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भोज वेटलैंड एवं भोपाल के जल निकायों में अतिक्रमण और अवैध निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण मामले में नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) ने गंभीर टिप्पणी की है। पीठ ने कहा कि जिने के ऊपर सुरक्षा का जिम्मा है, वे ही लापरवाह बने हुए हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर की याचिका पर बुधवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई की गई। एनजीटी पीठ ने अपने आदेश में शासकीय भूमि पर होने वाले अतिक्रमण को अत्यंत गंभीर विषय बताते हुए कहा कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति इसलिए और गंभीर है, क्योंकि इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों एवं प्रशासनिक तंत्र की होती है। अधिकरण ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि अधिकारियों की निष्क्रियता एवं लापरवाही के कारण अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण को बढ़ावा मिल सकता है। आदेश में यह भी कहा गया कि शासकीय भूमि किसी व्यक्ति अथवा अधिकारी की पैतृक संपत्ति नहीं है, जिस पर अवैध बस्तियों या अवैध निर्माण को मनमाने ढंग से अनुमति दी जा सके। अधिकरण ने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि शासकीय भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण के मामलों में केवल अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन अधिकारियों अथवा तंत्र की निष्क्रियता या लापरवाही से अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण संभव होता है, उनकी जवाबदेही निर्धारित किया जाना भी आवश्यक है। यह अतिक्रमण से संबंधित प्रकरण
एनजीटी ने वर्तमान प्रकरण को सीधे तौर पर भोज वेटलैंड अथवा जल निकायों पर अतिक्रमण से संबंधित माना है। आदेश में भोज वेटलैंड एवं जल निकायों के सीमांकन के लिए फुल टैंक लेवल/फुल रिजर्वायर लेवल के आधार पर सीमांकन किए जाने के पूर्व निर्देशों का उल्लेख किया गया है। जल निकायों की वास्तविक सीमा का स्पष्ट निर्धारण होने के बाद उसके भीतर अथवा आसपास होने वाले अतिक्रमण, अवैध निर्माण एवं अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों की पहचान एवं कार्रवाई को प्रभावी बनाया जा सकता है। अधिकरण ने शासकीय भूमि, जल निकायों एवं वेटलैंड क्षेत्रों में अतिक्रमण की स्थिति को गंभीर बताते हुए जिला-वार स्वतंत्र सत्यापन एवं मैपिंग की आवश्यकता पर जोर दिया है। आदेश में सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है। अधिकरण ने सार्वजनिक भूमि के अवैध अतिक्रमण के नियमितीकरण को नीति-निर्माताओं एवं राज्य के लिए गंभीर विषय बताया है। पीसीबी ने एक्शन टेकन रिपोर्ट दी
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कार्रवाई प्रतिवेदन यानी, एक्शन टेकन रिपोर्ट को अंतरिम रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया गया। बोर्ड की ओर से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया। अधिकरण ने निर्देश दिया कि विस्तृत रिपोर्ट आगामी सुनवाई की तारीख से पूर्व तैयार कर अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाए। अधिकरण ने दोनों मामलों को आगे की सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। आगामी सुनवाई में संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाना है, जिसके आधार पर अधिकरण आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा। आवेदक नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पैरवी की।
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NGT ने कहा-जिन पर सुरक्षा का जिम्मा, वे ही लापरवाह:भोपाल के भोज वेटलैंड क्षेत्र में अतिक्रमण पर टिप्पणी; 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई
