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NDA परीक्षा में 5 मिनट देरी से 4 छात्र वंचित:चंडीगढ़ में 20 सेंटरों में एग्जाम; बोले-दोबारा अप्रैल में मौका; 6 महीने का नुकसान




चंडीगढ़ में रविवार को NDA परीक्षा देने पहुंचे 4 छात्रों को महज 5 मिनट की देरी भारी पड़ गई। परीक्षा केंद्र के गेट बंद होने के बाद छात्रों ने अंदर जाने की काफी कोशिश की, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। छात्रों ने नोडल ऑफिसर से भी बात की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। छात्रों का कहना है कि अब उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए अप्रैल तक इंतजार करना पड़ेगा, जिससे उनका करीब 6 महीने का नुकसान हो गया। मामला सेक्टर-47 स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल का है। छात्रों के मुताबिक, परीक्षा सुबह 10 बजे शुरू होनी थी, जबकि परीक्षा केंद्र में प्रवेश का अंतिम समय सुबह 9:30 बजे निर्धारित था। चारों छात्र करीब 9:35 बजे केंद्र पर पहुंचे। उस समय गेट बंद हो चुके थे। उन्होंने परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों से प्रवेश देने की अपील की, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी स्थिति नोडल ऑफिसर के सामने भी रखी, लेकिन नियमों के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका। उनका कहना है कि परीक्षा साल में सीमित अवसरों पर होती है। ऐसे में पांच मिनट की देरी के कारण पूरा प्रयास बेकार हो गया और अब अगला मौका अप्रैल में मिलने की बात कही जा रही है। डबवाली से बच्चों को परीक्षा दिलाने आए परिवार की कार का एक्सीडेंट NDA परीक्षा के लिए हरियाणा के डबवाली से चंडीगढ़ आए एक परिवार को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार अपने बच्चे को सेक्टर-11 स्थित कॉलेज में परीक्षा दिलाने पहुंचा था। बच्चे को परीक्षा केंद्र में प्रवेश कराने के बाद परिवार के सदस्य कार को साइड में लगाने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार की चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) की बस से टक्कर हो गई। कार चालक नरेंद्र ने आरोप लगाया कि गी चौक के पास बस चालक ने अचानक बीच सड़क पर बस रोक दी, जिससे उनकी कार बस से टकरा गई। हादसे में कार को काफी नुकसान पहुंचा है। नरेंद्र का आरोप है कि बस चालक अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। गर्मी में पेड़ों के नीचे बैठे रहे अभिभावक जिन छात्रों को परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश मिल गया, उनके अभिभावक बाहर इंतजार करते नजर आए। तेज गर्मी के बीच कई अभिभावक कॉलेज के बाहर पेड़ों के नीचे बैठे रहे। अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में छात्र पहुंचे थे और उनके साथ उनके माता-पिता या अन्य परिजन भी आए थे। अभिभावकों का आरोप है कि बैठने और पीने के पानी तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई।



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