मंडी के युद्ध स्मारक में शहीदों को श्रद्धाजंलि देने के लिए एकत्रित पूर्व सैनिक लीग के सदस्य।
1965 के भारत-पाक युद्ध के 61 साल पूरे होने पर पूर्व सैनिक लीग मंडी ने बुधवार को युद्ध स्मारक मंडी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा। इस मौके पर पूर्व सैनिकों ने देश के लिए बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया। उनकी याद में दो मिनट का मौन भी रखा गया।
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कार्यक्रम में 1965 के युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की वीरता और साहस को याद किया गया। पूर्व सैनिकों ने बताया कि उस समय आधुनिक तकनीक और सैन्य प्रणालियां कम थीं। इसके बावजूद सैनिकों के हौसले और देश के प्रति समर्पण में कोई कमी नहीं थी। भारतीय जवानों ने दुश्मन के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया और देश की सीमाओं व सैन्य ठिकानों की रक्षा की।
पूर्व सैनिक लीग मंडी के वाइस चेयरमैन कर्नल तारा प्रताप सिंह राणा ने कहा कि 1965 का युद्ध भारतीय सैनिकों के शौर्य और बलिदान की ऐतिहासिक कहानी है। उन्होंने बताया कि आज देश जिस मजबूती से आगे बढ़ रहा है, उसमें वीर जवानों के त्याग और बलिदान की बड़ी भूमिका है। उन्होंने युवाओं से शहीदों के जीवन और उनके देशप्रेम से सीख लेने को कहा।
युद्ध की तकनीक और तरीका बदला
कर्नल राणा ने यह भी कहा कि समय के साथ युद्ध की तकनीक और तरीका बदल गया है। आज भारतीय सेना आधुनिक हथियारों, मिसाइल प्रणालियों, ड्रोन-रोधी तकनीक और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों से लैस है। लेकिन सैनिकों का साहस, अनुशासन और देश के प्रति समर्पण आज भी वैसा ही है।
शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना
कार्यक्रम के आखिर में पूर्व सैनिकों ने 1965 के युद्ध में शहीद हुए सभी वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके बलिदान को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया। दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

मंडी में शहीदों को मौन रखकर श्रद्धाजंलि देते पूर्व सैनिक लीग के सदस्य।

मंडी में शहीदों को श्रद्धाजंलि देते पूर्व सैनिक।
