झारखंड में सिविल सर्विसेज और SSC एग्जाम में धांधली को लेकर 16 दिन से प्रोटेस्ट जारी है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और दो छात्राओं सहित कुल 5 लोग भूख हड़ताल पर हैं। झारखंड सरकार छात्रों से 3 दौर की बातचीत के बाद भी प्रोटेस्ट खत्म नहीं करवा पा रही।
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आखिर भूख हड़ताल को क्यों मजबूर छात्र, सरकार मांगों पर कोई फैसला क्यों नहीं ले रही, इसके पीछे क्या राजनीतिक फैक्टर, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: हड़ताल पर बैठे छात्र कौन हैं, उनकी हालत कैसी है? जवाब: देवेंद्र महतो सहित कुल 5 लोग भूख हड़ताल पर हैं…

- 33 साल के देवेंद्र ने संस्कृत से MA और फिर बीएड किया। विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी लड़ा। 2 अगस्त से 5 अगस्त तक बिना पानी के थे।
- 8 अगस्त को देवेंद्र ने कहा, ‘मेरा ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कम है। शरीर डिहाइड्रेट हो गया है। अंग साथ नहीं दे रहे हैं।’
- 9 अगस्त की सुबह 3 बजे देवेंद्र की तबीयत बिगड़ी। इसे बाद उन्हें ड्रिप के जरिए फ्लूड दिया गया।

- राहुल 4 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं। तबीयत बिगड़ने पर 7 अगस्त को उन्हें रांची सदर हॉस्पिटल ले जाया गया था।
- पोस्ट ग्रेजुएशन, बीएड और 2016 में TGT एग्जाम पास करने वाले राहुल ने बताया कि उन्हें OBC कैटेगरी में आखिरी सिलेक्टेड अभ्यर्थी से 20 नंबर ज्यादा मिले, लेकिन झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नौकरी नहीं मिली।
- राहुल ने 2024 में असिस्टेंट आचार्य रिक्रूटमेंट एग्जाम भी दिया, लेकिन 26,001 में से 11,500 की नियुक्ति हुई। कोर्ट के आदेश के बाद राहुल सहित 264 अभ्यर्थियों को उम्र में छूट मिली और वो 14वें JPSC एग्जाम में बैठे।

- रुपेश 4 अगस्त से अनशन पर हैं। उन्होंने 2020 में बीएड, 2022 में अंग्रेजी से पोस्ट -ग्रेजुएट और 2024 में पॉलिटिकल साइंस से मास्टर्स किया।
- 2024 के JSSC CGL एग्जाम में उन्हें 83% मार्क्स आए, लेकिन उनका रिजल्ट नहीं आया। कम नंबर लाने वाले अभार्थियों का सिलेक्शन हो गया।
- सितंबर 2025 में रूपेश हाई कोर्ट गए, एक जांच कमेटी भी बनी, लेकिन कोई नतीजा नहीं आया है। कुल करीब 2000 पदों में से सैकड़ों पद खाली हैं।

- सविता 4 अगस्त से अनशन पर हैं। रांची महिला विश्वविद्यालय से 2020 में ग्रेजुएट होने के बाद JPSC CGL, नगर निगम भर्ती, आबकारी कांस्टेबल भर्ती और JPSC एग्जाम दे चुकी हैं।
- 2023 में एक्साइज कांस्टेबल, JECCE का फिजिकल एग्जाम निकाला, जिसमें 11 अभ्यर्थियों की मौत हुई थी।
- अप्रैल 2026 में रिटेन एग्जाम से पुलिस ने लीक करवाने के आरोप में 159 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया और एग्जाम नहीं हो पाया।

- हबीबा 4 अगस्त से अनशन पर हैं। अंग्रेजी में ग्रेजुएशन के दौरान जिले के टॉप 10 स्टूडेंट्स में से एक थीं।
- 2017 में पंचायत सचिव का एग्जाम पास किया, लेकिन उम्र लिमिट से एक दिन कम थी।
- इस एग्जाम में 5 पोस्ट पर 3,088 वैकेंसी थीं। दो लिस्ट जारी हो चुकी हैं, तीसरी लिस्ट अब तक नहीं आई है। उन्होंने 3 साल तैयारी के बाद JPSC और कई अन्य एग्जाम भी दिए हैं। डॉ. एपी सिन्हा की अगुवाई में सदर अस्पताल की टीम ने इन लोगों की जांच की। डॉ. सिन्हा के मुताबिक, ‘छात्रों का वजन घटा है। ब्लड प्रेशर, पल्स वगैरह फिलहाल ठीक हैं और वे मानसिक रूप से स्थिर हैं। अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया है।’
सवाल-2: आखिर ये लोग भूख हड़ताल पर क्यों मजबूर हुए? जवाब: 19 अप्रैल 2026 को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन, यानी JPSC ने 103 सीनियर प्रशासनिक पदों के लिए 14वें जॉइंट सिविल सर्विसेज (CSE) का प्रीलिम्स एग्जाम करवाया। इसके बाद विवाद शुरू हुआ…
- 2 जुलाई को आए रिजल्ट में 2204 अभ्यर्थी मेन्स एग्जाम के लिए चुने गए। मेन्स एग्जाम की डेट सिर्फ 17 दिन बाद 18-20 जुलाई दी गई।
- स्टूडेंट्स ने पेपर लीक और सिलेक्शन में गड़बड़ी के आरोप लगाए। एक अभ्यर्थी की कथित OMR शीट वायरल हुई। इसमें 100 में सिर्फ 48 सवालों के जवाब थे, फिर भी उसे पास किया गया। स्टूडेंट्स ने आरोप लगाए कि नौकरियां खुलेआम बेची गईं।
- अभ्यर्थियों को नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल ले जाकर जवाब याद करवाए गए। एग्जाम सेंटर पर इंटरनेट बंद हुआ। कट-ऑफ मार्क्स सार्वजनिक नहीं हुए। OMR शीट में हेरफेर हुआ।
- 21 जुलाई को FIR दर्ज हुई और CID ने JPSC ऑफिस से एग्जाम की डिप्टी कंट्रोलर श्वेता कुमारी गुप्ता, एग्जाम करवाने वाली एजेंसी TDPL के स्टाफ सहित कुल 8 लोगों को अरेस्ट किया।
- TDPL को मई 2025 में JPSC ने गड़बड़ी के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था। फिर भी ये CSE करवाने में शामिल थी।
- 22 जुलाई को JPSC चेयरमैन एल. खियांगते ने ‘निष्पक्ष जांच में सहयोग की इच्छा’ जताते हुए इस्तीफा दे दिया। 23 जुलाई को सत्ताधारी JMM के नेता और सीएम हेमंत सोरेन ने CID को जांच सौंपी।
- चूंकि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC रिक्रूटमेंट में भी गड़बड़ी के आरोप लगे थे। इसलिए 25 जुलाई को JPSC और JSSC ने 25 जुलाई से 29 सितंबर तक होने वाले 9 एग्जाम रद्द किए।
- इसी दिन रांची में मोरहाबादी की बापू वाटिका में स्टूडेंट्स ने आंदोलन शुरू कर दिया। दो अलग मंच बने- ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ और ‘JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच।’ इसकी अगुवाई छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं। देवेंद्र क्षेत्रीय पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से भी जुड़े हैं।
- 28 जुलाई को आंदोलन रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शिफ्ट हुआ। 2 अगस्त से देवेंद्र भूख हड़ताल पर बैठ गए। देवेंद्र के अलावा 2 छात्राएं और दो छात्र भी भूख हड़ताल पर हैं।
छात्रों की 3 प्रमुख मागें हैं…
- 14वां JPSC एग्जाम रद्द करके CBI, ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से जांच हो, क्योंकि CID राज्य सरकार के अधीन है।
- TDPL के करवाए सारे एग्जाम रद्द करके ब्लैकलिस्ट किया जाए और आगे किसी भरोसेमंद कंपनी से एग्जाम करवाए जाएं।
- JPSC और JSSC के भ्रष्ट ऑफिसर्स को हटाया जाए। सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बने।
5 अगस्त को सरकार ने बातचीत के लिए चार मंत्रियों की एक कमेटी बनाई, सीएम सोरेन ने बातचीत का न्योता दिया, उसके बाद 3 दौर की बातचीत हुई है।
सवाल-3: स्टूडेंट्स और सरकार के बीच अब तक क्या बात हुई है? जवाब: छात्रों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच 7, 8 और 9 अगस्त को 3 दौर की बातचीत के बावजूद अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं आया है… 7 अगस्त को JPSC/JSSC रिफॉर्म मंच के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और सरकार की बनाई 4 मंत्रियों की कमेटी के बीच बैठक हुई। इसमें उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू (JMM), कल्याण मंत्री चमरा लिंडा (JMM), ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका सिंह पांडे (कांग्रेस) और उद्योग मंत्री संजय यादव (RJD) हैं।
फिर 8 अगस्त को ‘JPSC-JSSC न्याय मंच’ यानी देवेंद्र वाले गुट के 8 लोग मोहराबादी के गेस्ट हाउस पहुंचे। यहां मंत्रियों से दौर की बातचीत हुई। सुदिव्य ने एक ईमेल आईडी जारी करते हुए कहा कि छात्र अपने सुझाव सरकार को भेजें, ताकि उन पर विचार किया जा सके। संजय यादव ने माना कि छात्रों की मांगे जायज हैं और वे इन्हें सीएम के सामने पेश करेंगे। छात्रों ने कहा कि उन्होंने मांगें बता दी हैं। मुख्यमंत्री सोरेन के फैसले के बाद ही वे भूख हड़ताल और आंदोलन वापस लेंगे। अगर 9 अगस्त तक मांगे नहीं मानी गईं, तो 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे।
देवेंद्र ने कहा, ‘अगर शुक्रवार को हुई बैठक में सरकार ने मांगें मान ली होतीं, तो दोबारा बैठक की जरूरत नहीं पड़तीं, क्योंकि मांगें एक जैसी ही हैं।
9 अगस्त को छात्रों के 7 प्रतिनिधियों के साथ करीब 4 घंटे तक तीसरे दौर की बातचीत हुई, खबर आई कि JPSC परीक्षा रद्द करने पर सहमति बन गई है। 50 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन गई है। सीएम सोरेन ने कहा, ‘सरकार अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे युवाओं को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने चोरी पकड़ी है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।’
हालांकि छात्रों ने सभी मांगें पूरी होने की मांग रखी है और 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करने को कहा है।

जयपाल सिंह स्टेडियम में अलग-अलग दो मंचों पर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं।
सवाल-4: आखिर सरकार को सारी मांगें मानने में दिक्कत क्या है? जवाब: 3 बड़ी वजहें हैं… 1. सभी मांगें मानने में प्रक्रिया, कानून की अड़चन
- अभी CID की जांच और JPSC के ऑफिसर्स से पूछताछ जारी है। 19 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
- वहीं JPSC एक स्वायत्त संवैधानिक बॉडी है, यानी अपने फैसले खुद करती है। इसलिए सीएम के एक आदेश से एग्जाम रद्द करना आसान नहीं है। पहले आयोग की अपनी जांच रिपोर्ट और फिर आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी।
- बिना फाइनल जांच रिपोर्ट के पूरी परीक्षा रद्द करने पर पास हुए स्टूडेंट्स इसे कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
- पॉलिटिकल एनालिस्ट विजय त्रिवेदी कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट में दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की तरह एक क्लियर ऑब्जेक्टिव नहीं है। पूरी व्यवस्था सुधारने की कई मांगें हैं, जिन्हें सरकार पूरा करना चाहे, तो भी तो लंबा समय लगेगा।’
2. नौकरी में धांधली का पिटारा खुलने का खतरा
- झारखंड में पेपर लीक और भर्ती में धांधली का पुराना इतिहास है। छोटे-बड़े दर्जनों एग्जाम में पेपर लीक, एजेंसीज की लापरवाही के मामले और पैसे लेकर नौकरी देने के आरोप हैं।
- झारखंड में नेता विपक्ष बीजेपी के बाबू लाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि JPSC में फर्जी भर्ती के लिए रेट चार्ट तय था – प्री पास करवाने का 5 लाख, मेन्स का 25, इंटरव्यू का 10 लाख मिलाकर कुल 40 लाख रुपए।धांधली का पूरा सिस्टम सरकार के संरक्षण में चल रहा है और CID से जांच करवाके बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।
- JKLM के नेता और विधायक जयराम महतो ने भी कहा है, ‘CBI जांच होनी चाहिए। सरकार को अच्छी तरह पता है कि दोषी कौन हैं। लाखों रुपए में सीटें बेची जा रही हैं। असंभव है कि कोई मामूली अधिकारी अकेले इतनी बड़ी रकम पचा सके। इसमें ताकतवर लोग शामिल हैं और इस बात का डर है कि वो पर्दे के पीछे से बेनकाब न हो जाएं।’
3. सोरेन को ED,CBI पर भरोसा नहीं
- सरकार का मानना है कि जांच CBI को सौंपने से राज्य की पुलिस और CID की साख पर सवाल उठेगा। हेमंत सोरेन खुद भी इन केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आ चुके हैं।
- जनवरी 2024 में ED ने उनको मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके चलते उन्हें गिरफ्तारी से पहले, इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि बाद में हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।
- नवंबर 2023 में, CBI ने भी अवैध खनन के आरोप में सोरेन के सहयोगी पंकज मिश्रा के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

2 फरवरी 2024 को सोरेन ED की 5 दिनों की हिरासत में रहे थे।
सवाल-5: क्या प्रोटेस्ट खत्म न करवाने के पीछे कोई राजनीतिक फैक्टर भी है? जवाब: पहले झारखंड का राजनीतिक गणित समझिए…2024 विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी JMM को सबसे ज्यादा 34 सीटें मिलीं। कांग्रेस, RJD और CPI(ML) सरकार की सहयोगी हैं। वहीं मुख्य विपक्षी दल बीजेपी को 21 सीटें मिली थीं। बाबू लाल मरांडी इससे पहले भी स्वास्थ्य विभाग, ट्रेजरी, वन विभाग, सिपाही भर्ती, JSSC में गड़बड़ी को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं।
JPSC प्रोटेस्ट शुरू हुआ, तो झारखंड में राजनीतिक रस्साकशी और तेज हो गई है…
- 22 जुलाई को भाजपा युवामोर्चा ने JPSC ऑफिस का घेराव किया। 23 जुलाई को कांग्रेस कार्यकर्ता भी बीजेपी ऑफिस घेरने पहुंचे। दो घंटे हंगामा चला।
- कॉकरोच पार्टी के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में सहयोगी रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा रांची पहुंचीं, तो उन पर अमरनाथ पांडे नाम के युवक ने स्याही फेंक दी। आरोप लगा कि वह RSS से जुड़ा है।
- मरांडी और सीता सोरेन जैसे बीजेपी नेता देवेंद्र महतो के समर्थन में धरना-स्थल तक पहुंचे।
- कहा जा रहा है कि राजनीतिक लोगों के चलते ही छात्रों ने अलग मंच बनाया। छात्रों का कहना था कि वे आंदोलन पर राजनीतिक नियंत्रण नहीं चाहते।
- 9 अगस्त को सोरेन ने भी कहा, ‘आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। मैं युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे प्रोटेस्ट के लिए राजनीतिक संरक्षण न लें, न्याय आपका अधिकार है।’
विजय त्रिवेदी कहते हैं, ‘अगर इस आंदोलन में ऐसे नतीजे आए, जिनको विपक्ष ने अपनी जीत की तरह दिखाया, तो हेमंत सोरेन पर दबाव बनेगा। अभी झारखंड में चुनाव नहीं है और सोरेन बहुमत से सत्ता में हैं, इसलिए उन्हें कोई खतरा नहीं है और वो बीजेपी को कोई स्पेस नहीं देना चाहते।’
विजय के मुताबिक, बीजेपी भी ज्यादा प्रेशर नहीं बना पा रही, क्योंकि फिर सवाल उठने लगेंगे कि NEET प्रोटेस्ट में इतनी तत्परता से आंदोलनकारी छात्रों की मांगें क्यों नहीं मानी थीं।’

देवेंद्र महतो से बात करतीं नेहा बोरा
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झारखंड में छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा:सरकार ने 50% मांगे मानी; JPSC-PT रद्द करने पर सहमति, JSSC-CGL पर नहीं बनी बात, कल विधानसभा का घेराव

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा में धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन आज 16वें दिन भी जारी है। सरकार और छात्रों के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई। बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए 14वीं जेपीएससी की पीटी परीक्षा रद्द करने पर सहमति बन गई है। पूरी खबर पढ़ें…
