11 अक्टूबर, दोपहर करीब एक बजे। AISA प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन का ऐलान किया। सुरक्षाकर्मी दौड़ पड़े। सवा दो बजे तक वहां माहौल गरमा चुका था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया।
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तभी भीड़ के बीच एक युवती दिखी। नेहा बोरा जैसा गेट-अप। गले में स्टॉल, आंखों पर गोल काले फ्रेम का चश्मा और चेहरे पर मास्क। पुलिस ने उसे बाजू और कंधे से खींचना शुरू किया। वहां मौजूद मीडिया ने ब्रेकिंग चला दी- नेहा बोरा हिरासत में।
लेकिन जैसे ही कैमरों ने चेहरे पर जूम किया, पता चला ये तो नेहा नहीं है। दरअसल, असली नेहा वहां थी ही नहीं। थोड़ी देर में वीडियो आया कि नेहा बोरा चकमा देकर कनॉट प्लेस पहुंच चुकी है और पुलिस के आगे-आगे दौड़ लगा रही है।
पुलिस को चकमा देती, हिरासत में नारे लगाती, बैरिकेड्स फांदती और राहुल गांधी से कदमताल मिलातीं नेहा बोरा मौजूदा प्रोटेस्ट का जेन-जी चेहरा बन चुकी हैं। आखिर कौन है नेहा बोरा और CJP लीडरशिप से कैसे अलग है उनकी स्ट्रैटेजी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

29 साल की नेहा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। पिता सेना में थे, इसलिए बचपन कई शहरों में बीता। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल में हुई। इसी दौरान उन्होंने चारु मजूमदार, पाब्लो नेरूदा और अरुंधति रॉय जैसे वामपंथी विचारकों को पढ़ना शुरू किया।

लेखक और वामपंथी विचारक अरुंधति रॉय (बीच में) के साथ नेहा बोरा।
नेहा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इस दौरान वे थिएटर करने लगीं। वे संगवारी थिएटर ग्रुप से जुड़ी हैं।
नेहा बताती है, ‘जब एजुकेशन सिस्टम से ऐसा ज्ञान नहीं मिलता, जो मिलना चाहिए तब आप इसे दूसरी जगह ढूंढने लगते हैं। थिएटर में मुझे बहुत क्रिएटिव लोग और कई तरह का ज्ञान मिला।’
इसी दौरान वे छात्र संगठन AISA से भी जुड़ीं। 1990 में बना यह छात्र संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी CPI (ML) से जुड़ा है।
एंटी-CAA प्रोटेस्ट के दौरान नेहा ने आस-पास के कई छात्रों को सड़कों पर उतरते, भाषण देते देखा। नेहा बताती हैं कि जिन विचारों को मैंने सिर्फ किताबों, फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज में पढ़ा-देखा था, छात्र उन्हें जमीनी आंदोलन और राजनीति में बदल रहे थे।
2021 में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में दाखिला लिया। वे स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में PhD कर रही हैं। यहां AISA के साथ राजनीतिक गतिविधियों और प्रोटेस्ट में ज्यादा एक्टिव हुईं।
दिसंबर 2024 में नेहा AISA की प्रेसिडेंट बन गईं। 26 फरवरी 2026 को JNU कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन करने के बाद नेहा को पुलिस ने हिरासत में लिया था। यहां से तिहाड़ जेल भी भेजा। 1 मार्च को रिहाई हुई थी।

तिहाड़ जेल से छूटने के बाद नेहा बोरा और JNU छात्र संघ के पदाधिकारी।
नेहा बोरा अपने लिए she के बजाए they/them (वे / उन्हें) सर्वनाम का इस्तेमाल करती हैं। लैंगिक समानता और LGBTQ अधिकारों के समर्थक अक्सर ऐसा करते हैं।
नेहा के पिता रिटायर हो गए हैं। उन्हें नेहा का लेफ्ट से जुड़ा होना पसंद नहीं, इसलिए 10 साल से बेटी से बात नहीं की। नेहा ने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘जब मेरे पापा को पहली बार पता चला कि मैं लेफ्ट से जुड़ी हूं, तो उन्होंने कहा कि हमारे लोगों को मारा जाता है, यही लोग मारते हैं। तुम इनके साथ कैसे जा सकती हो।’
बीते दिनों पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए नेहा ने 23 दिन की भूख हड़ताल की थी। अनशन के 22वें दिन नेहा की मां लीला बोरा उनसे मिलने जंतर-मंतर आईं थी। नेहा कहती है, ‘पिछले कुछ महीनों में मेरी मां को सरकार के नरेटिव में खामियां दिखी हैं। मैं उनसे बात करने की कोशिश करती हूं। शायद थोड़े समय में उनकी सोच भी बदल जाए।’

नेहा JNU कैंपस में तो खूब एक्टिव थीं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय पहचान जून-जुलाई में NEET पेपर लीक को लेकर हुए प्रोटेस्ट के बाद मिली।
28 जून को सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने CJP के सपोर्ट में भूख हड़ताल शुरू की, तब नेहा और AISA के कुछ और नेता उनके साथ जुड़ गए। हालांकि पूरा फोकस वांगचुक और CJP पर रहा। फिर भी नेहा अपने जुझारू भाषणों और हड़ताल के साथ डटी रहीं। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस वांगचुक को अस्पताल ले गई।

20 जुलाई को शबाना आजमी, योगेंद्र यादव, मनोज झा और प्रकाश राज ने नेहा की भूख हड़ताल खत्म करवाई। इसका वीडियो वायरल हुआ।
इसके बाद नेहा देशभर के तमाम शहरों में गईं, जहां छात्र अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने खुद को स्टूडेंट और जेन-जी लीडर के तौर पर पेश किया।
अगस्त में वे रांची पहुंची, जहां वे JPSC और JSSC-CGL परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में शामिल हुईं। इसी दौरान उन पर एक शख्स ने कथित तौर पर स्याही फेंक दी।

नेहा ने स्याही से लथपथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘RSS-बीजेपी के गुंडों ने मुझ पर स्याही फेंकी। उनके लिए स्याही शर्मिंदा करने का जरिया है। हम स्याही से भविष्य लिखेंगे!’
14 सितंबर को नेहा जेन-जी महाजुटान के लिए गोरखपुर पहुंची, तो उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को गुंडा और दंगाई कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ ने बुद्ध और कबीर से जुड़े गोरखपुर को दंगों की भूमि में बदल दिया। इस बयान को लेकर नेहा पर यूपी में 3 FIR दर्ज हुई।
अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर AISA ने 2 अक्टूबर से दिल्ली में प्रदर्शन शुरू किया। 4 अक्टूबर को अशोका रोड पर हो रहे प्रदर्शन के दौरान नेहा अचानक पुलिस बैरिकैडिंग के ऊपर चढ़ गईं और मुट्ठी उठाकर नारे लगाने लगीं।

बैरिकेड पर चढ़कर नेहा ने नारेबाजी की, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
नेहा ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘मैंने लेफ्ट आइडियोलॉजी वाले सभी स्टूडेंट एक्टिविस्ट को वही करते देखा है, जो मैं कर रही हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि मुझ पर कैमरा लगा हुआ है, इसलिए लोगों को लगता है कि कुछ अलग हो रहा है।’
12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान नेहा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ बस में बैठ कर गईं। दोनों के साथ मार्च किया।

इंडिया गठबंधन ने CEC ज्ञानेश कुमार के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इससे पहले CEC मामले में राहुल गांधी CJI सूर्यकांत से बात करना चाहते थे, लेकिन CJI ने मिलने से मना कर दिया।
कॉलमिस्ट सुधीर जैन लिखते हैं, ‘नेहा बोरा ने निडर छात्र नेता की छवि बना ली है। पुलिस की दबिश का उन्होंने साहस और हुनर से मुकाबला किया। छात्र उनके मुरीद हो रहे हैं। अब उनके पास अपना दायरा और बढ़ाने का अच्छा मौका है।’
पॉलिटिकल कॉलमिस्ट उर्वीश कोठारी मानते हैं कि नेहा में अलग ही तरह का जोश हैं। वे जुझारू नेता हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत साहस, नेतृत्व और करिश्मा के दम पर पार्टी की सीमाओं से ऊपर उठकर सफलता हासिल की है। लेकिन नायक या मसीहा का दर्जा देने के बजाय प्रशंसक उन्हें शेरनी के रूप में ही देखें।

नेहा और दीपके या CJP की प्रोटेस्ट स्ट्रैटजी में इसबार मोटे तौर पर 3 बड़े फर्क नजर आ रहे हैं…
1. दीपके अपना प्लान बता देते हैं, जबकि नेहा सरप्राइज देती हैं
- CJP अपने हर कदम, तारीख और आंदोलन का शेड्यूल और तरीका पहले से ही सोशल मीडिया पर पब्लिक कर देती है। नतीजतन पुलिस पहले से उन्हें घेर लेती है। 10 अक्टूबर को फ्लाइट से डिटेन कर लिया गया।
- नेहा अपनी स्ट्रैटजी का पूरा खुलासा नहीं करती। वे फ्लैश प्रोटेस्ट और सरप्राइज एलिमेंट की स्ट्रैटजी अपनाती हैं। हालात के हिसाब से प्रोटेस्ट की जगह और स्ट्रैटजी बदल देती हैं। 10 अक्टूबर को जब जंतर-मंतर पर पुलिस ने रोका, तो नेहा और AISA ने तुरंत 10 किमी दूर दिल्ली हाट पहुंचने की अपील कर दी।
2. नेहा पुलिस को चकमा देकर बचती हैं, जबकि दीपके ऐसा नहीं करते
- नेहा पुलिस को चकमा देती हैं, भीड़ में छिप जाती हैं और हिरासत में आने से बचती हैं। पुलिस को उन्हें पकड़ने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। जैसे 11 अक्टूबर को आरके आश्रम की कॉल देकर, कनॉट प्लेस पहुंच गईं।
- वहीं दीपके के पास पुलिस को चकमा देने या अचानक रास्ता बदलने का कोई प्लान नहीं होता।

नेहा ने अपनी जगह डिटेन हुई प्रदर्शनकारी के साथ तस्वीर साझा करके बताया कि यह महज संयोग था कोई स्ट्रैटजी नहीं।
3. नेहा ‘एक्शन मोड’ में, CJP को अगली तारीख का इंतजार
- नेहा को पुलिस हिरासत में लेती है। कुछ घंटों बाद छोड़ देती है। वो अगले दिन फिर प्रोटेस्ट करने आ जाती है। आंदोलन रोकने के बजाए लगातार दबाव बनाती हैं। 11 अक्टूबर को नेहा ने पुलिस बस के अंदर से इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया। समर्थकों से कहा कि जिन्हें पुलिस ने रोक दिया है, वे जहां हैं वहीं से प्रदर्शन शुरू करें।
- जबकि, दीपके और उनके साथी हिरासत और रिहाई के बाद प्रदर्शन की अगली तारीख और स्ट्रैटेजी बनाने लगे हैं। समर्थकों से कह रहे हैं कि दिल्ली में बने रहें, अगली कॉल का इंतजार करें। CJP का प्रोटेस्ट कानूनी औपचारिकताओं के इर्द-गिर्द घूमता है। साथ ही बार-बार पूरे देश में प्रदर्शन फैलाने की बात करते हैं।
- 7 अक्टूबर को जब CJP के नेता और नेहा बोरा ने साथ में प्रेस कॉफ्रेंस की तो सोशल मीडिया पर नेहा को दीपके से ज्यादा मैच्योर कहा जाने लगा। दीपके ने भी इसमें हामी भरी। हालांकि नेहा ने कहा कि हममें एकता होनी चाहिए, तुलना नहीं।
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AISA प्रमुख नेहा बोरा ने यूं ही ये खोपड़ी और ‘वन-पीस’ लिखी टी-शर्ट नहीं पहनी है। इंडोनेशिया, नेपाल, फिलीपींस और फ्रांस तक के प्रोटेस्ट में इस खास निशान वाले झंडे का इस्तेमाल किया गया है। 17वीं सदी में इस झंडे का इस्तेमाल समुद्री लुटेरे करते थे। सामने वाले जहाज के लिए इसका मतलब होता था- सरेंडर कर दो, वरना हमला होने वाला है। पूरी खबर पढ़िए…
