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जींद जिले में एक शख्स ने ICICI बैंक से करीब 65 लाख रुपए का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन लिया। उसने बैंक को बिना बताए, गिरवी रखी 135 कनाल जमीन अपनी पत्नी और दो बेटों के नाम ट्रांसफर करवा दी। इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपए है।
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इस वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद जींद पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जांच शुरू की। उप निदेशक अभियोजन (DDPO) की कानूनी सलाह पर सिविल लाइन जींद थाने में मामला दर्ज किया गया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी का है। FIR नंबर 185 दर्ज की गई है।
कैसे बुना गया ठगी का यह ताना-बाना?
पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरी साजिश के मुख्य आरोपी गांव गढ़वाली खेड़ा तहसील जुलाना, जिला जींद निवासी जगदीश और उसकी पत्नी ओमपति हैं। आरोपियों ने बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने की नीयत से बेहद सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया।
आरोपी जगदीश के बेटे मोहित ने पहले ICICI बैंक की गोहाना शाखा से 49.90 लाख रुपए का लोन लिया था। इसके बाद, आरोपी जगदीश और ओमपति ने जींद शाखा से अपनी 135 कनाल 19 मरले जमीन पर लोन की सीमा बढ़वाकर इसे 65 लाख रुपए करवा लिया।
जींद शाखा ने नया लोन मंजूर करते हुए 50.42 लाख रुपए गोहाना शाखा के पुराने लोन खाते को बंद करने के लिए ट्रांसफर किए, जबकि बची हुई करीब 7 लाख रुपए की राशि जगदीश के निजी बचत खाते में भेज दी गई।
18 सितंबर 2024 को गोहाना शाखा का पुराना लोन चुकता होने के बाद, नियमानुसार जुलाना तहसील में जमीन को ‘फक आड़ रहन’ (बैंक चार्ज मुक्त) कराया गया, ताकि जींद शाखा का नया लोन इस पर दर्ज किया जा सके।
बेटों और पत्नी के नाम ट्रांसफर की जमीन
बैंक अधिकारी जब तक जींद शाखा का नया चार्ज (Lien) सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करवा पाते, उससे पहले ही शातिर जगदीश ने अगले ही दिन यानी 19 सितंबर 2024 (वसीका नंबर 1364) को ‘ब्लड ट्रांसफर डीड’ के जरिए अपनी पूरी जमीन अपने दोनों बेटों मोहित व दीपांशु और पत्नी ओमपति के नाम ट्रांसफर कर दी।
EOW की जांच में बेनकाब हुआ आरोपी का झूठ
इस मामले की शिकायत मिलने पर जींद पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के इंचार्ज अजय और एएसआई (ASI) सतीश कुमार ने गहन जांच शुरू की, जिसमें आरोपी के दावों की पोल खुल गई
- आरोपी का झूठा दावा: पूछताछ के दौरान आरोपी जगदीश ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने बयान दिया कि उसने कोई नया लोन नहीं लिया और बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर को घर पर ही नकद (कैश) भुगतान कर दिया था।
- दस्तावेजों ने खोली पोल: पुलिस और बैंक के आधिकारिक दस्तावेजों की जांच में आरोपी का यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। बैंक रिकॉर्ड से साफ हुआ कि आरोपी ने खुद ‘डेबिट ऑथराइजेशन फॉर्म’ भरकर नए खाते से पुराने खाते में पैसे ट्रांसफर करवाए थे। इसके अलावा, नया लोन लेते समय उसने बैंक में एक शपथ पत्र (Affidavit) भी दिया था कि वह बैंक की अनुमति के बिना इस जमीन को किसी अन्य के नाम ट्रांसफर या बिक्री नहीं करेगा।
कानूनी राय के बाद सिविल लाइन थाने में केस दर्ज
मामले की गंभीरता, राजस्व रिकॉर्ड और बैंक खातों के फॉरेंसिक अध्ययन के बाद, उप निदेशक अभियोजन (DDPO) जींद ने इसे प्रथम दृष्टया सुनियोजित धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला माना।
DDPO जींद के स्पष्ट आदेशों के बाद पुलिस ने आरोपी जगदीश और उसकी पत्नी ओमपति के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और इस साजिश में शामिल अन्य संदिग्धों व राजस्व विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
