  • मोबाइल, टीवी, वीडियो गेम और अन्य ज्यादा फोकस वाली एक्टिविटी सीमित करें।
  • सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, कंफ्यूजन या याददाश्त से जुड़ी समस्या हो तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- कनकशन होने पर कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

जवाब- कनकशन के बाद पहले 1-2 दिन तक ऐसी एक्टिविटीज से बचें, जिनमें ज्यादा फोकस की जरूरत पड़ती है। ये एक्टिविटीज लक्षणों को बढ़ा सकती हैं और रिकवरी को धीमा कर सकती हैं। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कनकशन से और क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

जवाब- कनकशन के बाद कुछ मामलों में गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जैसेकि-

  • खोपड़ी के अंदर या ब्रेन में ब्लीडिंग।
  • ब्रेन में इंफ्लेमेशन।
  • ब्रेन की सामान्य संरचना में बदलाव आना।
  • खोपड़ी (स्कल) में फ्रैक्चर।

अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह ठीक हुए बिना दोबारा खेलकूद या अन्य रिस्की एक्टिविटीज करता है, तो उसे गंभीर कनकशन हो सकता है। इसे ‘सेकेंड-इम्पैक्ट सिंड्रोम’ कहते हैं। इससे ब्रेन में गंभीर सूजन या ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ता है और रेयर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है।

सवाल- पोस्ट-कनकशन सिंड्रोम क्या है?

जवाब- ज्यादातर लोगों में कनकशन के लक्षण कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों में सिरदर्द, चक्कर, थकान, फोकस में परेशानी, याददाश्त की समस्या या नींद से जुड़ी दिक्कतें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। जब ये लक्षण कनकशन के बाद कई हफ्तों या महीनों तक बने रहते हैं, तो इस स्थिति को ‘पोस्ट-कनकशन सिंड्रोम’ कहते हैं।

सवाल- क्या कनकशन के बाद डिप्रेशन हो सकता है?

जवाब- हां, कुछ मामलों में डिप्रेशन हो सकता है। इसलिए अगर उदासी, चिंता या व्यवहार में बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

सवाल- कनकशन से बचाव के लिए क्या करें?

जवाब- कनकशन का रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए-

  • बाइक या साइकिल चलाते समय हेलमेट पहनें।
  • कार में हमेशा सीट बेल्ट लगाएं।
  • खेलों के दौरान जरूरी सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें।
  • खेल के नियमों का पालन करें।
  • सीढ़ियों, फिसलन वाली जगहों और ऊंचाई पर काम करते समय सावधानी बरतें।
  • खेलते समय बच्चों पर निगरानी रखें।
  • बुजुर्गों का खास ख्याल रखें।
  • सिर पर चोट लगने के बाद लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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