एयर इंडिया की एयर होस्टेस से पुलिस अफसर बनीं नेहा पच्चीसिया आज FIR और सस्पेंशन के बाद चर्चा में हैं। MPPSC में 20वीं रैंक लाकर पुलिस सेवा में आईं और कटनी की CSP बनीं नेहा पर पहले ट्रांसपोर्टर से कथित वसूली की शिकायत हुई, फिर हत्या के एक केस में लापरव
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आखिर नेहा पच्चीसिया कौन हैं और आखिर सीएम को क्यों दखल देना पड़ा, मामला सस्पेंशन तक कैसे पहुंचा; समझते हैं आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में।
सवाल 1: कौन हैं नेहा पच्चीसिया…एयर होस्टेस से लेडी सिंघम तक कैसा रहा सफर?
जवाब- नेहा मूल रूप से राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की रहने वाली हैं।
- 12वीं के बाद उन्होंने एविएशन में डिप्लोमा किया और एयर इंडिया में एयर होस्टेस की नौकरी की। इसके बाद कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों में भी काम किया।
- बाद में उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा का रुख किया। 2012 से 2015 तक तैयारी के बाद MPPSC-2012 परीक्षा में पूरे प्रदेश में 20वीं रैंक हासिल की, अंतिम परिणाम 2016 में आया। पुलिस विभाग में आने से पहले उन्होंने कुछ समय महिला एवं बाल विकास विभाग में भी सेवाएं दीं।
- DSP (उप पुलिस अधीक्षक) चुने जाने के बाद उनकी पहली मैदानी पोस्टिंग गुना में CSP (नगर पुलिस अधीक्षक) के तौर पर हुई, जहां उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए महिला मोबाइल पुलिस स्टेशन शुरू किया, जिसे सराहना मिली। उन्हें लेडी सिंघम कहा जाने लगा।
- कोरोना काल में जिम्मेदारी से काम करने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सम्मानित भी किया था। लेकिन गुना पोस्टिंग विवादों से भी जुड़ी रही। फरवरी 2021 में वहां से उनका तबादला हुआ, जिसके बाद उनके नाम से एक फेसबुक पोस्ट में तत्कालीन ग्वालियर रेंज IG अविनाश शर्मा को तबादले का जिम्मेदार बताया गया था।
- नेहा ने इसे अपनी बदनामी के लिए रची गई साजिश बताया और आरोप लगाया कि गुना TI उनके खिलाफ गलत फीडबैक देकर शिकायतें कर रहे हैं। यह विवाद इतना बढ़ा कि उन्होंने नौकरी छोड़कर लड़ाई लड़ने तक की बात कही थी। इसके बाद वे भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) और खंडवा जिले में पदस्थ रहीं। मई 2025 में उन्हें कटनी का नया CSP बनाया गया।

नेहा अपने ग्लैमर लुक के लिए भी चर्चा में रहती हैं।
सवाल 2: वसूली की शिकायत से जमीन के सौदे तक, नेहा के खिलाफ आरोपों की कड़ी कैसे जुड़ी?
जवाब- नेहा के खिलाफ मामला एक ही आरोप से नहीं बना। पहले वसूली की शिकायत हुई, फिर पुलिस कार्रवाई हुई और उसके बाद हत्या केस में लापरवाही से जुड़ा विवाद जमीन के सौदे तक पहुंच गया।
पहली कड़ी, 21 जुलाई की वसूली की शिकायत: कटनी के ट्रांसपोर्ट कारोबारी महेंद्र जैन ने 22 जुलाई को SP अभिनय विश्वकर्मा से लिखित शिकायत की। आरोप है कि 21 जुलाई की रात चेकिंग के नाम पर उनकी हाईवा गाड़ी रोककर CSP ने 30 हजार रुपए मांगे, मौके पर 25 हजार रुपए नकद लिए गए और बाकी 5 हजार अगले दिन ड्राइवर के जरिए देने की बात तय हुई।
दूसरी कड़ी, तुरंत कार्रवाई: SP ने प्रारंभिक जांच के बाद CSP के चालक/आरक्षक केशव सिंह को तत्काल निलंबित किया और CSP के अधिकार क्षेत्र से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थाना हटाकर DSP शिवा पाठक को सौंप दिया।
तीसरी कड़ी, हत्या केस में लापरवाही का आरोप: इसी बीच एक हत्या के मामले में तय 90 दिन की समय-सीमा में चालान पेश न होने से आरोपी रमेश लोधी को डिफॉल्ट बेल मिल गई, जिसे CSP की घोर लापरवाही माना जा रहा है। इसी आरोपी ने बाद में अदालत में परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि केस में कथित राहत के बदले उसकी जमीन सस्ते में बिकवाई गई।
चौथी कड़ी, जमीन का मामला: यही जमीन विवाद बाद में विजिलेंस शिकायत और फिर FIR तक पहुंचा। कटनी SP प्रशासन के मुताबिक वसूली और हत्या केस से जुड़ी दोनों जांच जबलपुर की एडिशनल SP अनु बेनीवाल को सौंपी गई थीं।
सवाल 3: खरीदार कोई और, पैसे किसी और के; फिर पच्चीसिया का नाम क्यों आया?
जवाब- यह पूरा मामला हत्या के नामजद आरोपी रमेश लोधी की कंहवारा स्थित जमीन से जुड़ा है।
- FIR में दर्ज जांच रिपोर्ट के मुताबिक इस जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत 82 लाख 86 हजार रुपए से ज्यादा थी, लेकिन 15 अप्रैल 2026 को इसकी रजिस्ट्री सिर्फ 18.20 लाख रुपए में मारूफ अहमद हनफी के नाम कराई गई, जिसमें 15 लाख चेक से और 3.20 लाख नकद दिखाए गए।
- लेकिन परिवार की कहानी इससे अलग है। FIR के साथ लगाए गए शिकायत-पत्र में रमेश लोधी के बेटे आकाश ने दावा किया है कि जमीन का सौदा 1.07 करोड़ रुपए में तय हुआ था। परिवार को अब तक सिर्फ 15 लाख रुपए मिले हैं, जबकि बाकी 92 लाख रुपए नहीं मिले।
- यहां एक बात साफ समझना जरूरी है- 1.07 करोड़ रुपए का सौदा होने और 92 लाख रुपए नहीं मिलने की बात परिवार का आरोप है। पुलिस की जांच रिपोर्ट में फिलहाल जो बात सामने आई है, वह जमीन की 82.86 लाख रुपए की गाइडलाइन कीमत और 18.20 लाख रुपए में हुई रजिस्ट्री का अंतर है।
पुलिस को शक क्यों हुआ: जांच रिपोर्ट के मुताबिक खरीदार बताए गए मारूफ अहमद हनफी के बैंक खाते में रजिस्ट्री की तारीख पर पर्याप्त रकम थी ही नहीं। 11 जुलाई 2025 को उसके खाते में सिर्फ 3,036 रुपए का बैलेंस था। रजिस्ट्री वाले दिन ही उसके खाते में दो अलग-अलग जगहों से पैसा आया, 10 लाख रुपए ‘शाइन पार्टनर्स’ नाम की फर्म के खाते से, और 5 लाख रुपए क्षितिज राज बारापात्रे के निजी खाते से।
पुलिस को क्या मिला: बैंक से जानकारी लेने पर सामने आया कि ‘शाइन पार्टनर्स’ के खाते का असली मालिक भी क्षितिज राज बारापात्रे ही हैं, और दोनों खातों में एक ही PAN नंबर (ARKPB1251D) दर्ज है। यानी जमीन के लिए पूरी रकम एक ही व्यक्ति, क्षितिज राज बारापात्रे, ने दो खातों से भेजी, जबकि कागजों में खरीदार मारूफ अहमद हनफी को दिखाया गया। जांच रिपोर्ट में मारूफ को इस सौदे में फ्रंटमैन (कठपुतली खरीदार) बताया गया है।
- जांच रिपोर्ट के मुताबिक क्षितिज राज बारापात्रे को CSP नेहा पच्चीसिया का करीबी बताया गया है, और रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रमेश लोधी हत्या के मामले में जांच के दायरे में थे, ऐसे में बिना उन्हें गिरफ्तार किए उनकी जमीन गाइडलाइन दर से काफी कम, करीब 21-22% कीमत पर बिकवाई गई।
- इन्हीं कड़ियों के आधार पर पुलिस ने CSP, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के बीच सांठगांठ और धोखाधड़ी की आशंका जताई है। ध्यान रहे, उपलब्ध रिकॉर्ड में यह नहीं कहा गया कि पैसा CSP ने खुद दिया या लिया, आरोप उनके करीबी के जरिए फंडिंग का है।

कोरोना काल में बेहतर काम करने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नेहा को सम्मानित किया था।
सवाल 4: CM को सस्पेंड करने का आदेश क्यों देना पड़ा?
जवाब- यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री मोहन यादव किसी अधिकारी पर सीधे, बिना देरी किए एक्शन ले रहे हों।
- पिछले कुछ हफ्तों में ही उन्होंने ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ के तहत अलग-अलग जिलों में मंच से ही कई अधिकारियों को सस्पेंड किया है- छिंदवाड़ा में CMHO, तहसीलदार और पटवारी को, तो बड़वानी में एक डिप्टी कलेक्टर समेत 7 अधिकारी-कर्मचारियों को।
- नेहा पच्चीसिया का सस्पेंशन इसी सिलसिले की एक और, पर अब तक की सबसे बड़ी कड़ी है, क्योंकि यह किसी निचले स्तर के कर्मचारी का नहीं, एक CSP रैंक की अफसर का मामला है।
- फर्क सिर्फ इतना है कि बाकी मामलों में सीएम ने सीधे जनता की शिकायत सुनकर मंच से ही फैसला लिया था, जबकि नेहा पच्चीसिया का मामला कानूनी प्रक्रिया से होकर आया- 19 अगस्त को कुठला थाने में उनके, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 198, 199(b), 308(7) और 318(4) के तहत FIR दर्ज हुई।
- इससे पहले नेहा पच्चीसिया ने FIR के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जो खारिज हो चुकी है- यानी कानूनी राहत की गुंजाइश खत्म होने के बाद ही सस्पेंशन आया।
- CMO के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में लापरवाही, दबाव या पद के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय जांच के साथ SIT (विशेष जांच दल) जांच की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
- इसी के साथ पुलिस मुख्यालय (PHQ) के निर्देश पर CSP कार्यालय भी सीज कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक इसका मकसद जमीन सौदे से जुड़ी केस डायरी, कार्यालयीन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना है, ताकि जांच प्रभावित न हो।

सीएम ऑफिस की तरफ से 21 अगस्त को दोपहर 12:51 बजे ट्वीट किया गया।
सवाल 5: अब सस्पेंडेड सीएसपी का आगे क्या होगा?
जवाब- अब तीन स्तर पर जांच एक साथ चलेगी।
1. दर्ज FIR के आधार पर आपराधिक जांच, जिसमें जमीन के दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन, केस डायरी और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल होगी। 2. विभागीय जांच, जो सरकारी सेवा नियमों के तहत उनके आचरण की समीक्षा करेगी। 3. गठित की जा रही SIT जांच, जो जमीन सौदे और वसूली, दोनों मामलों को जोड़कर देखेगी।
सामान्य प्रक्रिया के तहत FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश करती है, जिसके आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करती है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो आपराधिक मुकदमे के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल नेहा पच्चीसिया सस्पेंड हैं, यानी वे सेवा में तो हैं लेकिन उन्हें कोई पदभार नहीं दिया गया है, अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

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