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1 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा
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किताब- ऑर्बिटल
(अंग्रेजी किताब ‘ऑर्बिटल’ का हिंदी अनुवाद)
लेखिका- समैंथा हार्वी
अनुवाद- डॉ. रोहिणी
प्रकाशक- पेंगुइन
मूल्य- 299 रुपए
क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष से पृथ्वी कैसी दिखती होगी? वहां से देशों की सीमाएं नहीं दिखतीं, न राजनीति, न युद्ध और न ही इंसानों के बंटवारे। सिर्फ एक नीला ग्रह दिखाई देता है, जिस पर पूरी मानवता रहती है। मशहूर लेखिका समैंथा हार्वी की किताब ‘ऑर्बिटल’ इसी नजरिए से दुनिया को दिखाने की कोशिश करती है।
साल 2024 में इस किताब को ‘बुकर पुरस्कार’ मिल चुका है। यह किताब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में मौजूद छह अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन के एक दिन की कहानी है। इन 24 घंटों में वे पृथ्वी के 16 चक्कर लगाते हैं।
किताब में क्या है?
‘ऑर्बिटल’ की कहानी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में मौजूद छह अंतरिक्ष यात्रियों के इर्द-गिर्द घूमती है। इनमें रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली और जापान के यात्री शामिल हैं। वे वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं, मशीनों की निगरानी करते हैं और हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करते हैं। पूरे दिन में वे पृथ्वी के 16 चक्कर लगाते हैं।
बाहरी घटनाएं बहुत कम हैं, लेकिन भीतर लगातार बहुत कुछ घटता रहता है। कोई अपनी मां को याद करता है, कोई अपने परिवार के बारे में सोचता है, तो कोई पृथ्वी पर बन रहे तूफान को अंतरिक्ष से देख रहा होता है।
किताब की सबसे खास बात यह है कि यहां अंतरिक्ष रोमांच का माध्यम नहीं बनता। लेखिका उसे एक ऐसी जगह की तरह इस्तेमाल करती हैं, जहां से पूरी मानव सभ्यता को नए नजरिए से देखा जा सकता है।

किताब की सबसे असरदार बात
‘ऑर्बिटल’ की सबसे बड़ी ताकत इसका नजरिया है। ज्यादातर अंतरिक्ष के बारे में लिखी गई किताबें तकनीक, मिशन या रोमांच पर केंद्रित होती हैं। लेकिन समैंथा हार्वी इसके उलट अंतरिक्ष को एक दार्शनिक नजरिए से देखती हैं। उनके लिए अंतरिक्ष पृथ्वी को समझने का माध्यम है।
जब छह अंतरिक्ष यात्री खिड़की से नीचे देखते हैं तो उन्हें देशों की सीमाएं नहीं दिखतीं। वे समुद्र, पहाड़, जंगल, बादल और मौसम के बदलते रंग देखते हैं। किताब यह सवाल उठाती है कि जिन सीमाओं और संघर्षों में इंसान उलझा रहता है, क्या वे सचमुच उतने बड़े हैं, जितना हम मानते हैं?
समैंथा किताब में पर्यावरण का मुद्दा भी उठाती हैं। अंतरिक्ष से दिखाई देती पृथ्वी खूबसूरत भी है और बेहद नाजुक भी।

किताब के याद रह जाने वाले प्रसंग
किताब में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो मन में बैठ जाते हैं, जैसेकि-
- किताब का सबसे यादगार दृश्य वह है, जब छह अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की खिड़कियों के पास खड़े होकर पृथ्वी को देखते हैं। हर 90 मिनट में उनके सामने एक नया दृश्य होता है। कहीं सूरज उग रहा है, कहीं रात हो रही है और कहीं ऑरोरा की रंगीन रोशनी पृथ्वी को ढक रही है। अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली यह पृथ्वी इतनी शांत और सुंदर लगती है कि देशों की सीमाएं भी गायब हो जाती हैं।
- किताब में फिलीपींस की ओर बढ़ते एक भीषण टाइफून का जिक्र भी बार-बार आता है। अंतरिक्ष यात्री उसे ऊपर से बनते और आगे बढ़ते हुए देखते हैं। वे जानते हैं कि नीचे लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित होगी, लेकिन वे सिर्फ गवाह बन सकते हैं। यह दृश्य इंसान की सीमाओं और प्रकृति की ताकत का एहसास कराता है।
- एक और दिलचस्प पहलू अंतरिक्ष स्टेशन की रोजमर्रा की जिंदगी है। गुरुत्वाकर्षण न होने की वजह से खाना, सोना, पानी पीना और शरीर को संतुलित रखना भी अलग अनुभव बन जाता है। इन छोटी-छोटी डिटेल्स के जरिए समैंथा हार्वी दिखाती हैं कि अंतरिक्ष में साधारण काम भी असाधारण हो जाते हैं।
भाषा और लिखने का ढंग
समैंथा हार्वी अंतरिक्ष के कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाती हैं। किताब में वैज्ञानिक जानकारी है, लेकिन कहीं भी वह विज्ञान की पाठ्यपुस्तक जैसी नहीं लगती। अंतरिक्ष, पृथ्वी और प्रकृति का वर्णन कई जगह कविता जैसा महसूस होता है।
किताब का हिंदी अनुवाद डॉ. रोहिणी ने किया है। अनुवाद मूल रचना की संवेदनशीलता और लय को बनाए रखता है। पढ़ते समय कहीं यह अहसास नहीं होता कि यह किसी दूसरी भाषा से ट्रांसलेटेड है।
किताब की खूबियां
- अंतरिक्ष के बहाने पृथ्वी और मानव जीवन को नए नजरिए से देखने का मौका देती है।
- कम घटनाओं के बावजूद पाठक की रुचि बनाए रखती है।
- प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं को सहज ढंग से जोड़ती है।
- भाषा सरल, प्रभावशाली और कई जगह बेहद काव्यात्मक है।
- वैज्ञानिक तथ्यों और साहित्यिक संवेदना के बीच अच्छा संतुलन बनाती है।
- लंबे समय तक सोचने पर मजबूर करती है।
किताब की कमजोरियां
- यह किताब पारंपरिक किताबों जैसी नहीं है। इसमें न तेज रफ्तार कहानी है और न ही बड़े नाटकीय मोड़ हैं।
- जो पाठक लगातार घटनाएं और रोमांच चाहते हैं, उन्हें इसकी धीमी गति थोड़ी चुनौतीपूर्ण लग सकती है।
- कुछ जगह दार्शनिक विचार और आत्मचिंतन ज्यादा हो जाता है। इसलिए यह किताब एक बैठक में पढ़ने की बजाय धीरे-धीरे पढ़ने पर ज्यादा प्रभाव छोड़ती है।
यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए?
‘ऑर्बिटल’ उन किताबों में से है, जो पढ़ने के बाद सोचने का एक नया नजरिया देती हैं। यह याद दिलाती है कि अंतरिक्ष में जाने की सबसे बड़ी वजह सिर्फ दूसरे ग्रहों तक पहुंचना नहीं, बल्कि अपनी पृथ्वी को बेहतर ढंग से समझना भी है।
अगर आपको ऐसी किताबें पसंद हैं, जो जीवन से जुड़े बड़े सवाल उठाती हैं, तो यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए। ग्राफिक में देखिए यह किताब किन्हें पढ़नी चाहिए-

किताब के बारे में मेरी राय
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, युद्ध, पर्यावरण संकट और तकनीक के तेजी से बदलते दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में ‘ऑर्बिटल’ अपनी पृथ्वी को नए नजरिए से देखना सिखाती है।
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