पंजाब में 2027 का चुनाव कांग्रेस जट्ट सिख चेहरे की अगुआई में ही लड़ेगी। फिलहाल प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर ही हाईकमान ने भरोसा जताया है। हालांकि CM चेहरे का ऑप्शन खुला रहेगा। चाहे वड़िंग हो या फिर पूर्व CM चरणजीत चन्नी, सांसद सुखजिंदर रंधावा और
.
जो अपने इलाके से ज्यादा सीटें जिताकर ले आएगा, वही पार्टी के CM चेहरे के करीब पहुंच सकता है। इसी वजह से कांग्रेस ने वड़िंग की प्रधानगी बरकरार रखते हुए चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया था। हालांकि बाद में वड़िंग और उनके हक में डटे पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल को लेकर मामला बिगड़ गया।
जट्टसिख चेहरे को लेकर ये भी वजह है कि कांग्रेस ने अब तक पंजाब में जितनी भी बार सरकार बनाई है, हर बार जट्टसिख चेहरे की ही अगुआई में उन्हें कामयाबी मिली है। यही फॉर्मूला कांग्रेस इस बार अपना रही है।

1. चुनाव में अगुआई के लिए जट्ट सिख नेता ही क्यों? जवाब: जट्ट सिख कम्युनिटी पंजाब की राजनीति को डोमिनेंट करती है। आंकड़ों के मुताबिक पार्टी ने 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और 77 सीटें हासिल करके सरकार बनाई। वहीं पार्टी ने 2022 में दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम फेस बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ा और इस चुनाव में पार्टी 18 सीटों पर सिमटकर रह गई।
2017 में पार्टी को जहां 38.50 प्रतिशत वोट मिले वहीं 2022 में 22.98 प्रतिशत वोट मिले। 2024 लोकसभा चुनाव में जट्ट सिख नेता राजा वड़िंग को पार्टी की अगुवाई सौंपी तो फिर से वोट प्रतिशत में उछाल आया और पार्टी ने पंजाब की 13 में से 7 लोकसभा सीटें जीत लीं।

2. जट्टसिख नेता के तौर पर राजा वड़िंग ही प्रधान क्यों? जवाब: कांग्रेस में प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई बड़े जट्ट सिख नेता हैं, लेकिन हाईकमान ने राजा वड़िंग पर ही विश्वास जताया है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है राजा वड़िंग का ट्रैक रिकार्ड। राजा वड़िंग लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में जब मालवा में आम आदमी पार्टी की हवा थी, तब भी राजा वड़िंग ने गिद्दड़बाहा से जीत हासिल की।
इसके बाद पार्टी ने राजा वड़िंग को 2024 में लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ाया, वहां उनके सामने तीन बार के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू थे। राजा वड़िंग बिट्टू को हराने में भी कामयाब रहे। वहीं राजा वड़िंग पंजाब के मालवा क्षेत्र के मुक्तसर जिले से आते हैं, जहां पंजाब की 117 में से सबसे ज्यादा 69 सीटें हैं।
पंजाब में सरकार बनाने का रास्ता मालवा से ही निकलता है। 2017 में जब कांग्रेस की सरकार बनी तो कांग्रेस मालवा से 40 सीटें जीती थी लेकिन 2022 में सिर्फ 2 ही सीटों पर सिमट गई थी।

3. कांग्रेस ने CM चेहरा घोषित क्यों नहीं किया? जवाब: कांग्रेस हाईकमान ने साफ कर दिया कि वो इस बार सीएम फेस घोषित नहीं करेगी। कांग्रेस राहुल गांधी के चेहरे पर पंजाब का चुनाव लड़ेगी। इसका सीधा संकेत पंजाब के कांग्रेस नेताओं के लिए है कि जो भी नेता सीएम पद की रेस में हैं उन्हें अपने-अपने एरिया में बेस्ट परफॉरमेंस दिखानी होगी।
राजा वड़िंग को मालवा में, चरणजीत सिंह चन्नी को दोआबा में और प्रताप सिंह बाजवा व सुखजिंदर रंधावा को माझा में अपनी ताकत दिखानी होगी। पार्टी हाईकमान को लगता है कि तीनों बड़े नेता सीएम बनने के चक्कर में पूरी ताकत लगाएं और अपने क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों को जिताने का प्रयास करेंगे तो पार्टी को इसका फायदा जरूर मिलेगा।
4. कांग्रेस का दलित वोट की जगह जट्ट सिख पर फोकस क्यों? जवाब: पंजाब में दलित वोट बैंक 31% के आसपास है और जट्टसिख वोट बैंक 18 से 20 प्रतिशत है। दलितों का वोट बैंक ज्यादा होने के बावजूद कांग्रेस इस बार उस पर ज्यादा फोकस नहीं कर रही, इसकी वजह ये है कि पंजाब में दलित वोटर्स एकतरफा वोट नहीं डालते। दलित वर्ग का वोट कांग्रेस, आप व अकाली दल में बंटता रहा है। इस बार BJP ने भी दलितों के वोट के लिए पूरा जोर लगा रखा है।
हालांकि कांग्रेस ने 2022 में नवजोत सिद्धू को दरकिनार कर चरणजीत चन्नी को सीएम चेहरा बनाया था। तब कांग्रेस ने पंजाब को पहला दलित CM देने का क्रेडिट लेते हुए चन्नी के चेहरे को सहारा बनाया था। इसके बावजूद 2022 में कांग्रेस सिर्फ 5 रिजर्व सीटों पर जीत सकी। चन्नी खुद भी भदौड़ और चमकौर साहिब, दोनों सीटों से हार गए।
इसके उलट जब कांग्रेस ने 2017 में जट्टसिख चेहरे कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुआई में चुनाव लड़ा था तो तब पार्टी को प्रदेश की 34 SC सीटों में से 21 पर जीत मिली थी। ऐसे में कांग्रेस फिर से 2017 के फॉर्मूले पर ही 2027 का चुनाव भी लड़ने जा रही है।

5. बागी तेवर दिखा रहे चन्नी गुट को कांग्रेस हाईकमान ने क्या संदेश दिया? जवाब: पार्टी हाईकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी खेमे को सीधा संदेश दे दिया है कि पार्टी अब नेतृत्व परिवर्तन नहीं करेगी। सचिन पायलट ही पंजाब के मामलों को देखेंगे। अब जो बगावती सुर में बात करेगा, पार्टी उनके खिलाफ सख्त एक्शन लेगी। हाईकमान के सख्त संदेश के बाद चरणजीत सिंह चन्नी खेमे के सुर भी ढीले पड़ गए हैं। चन्नी खेमे ने पंजाब प्रभारी सचिन पायलट से मुलाकात की और एकजुट होने की बात कह दी। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी अपने सुर बदल दिए और कहा कि उन्होंने कभी भी प्रधान बदलने की बात नहीं कही थी।
क्या कहते हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट



