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संसद में सोमवार को एक बार फिर हंगामा देखने को मिला। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु ने विपक्ष से कहा- गृहमंत्री सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं, वो आएं तो विपक्ष सदन से भागे नहीं, उन्हें सुनना पड़ेगा।
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रिजिजु के इस तंज के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। वहीं, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 का विरोध करते हुए सरकार पर कई सवाल उठाए।
आइए जानते हैं, संसद में आज क्या-क्या हुआ…
लोकसभा में सुबह से हंगामा
लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। कार्यवाही शुरू होने के करीब एक मिनट बाद ही पीठासीन अधिकारी एनके प्रेमचंद्रन ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
इस दौरान विपक्षी सांसद हाथों में पोस्टर लिए नजर आए और नारेबाजी करते रहे।
दोपहर 12 बजे सदन दोबारा शुरू हुआ तो पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदस्यों से जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा, लेकिन विपक्षी सांसदों की नारेबाजी जारी रही।
यानी सदन शुरू हुआ, लेकिन कामकाज का रास्ता अभी भी साफ नहीं था।
तीन बिल हंगामे के बीच पेश
हंगामे के बीच सरकार ने विधायी कामकाज आगे बढ़ाया।
दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पेश किया।
इसके दो मिनट बाद, 12 बजकर 9 मिनट पर खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया।
इसके बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 पेश किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने भी राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 सदन में पेश किया।
इस दौरान विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।
आखिरकार सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
‘गृहमंत्री का जवाब सुनना पड़ेगा’
दोपहर 2 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई। हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु ने विपक्ष से कहा कि गृहमंत्री सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं।
इसी दौरान उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जब गृहमंत्री सदन में आएं तो विपक्ष भागे नहीं, उन्हें सुनना पड़ेगा।
रिजिजु की इस अपील के बावजूद सदन में नारेबाजी नहीं रुकी।
आखिरकार अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित हो गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार, 11 अगस्त को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में भी नारेबाजी से शुरुआत
अब रुख करते हैं राज्यसभा का।
उच्च सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा।
इसके बाद शून्यकाल शुरू हुआ, लेकिन विपक्षी सांसदों की नारेबाजी भी शुरू हो गई।
हंगामे के चलते सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो प्रश्नकाल शुरू हुआ, लेकिन हंगामा जारी रहा। इसके बाद सभापति ने सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पेश हुआ
दोपहर 2 बजे के बाद भी राज्यसभा में कार्यवाही सामान्य तरीके से नहीं चल पाई। उपसभापति हरिवंश ने सदन को 15 मिनट के लिए और स्थगित कर दिया।
इसके बाद दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026 पेश किया।
इस विधेयक का मकसद बैंक रिकॉर्ड को लेकर करीब 135 साल पुराने कानून की जगह नया कानूनी ढांचा तैयार करना है। इसमें डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड को अदालतों में साक्ष्य के तौर पर स्वीकार करने का प्रावधान किया गया है।
चर्चा के बाद यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो गया।
दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 राज्यसभा में पेश किया।
यह वही विधेयक है, जिसे सरकार पहले लोकसभा से पारित करा चुकी है। इसमें टैक्स व्यवस्था से जुड़े कई बदलावों के अलावा निवेश और कारोबार से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
इसके बाद विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए।
संजय सिंह ने बिल पर क्या कहा?
दोपहर 3 बजकर 48 मिनट पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस विधेयक का विरोध किया।
उन्होंने सरकार से बिल के प्रावधानों और उनके असर को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक को पर्याप्त चर्चा और विपक्ष की बात सुने बिना आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
यानी एक तरफ सरकार विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने में जुटी थी, तो दूसरी तरफ विपक्ष लगातार इस बात पर सवाल उठा रहा था कि जब सदन में हंगामा हो रहा है, तब इतने महत्वपूर्ण बिलों को कितनी चर्चा के बाद पारित किया जा रहा है।
हंगामे के बीच पास होते रहे बिल
सोमवार की तस्वीर दोनों सदनों में लगभग एक जैसी रही।
विपक्ष नारे लगाता रहा, सरकार बिल पेश करती रही और हंगामे के बीच विधायी कामकाज आगे बढ़ता रहा।
लोकसभा में अधिकरण सुधार विधेयक पास हुआ। राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक पास हुआ और इसके बाद कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक पर चर्चा हुई।
