सीएम भगवंत मान ने कहा कि सरकार DA को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएगी। इसके बाद मंगलवार को सरकार ने इस मामले पर याचिका दायर की।
पंजाब सरकार ने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) देने के मामले में हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार ने मंगलवार को स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है। अब मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। हालांकि, पंजाब साझा
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पंजाब सरकार ने दो दिन पहले ही साफ कर दिया था कि वह हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। SLP में सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसमें 15 दिन के भीतर 15 हजार करोड़ रुपए की अदायगी करने को कहा गया था।
सरकार का तर्क है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान 15 दिन में करना मुश्किल ही नहीं, बल्कि संभव नहीं है। फिलहाल सरकार ने याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कब करेगा, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।
इधर, साझा मुलाजिम मंच के प्रधान सुखचैन सिंह खैहरा ने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी तरह की मनमानी न हो, इसलिए उन्होंने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल कर दी थी। उनका कहना है कि उन्हें अंदाजा था कि सरकार कर्मचारियों को DA का भुगतान न करने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाएगी, इसलिए मंच पहले से तैयार था।
खैहरा ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट सरकार की याचिका खारिज कर देगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगा चुका है और आदेश भी जारी कर चुका है।
पंजाब सरकार ने याचिका में दी ये दलीलें, जानिए…
- पंजाब के कर्मचारियों की बेसिक पे ज्यादा: सरकार का कहना है कि पंजाब के कर्मचारियों की बेसिक पे अधिक होने से उनका कुल टेक-होम वेतन कई केंद्रीय कर्मचारियों से ज्यादा है। 42% DA के साथ पंजाब में क्लर्क और कांस्टेबल को ₹54,812 मिलते हैं, जबकि केंद्र में 60% DA के बावजूद ₹36,960 मिलते हैं। यानी पंजाब में वेतन 48% ज्यादा है। DA 60% होने पर पंजाब में यह वेतन ₹61,760 हो जाएगा, जो केंद्र से 67% ज्यादा होगा।
- वेतन-पेंशन पर कमाई का 51% खर्च: सरकार के मुताबिक, पंजाब अपनी कुल राजस्व प्राप्ति का करीब 51% सिर्फ वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जबकि प्रमुख राज्यों का औसत 38% है। वेतन, पेंशन और कर्ज का ब्याज मिलाकर करीब 82% राजस्व खर्च हो जाता है। 2025-26 में वेतन-पेंशन का अनुमानित खर्च ₹58,064 करोड़ है।
- केंद्र जितना DA देना जरूरी नहीं: सरकार का कहना है कि पंजाब सिविल सर्विसेज (रिवाइज्ड पे) रूल्स, 2021 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि राज्य को केंद्र के बराबर DA देना ही होगा। हर राज्य की अपनी वित्तीय क्षमता होती है।
- पंजाब और केंद्र के DA में पहले भी अंतर रहा: नवंबर 2021 में पंजाब का DA 28% और केंद्र का 31% था। अक्टूबर 2022 में यह 34% और 38%, दिसंबर 2023 में 38% और 42% रहा। नवंबर 2024 से पंजाब का DA 42% है, जबकि केंद्र का 60% है।
- IAS अधिकारियों से कर्मचारियों की तुलना सही नहीं: सरकार के मुताबिक IAS अधिकारी अखिल भारतीय सेवा के तहत आते हैं और उनका DA केंद्र सरकार तय करती है। राज्य कर्मचारियों के सेवा नियम अलग हैं। इसलिए दोनों की तुलना अनुच्छेद 14 के आधार पर नहीं की जा सकती।
- 15 दिन में ₹14,191 करोड़ देना मुश्किल: सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट के 15 दिनों में 2016-21 का ₹14,191 करोड़ बकाया देने के आदेश को पूरा करना संभव नहीं है। यह राशि राज्य के करीब 3 महीने के वेतन-पेंशन खर्च के बराबर है।
- बकाये का भुगतान पहले से चरणबद्ध तरीके से जारी: सरकार का कहना है कि उसने DA के बकाये से इनकार नहीं किया है। 13 फरवरी 2025 को कैबिनेट की मंजूरी के बाद 4 वित्तीय वर्षों में चरणबद्ध भुगतान की योजना बनाई गई थी। इसके तहत ₹6,100 करोड़ से अधिक का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
- केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर टेक-होम पे का प्रस्ताव: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह कर्मचारियों के कुल टेक-होम वेतन को केंद्रीय समकक्षों के बराबर करने के लिए DA में जरूरी बढ़ोतरी करने को तैयार है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि सभी कर्मचारियों को एक समान DA देने से उन कर्मचारियों पर अतिरिक्त खर्च होगा, जिन्हें अभी भी केंद्रीय कर्मचारियों से ज्यादा वेतन मिल रहा है।
डीए मामले में अब तक क्या-क्या हुआ, जानिए…
- कई वर्षों से DA की किस्तें पेंडिंग: पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों का कई वर्षों से DA बकाया है। बार-बार ज्ञापन और आश्वासन के बावजूद भुगतान नहीं हुआ, जिसके बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू किए और मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
- सिंगल बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया: कर्मचारियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने सरकार को तय समय में DA का भुगतान करने के निर्देश दिए।
- डबल बेंच ने 15 हजार करोड़ देने का आदेश दिया: सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ LPA दायर की, लेकिन डबल बेंच से भी राहत नहीं मिली। कोर्ट ने 15 दिनों में करीब 15 हजार करोड़ रुपए का बकाया DA देने का आदेश दिया।
- साझा मुलाजिम मंच ने केविएट दाखिल की: डबल बेंच के फैसले के बाद कर्मचारियों में खुशी हुई। वहीं, पंजाब साझा मुलाजिम मंच ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही केविएट दाखिल कर दी, ताकि सरकार को एकतरफा स्टे न मिल सके।
- सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की: 15 दिनों में भुगतान के आदेश के बीच पंजाब सरकार ने वित्तीय असमर्थता का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल की। सरकार का कहना है कि इतने कम समय में 15 हजार करोड़ रुपए जुटाना संभव नहीं है। अब मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजर है।
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