खेल के मैदान में मेडल जीतने वाली जोधपुर की डिंपल खींची ने NEET-UG 2026 में सफलता हासिल की है। रोप स्कीपिंग की नेशनल प्लेयर रही डिंपल की 5 हजार 609 रैंक आई है। डिंपल ने 10 दिन में 3 एग्जाम क्रैक किए हैं। वह 3 साल से किसी भी सामाजिक कार्यक्रम या फंक्शन
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वहीं नीट पेपर रद्द होने के बाद 21 जून री-नीट की परीक्षा हुई थी। टीचर्स का कहना है कि पेपर लीक की खबर सुनने के बाद कुछ स्टूडेंट्स डिप्रेशन में आ गए थे। बच्चों को डिप्रेशन से निकालने के लिए टीचर्स ने घर-घर जाकर समझाया था। यहां तक कि एग्जाम सेंटर तक उन्हें छोड़ने गए थे। अब स्टूडेंट अपने अच्छे रिजल्ट से खुश हैं।

डिंपल खींची रोप स्कीपिंग की नेशनल प्लेयर रही हैं। 2019 में नेशनल में सिल्वर मेडल जीता था।
10 दिन में तीन एग्जाम क्लियर किए
डिंपल खींची जोधपुर के बनाड स्थित नांदड़ी के फाटा इलाके में रहती हैं। डिंपल के पिता कुंदल सिंह खींची का कोरियर का बिजनेस है। डिंपल ने बताया – मेरी शुरुआती पढ़ाई नवोदय से हुई। इसके बाद 11वीं और 12वीं जोधपुर से की। मैं रोप स्कीपिंग की नेशनल प्लेयर रह चुकी हूं। 2019 में हुए नेशनल टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल हासिल किया था। इसके साथ ही क्लस्टर पर गोल्ड और रिजनल पर सिल्वर मेडल हासिल कर चुकी हूं।

डिंपल की मां अनिता कंवर का कहना है कि डिंपल के पापा का सपना था कि बेटी डॉक्टर बने।
पिता ने कहा- मेरा सपना अधूरा, तीन साल से कहीं नहीं गई
मां अनिता कंवर ने बताया कि डिंपल के पिता ने चाहते थे कि बेटी अपने परिवार का नाम रोशन करे। एक दिन उसे, उसके पिता ने कहा कि मेरा सपना है कि तू डॉक्टर बने। तब डिंपल ने कहा- मैं इसे जरूर पूरा करूंगी।
डिंपल ने पिछले 10 दिनों में 3 एग्जाम क्रैक कर चुकी है। हाल में एम्स नर्सिंग एग्जाम में डिंपल की ऑल इंडिया 379 रैंक थी। इसके अलावा आरयूएचएस नर्सिंग एग्जाम भी क्लियर किया और यहां 85 प्रतिशत नंबर हासिल किए। जब पिता को पता चला तो, कहा- मेरा सपना अब भी अधूरा है। गुरुवार, 16 जुलाई को नीट का रिजल्ट आया, तब डिंपल के पिता ऑफिस से घर आए ही थे। बेटी के सिलेक्शन पर वे भावुक हो गए। बोले- ‘अब मेरी बेटी ने मेरा सपना पूरा किया है।’

साइंस फैकल्टी के डॉ. अमराराम पटेल ने बताया- नीट पेपरलीक से कई स्टूडेंट तनाव में आ गए थे। ऐसे बच्चों के घर जाकर उन्हें मोटिवेट किया था।
टीचर बोले- नीट पेपर लीक के बाद बच्चे डिप्रेशन में थे
NEET-UG 2026 क्रैक करने वालों में कुछ स्टूडेंट वे भी हैं, जो पेपरलीक की खबरों के बाद डिप्रेशन में आ गए थे। ऐसे में टीचर्स के सामने बच्चों को दोबारा तैयारी करवाना सबसे बड़ा चैलेंज था।
साइंस फैकल्टी के डॉ. अमराराम पटेल ने बताया- बच्चों को डिप्रेशन से निकालना बहुत जरूरी था। इसके लिए हम बच्चों के घर तक गए। वहां उनके साथ उनके पेरेंट्स को समझाया कि उन्हें एक चांस और मिला है। यदि नंबर कम आए तो दूसरा मौका है कि कैसे इसे सुधार सकते हैं। इसके बाद इन बच्चों को लगातार कोचिंग दी गई। बच्चों को ऐसा न लगे कि वे अकेले हैं तो एग्जाम के दिन भी उन्हें सेंटर तक छोड़ने गए थे।
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