पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रधान पद से हटा सकती है। कांग्रेस से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक दिल्ली में हुई हाईकमान की मीटिंग में इस बारे में चर्चा की गई है। हालांकि प्रधान किसे बनाया जाएगा, इसके बारे में कुछ स्पष्ट नहीं हुआ
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पूर्व CM चरणजीत चन्नी इस पद की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस दौड़ में कांग्रेस विधायक दल नेता प्रताप बाजवा भी बने हुए हैं। माना जा रहा है कि सितंबर में राहुल गांधी के दौरे से पहले ये फेरबदल हो सकता है। वहीं इन चर्चाओं को खारिज करने के बजाय राजा वड़िंग ने कहा- कोई आए, कोई हो या न हो, राजा वड़िंग लड़ता रहेगा।
वड़िंग को हटाने की चर्चा क्यों? कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक दिल्ली में कल राहुल गांधी, प्रिंयका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के बीच हाईलेवल मीटिंग हुई। उसमें चर्चा हुई कि अगर राहुल गांधी ने यात्रा निकालनी है तो उसके लिए ये माहौल ठीक नहीं है। हमें पंजाब को लेकर सख्त फैसले लेने होंगे। इसके बाद कार्रवाई और बदलाव पर चर्चा हुई। जिसके बाद बदलाव करने पर ही सहमति बनी है।

राजा वड़िंग ने कहा- कोई आए, कोई हो या न हो, राजा वड़िंग लड़ता रहेगा। फाइल फोटो
अधिकतर गुट वड़िंग के विरोध में पंजाब कांग्रेस की बात करें तो संगठन में फेरबदल को लेकर ज्यादातर नेता वड़िंग के विरोध में हैं। इनमें चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा खुलकर विरोध कर रहे हैं। नेता विपक्ष प्रताप बाजवा साइलेंट हैं लेकिन वह भी अंदरखाते वड़िंग की अगुआई में चुनाव लड़ने पर सहमत नहीं बताए जा रहे।
राजा वड़िंग को क्यों नहीं हटा रहे राहुल गांधी साल 2022 के चुनाव में कांग्रेस हाईकमान ने नवजोत सिद्धू को भी नजरअंदाज कर चरणजीत चन्नी पर दांव खेला था। चन्नी न तो सरकार रिपीट करवा सके और न ही अपनी 2 सीटों में से एक पर भी चुनाव जीत सके। इसके बाद चन्नी विदेश चले गए। तब राजा वड़िंग ने कांग्रेस को संभाला। उनकी अगुआई में 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 13 में से 7 सीटें जीतीं। खुद वड़िंग भी चुनाव जीते। साढ़े 4 साल मेहनत करने के बाद चुनाव के वक्त वड़िंग को हटाने के लिए राहुल गांधी राजी नहीं हैं।
राजा वड़िंग बनाम चरणजीत सिंह चन्नी…
- नेतृत्व और शक्ति-संतुलन की जंग: केंद्रीय हाईकमान द्वारा राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने और चन्नी को चुनाव प्रचार समिति की कमान सौंपने के बाद विवाद गहराया। चन्नी समर्थक खेमा (जिसमें प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर रंधावा शामिल हैं) 2027 के चुनावों से पहले नया प्रदेश अध्यक्ष चाहता है।
- दलित प्रतिनिधित्व पर बयानबाजी: चन्नी द्वारा संगठन में दलित चेहरों को प्रमुखता देने की मांग पर राजा वड़िंग ने कहा कि जाति-आधारित राजनीति गलत है और ऐसा करने वालों को माफी मांगनी चाहिए। इससे दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई।
- पोस्टर वॉर और नारेबाजी: बरनाला, संगरूर और पटियाला जैसे जिलों में ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान के दौरान चन्नी समर्थकों ने “राजा-बघेल हटाओ, कांग्रेस बचाओ” के नारे और पोस्टर लगाए, जिसे वड़िंग गुट ने अनुशासनहीनता करार दिया।
- हाईकमान और प्रभारी का कड़ा रुख: पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने मध्यस्थता करते हुए साफ किया कि प्रदेश नेतृत्व बार-बार नहीं बदला जाएगा, लेकिन इसके बावजूद दोनों गुटों के बीच खींचतान जारी रही।
- 2027 के चुनावों की रणनीति: चन्नी का गुट पंजाब में दलित वोट बैंक के आधार पर खुद को मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक चेहरे के रूप में पेश कर रहा है, जबकि राजा वड़िंग अपने संगठनात्मक नियंत्रण को बनाए रखना चाहते हैं।
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