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Child Lisping; Speech Therapy Psychology


1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- मैं हरियाणा से हूं। मेरा बेटा 8 साल का है। बचपन में वह तुतलाकर बोलता था। तब हमें उसकी तोतली आवाज प्यारी लगती थी। हमें लगा कि उम्र बढ़ने के साथ यह आदत अपने आप ठीक हो जाएगी। इसलिए हमने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब वह स्कूल जाने लगा है और आज भी कई शब्द साफ नहीं बोल पाता। टीचर से भी तुतलाकर बात करता है। स्कूल में बच्चे उसका मजाक उड़ाते हैं। हमें अब फिक्र हो रही है? उसकी भाषा सुधारने के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपकी चिंता स्वाभाविक है। हर माता-पिता को शुरुआत में बच्चे की तोतली आवाज प्यारी लगती है। वे सोचते हैं कि जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होगा, वैसे-वैसे उसकी भाषा अपने आप ठीक हो जाएगी। हालांकि हर बच्चे की भाषा का विकास अलग होता है। इसलिए यह बदलाव अपने आप आए, जरूरी नहीं है।

8 साल की उम्र तक ज्यादातर बच्चे शब्दों का स्पष्ट उच्चारण करने लगते हैं। अगर अब तक बच्चा साफ नहीं बोल पा रहा है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बच्चे के तुतलाने के पीछे कई बार स्पीच डेवलपमेंट इश्यू, जीभ और मुंह की मसल्स का खराब कोऑर्डिनेशन और अभ्यास की कमी जैसी वजहें हो सकती हैं। इसलिए सबसे पहले कारण का पता लगाना जरूरी है।

छोटे बच्चों का तुतलाना कब सामान्य?

छोटे बच्चों का तुतलाकर बोलना सामान्य भाषा विकास का हिस्सा है। जब बच्चा बोलना सीख रहा होता है, तब उसकी जीभ, होंठ, जबड़े और मुंह की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं। साथ ही वह हर ध्वनि का सही उच्चारण करना भी सीख रहा होता है। इसलिए 2-4 साल की उम्र तक कुछ शब्दों का गलत उच्चारण करना या कुछ ध्वनियों को बदलकर बोलना सामान्य है।

बच्चे के तुतलाने की असल वजह

बच्चे के तुतलाने की असल वजह समझने के लिए कुछ पहलुओं पर गौर करना जरूरी है। सभी बातें नीचे पॉइंटर्स में देखें-

  • देखें कि बच्चा किन अक्षरों या शब्दों का गलत उच्चारण करता है।
  • यह जानें कि समस्या कब से है और समय के साथ कम हो रही है या बढ़ रही है।
  • ध्यान दें कि बच्चे को सिर्फ बोलने में दिक्कत है या भाषा समझने में भी परेशानी होती है।
  • यह भी देखें कि बच्चे को सुनने में कोई समस्या तो नहीं है, क्योंकि अगर बच्चा ठीक से सुन नहीं पा रहा तो इस कारण भी उसका उच्चारण प्रभावित हो सकता है।
  • परिवार में किसी और को बचपन में ऐसी समस्या रही हो तो यह भी एक संकेत हो सकता है।
  • अगर बच्चा स्कूल, दोस्तों या परिवार के सामने बोलने से बचने लगे तो यह समस्या के गंभीर होने का संकेत है।
  • जरूरत पड़ने पर स्पीच-लैंग्वेज थेरेपिस्ट से मूल्यांकन कराएं ताकि सही कारण पता चले और उसके अनुसार इलाज और अभ्यास शुरू किया जा सके।

ग्राफिक में तुतलाने के सभी संभावित कारण देखिए-

तुतलाने वाले बच्चे की भाषा कैसे सुधारें?

बच्चों की भाषा धीरे-धीरे विकसित होती है। ऐसे में माता-पिता बच्चे पर हमेशा सही बोलने का दबाव बनाने की बजाय धैर्य रखें। भाषा सुधार के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

  • बच्चे से नियमित बातचीत करें और उसे अपनी बात कहने का मौका दें।
  • बच्चे की बात ध्यान से सुनें, उसकी बात पूरी होने दें।
  • साफ और सरल भाषा में बोलें, ताकि बच्चा सही शब्द और उच्चारण सीख सके।
  • गलत बोलने पर डांटें या बार-बार टोकें नहीं, बल्कि सही शब्द दोहराकर सिखाएं।
  • कहानियां सुनाएं और चित्रों वाली किताबें पढ़ाएं। इससे शब्दावली बढ़ती है।
  • गाने, कविताएं और राइम्स सुनाएं। इससे भाषा और उच्चारण बेहतर होता है।
  • स्क्रीन टाइम सीमित रखें, क्योंकि ज्यादा स्क्रीन देखने से बातचीत के अवसर कम होते हैं।
  • रोजमर्रा की बातचीत में नए शब्द शामिल करें और उनका अर्थ भी समझाएं।
  • खेल-खेल में भाषा सिखाएं, जैसे चित्र पहचानना, रंगों और चीजों के नाम बताना।
  • दूसरे बच्चों के साथ खेलने का मौका दें। कम्युनिकेशन से आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • हर बच्चे की ग्रोथ अलग होती है। इसलिए दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
  • अगर उम्र के अनुसार भाषा में स्पष्टता न हो तो पीडियाट्रिशियन या स्पीच-लैंग्वेज थेरेपिस्ट से सलाह लें।

बच्चे की भाषा सुधारने के आसान तरीके ग्राफिक में देखिए-

भाषा विकास में अभ्यास की भूमिका महत्वपूर्ण

अगर बच्चा हल्का तुतलाता है तो रेगुलर प्रैक्टिस से उसकी बोलने की क्षमता में सुधार आ सकता है। इसके लिए रोज कुछ देर भाषा और उच्चारण से जुड़ी एक्टिविटीज कराएं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

ध्यान रखें, अभ्यास हमेशा खेल-खेल में और बिना किसी दबाव के कराएं। इससे बच्चे सहज होकर नए शब्द और उसका सही उच्चारण सीखते हैं।

ग्राफिक में भाषा को बेहतर बनाने वाले अभ्यास देखिए-

टीचर से बात करना जरूरी

बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा स्कूल में बिताते हैं, इसलिए टीचर की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। टीचर को स्थिति के बारे में बताएं। अगर दूसरे बच्चे उसका मजाक उड़ाते हैं, तो स्कूल में संवेदनशील माहौल बनाने की जरूरत है।

टीचर को बताएं कि बच्चे को जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दें, जल्दबाजी न करें, दबाव न बनाएं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

पेरेंट्स की कॉमन गलतियां

कई बार माता-पिता अनजाने में कुछ ऐसी बातें कर बैठते हैं, जिनसे सुधार की बजाय समस्या बढ़ सकती है। ऐसी सभी कॉमन गलतियां ग्राफिक में देखें-

शर्मिंदा करने से कम होता आत्मविश्वास

कुछ माता-पिता गुस्से में कहते हैं-

  • “सीधे बोलो।”
  • “तुमसे ठीक से बोला भी नहीं जाता।”
  • “इतने बड़े हो गए, फिर भी ऐसे बोलते हो।”

ऐसी बातों से बच्चे का आत्मविश्वास कम होता है। याद रखिए, बच्चे जानबूझकर गलत नहीं बोलते। उन्हें आलोचना नहीं, सहयोग की जरूरत है।

कब एक्सपर्ट की मदद लें?

इन स्थितियों में स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट या पीडियाट्रिशियन से सलाह लें-

  • बच्चा 7-8 साल की उम्र के बाद भी स्पष्ट न बोल पाए।
  • उसकी बात समझने में परेशानी हो।
  • वह बात करने से बचने लगे या बोलने में झिझक महसूस करे।
  • स्कूल में पढ़ाई, दोस्तों से बातचीत या आत्मविश्वास पर असर दिखने लगे।

अंत में यही कहूंगी कि आपने सही समय पर इस बात पर ध्यान दिया है। बच्चे की तोतली भाषा को लेकर खुद को दोष देने की जरूरत नहीं है। लेकिन अब इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद से अधिकांश बच्चों की बोलने की क्षमता में अच्छा सुधार होता है।

याद रखिए, इस समय आपके बेटे को सबसे ज्यादा जरूरत है धैर्य, प्रोत्साहन और आत्मविश्वास की। जब घर और स्कूल, दोनों जगह उसे सहयोग मिलेगा तो वह बिना डर धीरे-धीरे शब्दों का सही उच्चारण सीख जाएगा।

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