20 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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कुछ महिलाओं की जांघों और कूल्हों पर जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है। डाइटिंग और रेगुलर एक्सरसाइज से भी यह चर्बी कम नहीं होती। अक्सर लोग इसे मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यह लिपेडेमा (Lipedema) का संकेत हो सकता है।
यह एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें शरीर के निचले हिस्से में असामान्य रूप से फैट जमा होता है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है।
‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 11% वयस्क महिलाएं इससे प्रभावित हैं।
इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में लिपेडेमा को विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- लिपेडेमा और सामान्य मोटापे में क्या अंतर है?
- लिपेडेमा के लक्षण क्या हैं?
- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
एक्सपर्ट- डॉ. अंकित पोतदार, कंसल्टेंट, लेप्रोस्कोपी, बेरियाट्रिक एंड रोबोटिक सर्जन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई
सवाल- लिपेडेमा क्या है?
जवाब- लिपेडेमा फैट टिश्यू से जुड़ा एक क्रॉनिक डिसऑर्डर है। इसमें शरीर के कुछ हिस्सों (खासकर जांघों, कूल्हों, नितंबों और पैरों) में असामान्य रूप से फैट जमा होने लगता है।
सवाल- लिपेडेमा क्यों होता है?
जवाब- लिपेडेमा की सटीक वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि 20-60% मरीजों में इसकी फैमिली हिस्ट्री मिलती है। इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जेनेटिक फैक्टर्स इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव भी इससे जुड़े हो सकते हैं। ग्राफिक में रिस्क फैक्टर देखिए-

सवाल- लिपेडेमा कितने प्रकार का होता है?
जवाब- लक्षण के आधार पर लिपेडेमा को 5 प्रकारों में बांटा गया है–
- टाइप I: फैट नाभि (बेली बटन) से लेकर कूल्हों तक जमा होता है।
- टाइप II: फैट पेल्विस (श्रोणि) से घुटनों तक जमा होता है।
- टाइप III: फैट पेल्विस और टखनों के बीच होता है।
- टाइप IV: फैट कंधों और कलाइयों के बीच होता है।
- टाइप V: फैट घुटनों से टखनों तक जमा होता है।
ध्यान रखें, किसी भी व्यक्ति को एक ही समय में कई प्रकार का लिपेडेमा हो सकता है।
सवाल- लिपेडेमा और सामान्य मोटापे में क्या अंतर है?
जवाब- लिपेडेमा और मोटापा एक जैसे दिखते हैं, लेकिन दोनों अलग कंडीशंस हैं। सभी अंतर ग्राफिक में देखिए-

सवाल- लिपेडेमा के लक्षण क्या हैं?
जवाब- लिपेडेमा में शरीर के निचले हिस्से में असामान्य रूप से फैट जमा होने लगता है। इसके साथ दर्द, भारीपन और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
जवाब- इन स्थितियों में डॉक्टर से कंसल्ट करें-
- जांघों, कूल्हों या पैरों में लगातार चर्बी बढ़े।
- डाइटिंग और एक्सरसाइज के बावजूद फैट कम न हो।
- इसके साथ दर्द, सूजन, भारीपन हो।
- स्किन पर नीले निशान पड़ रहे हों।
- चलने-फिरने में दिक्कत हो।
सवाल- डॉक्टर लिपेडेमा का पता कैसे लगाते हैं?
जवाब- पॉइंटर्स से समझिए–
- डॉक्टर मरीज के लक्षण के आधार पर मेडिकल और फैमिली हिस्ट्री की जानकारी लेते हैं।
- इसके बाद प्रभावित हिस्सों की जांच करते हैं।
- टिश्यू, सूजन के पैटर्न और पैरों के आकार का आकलन करते हैं। लिपेडेमा की पहचान मुख्य रूप से क्लिनिकल जांच के आधार पर की जाती है।
- जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड, एमआरआई या अन्य टेस्ट से अन्य कारणों का पता लगाया जाता है।
सवाल- लिपेडेमा का इलाज क्या है?
जवाब- लिपेडेमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन इसके लक्षणों को मैनेज करने के लिए डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव, थेरेपी या अन्य उपचार की सलाह देते हैं। इसमें ये विकल्प शामिल हो सकते हैं-
- रेगुलर एक्सरसाइज (जैसे वॉकिंग, साइकिलिंग और स्विमिंग)।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी और हार्ट-हेल्दी डाइट।
- कंप्रेशन स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल।
- स्किन केयर के लिए मॉइश्चराइजर और जरूरत पड़ने पर दवाएं या सप्लीमेंट्स।
- लिम्फैटिक ड्रेनेज मसाज।
- सूजन या अन्य लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए दवाएं।
- जरूरत पड़ने पर पेन्यूमैटिक कंप्रेशन डिवाइस का उपयोग।
- गंभीर मामलों में लिपोसक्शन सर्जरी।
- BMI 35 से ज्यादा होने पर कुछ मरीजों में बैरिएट्रिक सर्जरी।

सवाल- अगर लिपेडेमा का इलाज न कराएं तो क्या कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं?
जवाब- समय पर इलाज न कराने पर लिपेडेमा धीरे-धीरे बढ़ सकता है और कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसेकि-
- चलने-फिरने में दिक्कत।
- लिम्फेडेमा या लिपो-लिम्फेडेमा।
- नसों से जुड़ी समस्याएं।
- जोड़ों की दिक्कत।
- फ्लैट फीट की समस्या।
- डिप्रेशन, एंग्जाइटी का रिस्क।
सवाल- लिपेडेमा का जोखिम कम करने के लिए क्या करें?
जवाब- समय पर पहचान और हेल्दी लाइफस्टाइल से लिपेडेमा की रफ्तार और लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। डिटेल ग्राफिक में देखिए-

सवाल- लिपेडेमा से पीड़ित व्यक्ति की दिनचर्या और खानपान कैसा होना चाहिए?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- रोजाना हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी करें।
- स्विमिंग, वॉकिंग या साइकिलिंग को प्राथमिकता दें।
- ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन खाएं।
- ज्यादा नमक, चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से बचें।
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।
- वेट कंट्रोल करें।
- पर्याप्त नींद लें।
- स्ट्रेस मैनेज करें।
- डॉक्टर की सलाह से रेगुलर दवाएं और थेरेपी लें।
लिपेडेमा से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब
सवाल- भारत में यह बीमारी कितनी कॉमन है?
जवाब- भारत में लिपेडेमा के मामलों के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि डॉक्टर अब पहले की तुलना में इस बीमारी की पहचान ज्यादा कर रहे हैं। फिर भी कई लोग इसे सामान्य मोटापा समझ लेते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में केस डायग्नोस नहीं हो पाते।
सवाल- क्या BMI सामान्य होने पर भी लिपेडेमा हो सकता है?
जवाब- हां, सामान्य BMI वाले लोगों में भी लिपेडेमा हो सकता है।
सवाल- क्या लिपेडेमा में दर्द होता है?
जवाब- हां, पैरों में दर्द, भारीपन और छूने पर दर्द महसूस होना इसके आम लक्षण हैं।
सवाल- क्या यह बीमारी जानलेवा है?
जवाब- नहीं, लिपेडेमा जानलेवा नहीं है। लेकिन इलाज न कराने पर इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है।
सवाल- क्या लिपेडेमा में वजन कम नहीं होता है?
जवाब- हां, लिपेडेमा से प्रभावित हिस्सों में जमा फैट पूरी तरह कम नहीं होता है।
सवाल- क्या एक्सरसाइज से लिपेडेमा ठीक हो सकता है?
जवाब- नहीं, हालांकि इससे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में सुधार हो सकता है।
सवाल- कौन-सी एक्सरसाइज लिपेडेमा में फायदेमंद है?
जवाब- वॉकिंग, स्विमिंग, साइकिलिंग और लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज फायदेमंद मानी जाती है।
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ग्राफिक्स- विपुल शर्मा
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