Rahul Gandhi Protest Strategy; Gyanesh Kumar BJP EC Vs Opposition


6 अक्टूबर 2026 की सुबह। राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों के साथ इलेक्शन कमीशन की तरफ मार्च किया। पुलिस ने रोका, तो आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठ गए। 8 घंटे बाद पुलिस ने उठाकर हिरासत में लिया और देर रात छोड़ दिया।

.

7 अक्टूबर 2026 की दोपहर। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस के एक रेस्टोरेंट में विपक्षी सांसदों के साथ लंच किया, फिर जंतर-मंतर पर धरना देने निकल पड़े। पुलिस ने रोका, तो सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने हिरासत में लिया और फिर 2 घंटे बाद छोड़ दिया।

8 अक्टूबर 2026 की दोपहर… फिर कमोबेश वही पैटर्न। हालांकि इसबार पुलिस ने उन्हें राजघाट जाने दिया। राहुल गांधी ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक वो रुकने वाले नहीं।

आखिर विपक्ष का पूरा प्लान क्या है और ज्ञानेश कुमार मामले में आगे क्या होगा; डिकोड करेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में…

राहुल गांधी पिछले 2 साल से चुनावों में धांधली और वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। चुनाव आयोग को पक्षपाती बताते हुए कहा था, ‘पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC। हर बार एक ही पैटर्न। बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर पार्टी तोड़ते हैं, फिर उसका चुनाव निशान छीन लिया जाता है।’

राहुल ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान SIR के विरोध में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भी निकाली, लेकिन भीड़ वोट में नहीं बदली। बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को चुनाव हारने से पैदा हुई खीझ बताया।

फिर आई 23 सितंबर 2026 की तारीख। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में चुनाव आयोग से जुड़े खुलासों के बाद विपक्ष को फिर मौका दिखा। INDIA ब्लॉक की पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरने का फैसला किया और अगले 2-3 महीने तक धरना, प्रदर्शन और रैलियों की तैयारी कर ली है।

2 से 8 अक्टूबरः सेव डेमोक्रेसी मार्च

  • INDIA ब्लॉक की पार्टियां देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ मार्च निकाल रहीं। इसी के तहत 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला गया था, जिसे पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद तीन दिनों से विपक्ष दिल्ली में प्रोटेस्ट करने की कोशिश कर रहा है।
6 अक्टूबर को निकाले गए ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के दौरान राहुल गांधी एक स्लोगन बोर्ड लिए थे, जिस पर लिखा था- 'ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’।

6 अक्टूबर को निकाले गए ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के दौरान राहुल गांधी एक स्लोगन बोर्ड लिए थे, जिस पर लिखा था- ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’।

  • 6 अक्टूबर को पुलिस हिरासत से निकलने के बाद कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा, ‘अगर ज्ञानेश कुमार को लगता है कि आज घर जाने से सब कुछ खत्म हो गया है, यह तो सिर्फ शुरुआत है। अभी कुछ भी खत्म नहीं हुआ है।’
  • 7 अक्टूबर को राहुल गांधी ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता, वो रुकने वाले नहीं हैं।
  • INDIA ब्लॉक के 15 सदस्यीय डेलिगेशन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का वक्त मांगा था। 9 अक्टूबर के लिए 10 सदस्यों के डेलिगेशन को मंजूरी मिल गई है। मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे नेता इस डेलिगेशन में हो सकते हैं।

इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी ने भी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट बुलाया है।

कांग्रेस को लंबे वक्त से कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल का कहना है कि राहुल का लक्ष्य 2029 का लोकसभा चुनाव है। वे हर लोकसभा सीट पर INDIA ब्लॉक को एकजुट दिखाना चाहते हैं और बीजेपी के खिलाफ INDIA ब्लॉक का एक ही उम्मीदवार चाहते हैं। वे लोगों तक यह नैरेटिव पहुंचाना चाहते हैं कि कि बीजेपी की जीत मोदी की वजह से नहीं, आयोग की वजह से है।

चुनाव आयोग का पक्षः 6 अक्टूबर को प्रेस नोट जारी किया कि शाम 4 बजे तक किसी पार्टी ने मिलने का समय नहीं मांगा। बाद में पुलिस से पता चला कि राहुल गांधी के नेतृत्व में एक डेलिगेशन ज्ञापन देना चाहता है। वे संसद भवन एनेक्सी में मिलना चाहते हैं, जबकि प्रोटोकॉल के तहत ऐसी मुलाकात आयोग के ऑफिस में होती है। ज्ञापन लेने के लिए आयोग ने सबसे सीनियर अधिकारी भेजने की पेशकश की, लेकिन सांसदों ने मना कर दिया।

बीजेपी का रुख: राहुल गांधी को री-लॉन्च करने के लिए कांग्रेस और उसके कुछ सहयोगी दल देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी 2 पिटीशन पर सुनवाई चल रही है। इनमें मोटे तौर पर 3 आरोप हैं…

1. फॉर्म-6 में गैर-कानूनी बदलाव: नए मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 भरा जाता है। इसमें बदलाव करके पूछा जा रहा है कि आवेदक या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पुरानी SIR लिस्ट है या नहीं? जबकि फॉर्म-6 ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ से जुड़ा एक कानूनी फॉर्म है और इसमें बदलाव सिर्फ केंद्रीय कानून एंव न्याय मंत्रालय ही कर सकता है।

2. आयोग में एकतरफा फैसले लेना: 23 सितंबर की ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के 2 आयुक्तों- डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने SIR को लेकर पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगा। जबकि आयोग अपने सभी फैसले जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से लेगा। अगर अलग-अलग राय हो, तो फैसला बहुमत से लिया जाएगा। तीनों आयुक्तों की वोटिंग ताकत बराबर होगी। ये बातें ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 18 में दर्ज हैं।

3. मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा: ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 16 ऐसी अभूतपूर्व कानूनी सुरक्षा देती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर कभी भी किसी भी तरह का केस नहीं चलाया जा सकता। जबकि पहले ऐसा कोई कानून नहीं था। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि ऐसी सुरक्षा तो जजों को भी नहीं है।

5 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। जब तक जांच पूरी नहीं होती, ज्ञानेश कुमार को तुरंत सस्पेंड किया जाए या कम से कम उनसे बतौर CEC काम करने का हक छीनकर बाकी दोनों आयुक्तों को दिया जाए। हालांकि कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

अनूप बरनवाल केस की स्थिति बहाल करने की भी मांग की गई। दरअसल, मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता होने चाहिए।

फरवरी 2025 में जब ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति हुई थी, तब भी विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर नियुक्ति पर सवाल उठाए थे।

24 सितंबर को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग पर आरोप लगाए और कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।

24 सितंबर को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग पर आरोप लगाए और कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई चल रही है और फैसला आना बाकी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई कर रहे CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर कानून का उल्लंघन हुआ, तो फैसले रद्द किए जाएंगे।

चुनाव आयोग का पक्ष: 26 सितंबर को प्रेस नोट जारी करके कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। असहमति चर्चा का हिस्सा है और सामान्य है। फॉर्म-6 में कोई गैरकानूनी बदलाव नहीं किया गया है। SIR के दौरान नए आवेदकों से केवल एक डिक्लेरेशन मांगा गया था।

बीजेपी का रुख: कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जनता को गुमराह कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 को अवैध नहीं कहा है। आयोग ने साफ किया है कि फॉर्म में कोई बदलाव नहीं हुआ। SIR में फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह हटाने की प्रक्रिया है। इसके लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना होगा। संविधान के आर्टिकल 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल 2 आधारों पर हटाया जा सकता है…

  1. सिद्ध कदाचार, यानी CEC पर भ्रष्टाचार, चुनाव में धांधली जैसी गड़बड़ियां साबित होने पर।
  2. अक्षमता, यानी CEC के शारीरिक या मानसिक तौर पर नाकाबिल होने के पुख्ता सबूत मिलने पर।

मार्च 2026 में तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में INDIA ब्लॉक ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस संसद को सौंपा था। तब लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने नोटिस पर दस्तखत किए थे, लेकिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन्हें खारिज कर दिया था।

अप्रैल 2026 में राज्यसभा में विपक्ष ने फिर से ऐसा नोटिस दिया। इस बार 73 विपक्षी सांसदों ने दस्तखत किए, लेकिन अभी भी ये पेंडिंग है।

9 मार्च को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में ‘ज्ञानेश कुमार गो बैक’ के नारे के साथ प्रदर्शन किया था।

9 मार्च को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में ‘ज्ञानेश कुमार गो बैक’ के नारे के साथ प्रदर्शन किया था।

अब फिर से चर्चा है कि INDIA ब्लॉक संसद के शीतकालीन सत्र में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस ला सकता है।

अगर इस बार स्पीकर और सभापति ने नोटिस स्वीकार कर लिया, तब भी प्रक्रिया पूरी होने में लंबा वक्त लग सकता है। क्योंकि नोटिस स्वीकार होने के बाद एक कमेटी बनेगी, जिसकी रिपोर्ट पर संसद में चर्चा के बाद में वोटिंग होगी।

खास बात ये है कि प्रस्ताव सिर्फ विशेष बहुमत से पास होगा। यानी सदन में कम से कम आधे सांसद मौजूद हों और मौजूद सांसदों में से दो-तिहाई सांसद प्रस्ताव का समर्थन करें। फिलहाल INDIA के पास ऐसा बहुमत नहीं है। लोकसभा में 184 सांसद हैं, जबकि जरूरी आंकड़ा 362 है। वहीं राज्यसभा में INDIA के 64 सांसद हैं, जबकि 164 सांसदों की जरूरत है।

VoteVibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘अगर ज्ञानेश कुमार दबाव में इस्तीफा देते हैं, तो पूरी SIR प्रक्रिया और उसके बाद हुए सारे चुनाव संदेह के घेरे में आ जाएंगे। अगर वे इस्तीफा नहीं देते, तो कांग्रेस सड़क पर उतरेगी। इसके जरिए राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के मुख्य चैलेंजर के रूप में स्थापित करने की कोशिश भी है।’

———-

ये खबर भी पढ़िए…

राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों झोंकी ताकत, इस्तीफा नहीं हुआ तो क्या करेंगे

‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ स्लोगन के साथ राहुल गांधी ने मंगलवार सुबह इलेक्शन कमीशन की तरफ कूच किया। दावा किया कि उनके साथ लोकसभा-राज्यसभा के करीब 300 विपक्षी सांसद सड़क पर हैं। राहुल को हिरासत में लेने की कोशिश हुई, तो आकाशवाणी भवन में बैठ गए। 8 घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पूरी खबर पढ़िए…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *