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Rahul Gandhi Target Amit Shah; Congress Strategy


धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होते ही कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन खत्म कर दिया, लेकिन विपक्ष ने अपनी रणनीति बदल दी। अब निशाने पर गृहमंत्री अमित शाह हैं। 26 जुलाई को राहुल गांधी ने शाह को चिट्ठी लिखकर दो सवाल पूछे। 27 जुलाई को विपक्षी पार्टियों ने तय क

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आखिर विपक्ष की गृहमंत्री को टारगेट करने की नई स्ट्रैटेजी क्या है, ये कारगर होगी या दांव उल्टा पड़ जाएगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से क्या सवाल पूछे हैं?

जवाब: 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्रैटेजी शिफ्ट का पहला संकेत मिला।

राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान की बजाए अमित शाह को घेरते हुए कहा- ‘याद रहे, प्रदर्शन में किसी छात्र का हाथ टूटा, किसी का पैर, तो किसी की पसली। पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खाकर क्रिटिकल हो गए। इन सबके सीधे जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।’

राहुल गांधी ने अमित शाह को चिट्ठी लिखकर 2 सवाल पूछे-

  1. क्या बतौर गृहमंत्री आपने छात्रों पर पैलेट गन चलाने का ऑर्डर दिया था? अगर नहीं, तो फिर किसने दिया?
  2. सादे कपड़ों में आए लोग, जो छात्रों को पीट रहे थे पुलिसवाले थे या वालंटियर? उन्हें किसने तैनात किया था?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से एक दिन पहले राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें साहिल नाम के एक व्यक्ति पर पैलेट गन से हमला करने का दावा किया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से एक दिन पहले राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें साहिल नाम के एक व्यक्ति पर पैलेट गन से हमला करने का दावा किया।

लंबे वक्त से कांग्रेस कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के मुताबिक, ‘ राहुल गांधी गृहमंत्री अमित शाह से मांग रहे हैं। यानी वे बोल रहे हैं कि गृहमंत्री के निर्देश पर छात्रों पर लाठी और पैलेट गन चलाई गई।

सवाल-2: संसद के लिए विपक्ष ने क्या रणनीति बनाई है?

जवाब: गृहमंत्री अमित शाह को घेरना विपक्ष की एक साझा रणनीति है, सोमवार यानी 27 जुलाई को इसके 6 साफ संकेत मिले…

1. सदन शुरू होते ही हंगामा: सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष छात्रों से मारपीट के मुद्दे पर चर्चा के लिए अड़ गया। लोकसभा स्पीकर ने 4 बार सदन की कार्रवाई स्थगित की। सिवाए एक बिल पेश होने के अलावा लोकसभा में और कोई चर्चा नहीं हुई।

2. दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव: लोकसभा में कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और हिबी ईडन ने स्थगन प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया। राज्यसभा में रेणुका चौधरी ने भी चर्चा के लिए नोटिस दिया।

3. सदन के बाहर प्रदर्शन: सदन के बाहर कांग्रेस सांसदों न मार्च निकाला और नारे लगाए, ‘अमित शाह जवाब दो, जवाब दो।’

विपक्ष के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के पास प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी भी इसमें शामिल थीं।

विपक्ष के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के पास प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी भी इसमें शामिल थीं।

4. सोशल मीडिया पर पोस्ट: विपक्षी नेता सोशल मीडिया पर भी अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने X पर ट्वीट किया ‘अमित शाह जवाब दो – लाठी का हिसाब दो’

5. मीडिया में बयानबाजी: TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस दोनों अमित शाह को रिपोर्ट करते हैं। या तो अमित शाह ने खुद ऑर्डर दिए हैं। या उनके विभाग से किसने ऑर्डर दिए हैं, इसका भी वे जवाब दें।’

6. खड़गे के कमरे में बैठक : यह सब सुबह सदन शुरु होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कमरे में विपक्षी दलों की बैठक के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें संसद की कार्रवाई को बाधित करने और अमित शाह से जवाब मांगने की रणनीति तय हुई है।

दरअसल, देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी होने के नाते रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। 20 जुलाई का संसद मार्च संभालने यही दोनों बल तैनात थे।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवाई कहते हैं, ‘नीट पेपर लीक के मामले में कांग्रेस के लिए अब ज्यादा राजनीतिक लाभ बचा नहीं, लेकिन आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और बल प्रयोग से युवाओं में एक सेंटिमेंट है। कांग्रेस अब युवाओं का आक्रोश अमित शाह की तरफ डायवर्ट करने की कोशिश हो रही है, क्योंकि वे बीजेपी में अघोषित तौर पर नंबर-2 हैं।’

सीनियर जर्नलिस्ट नीरज चौधरी बताती हैं, ‘अभी सरकार पर प्रेशर का एक मोमेंटम बना हुआ है। विपक्ष चाहता है कि इस सेंटिमेंट को और भुनाया जाए और सरकार को घेरा जाए। जवाबदेही तय की जाए।’

सवाल-3: मोदी सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी क्या है?

जवाब: सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी इन तीन कदमों से समझिए…

  • 26 जुलाई की शाम पीएम मोदी ने रील पोस्ट करके बताया कि एग्जामिनेशन रिफॉर्म्स के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई गई है। इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि इसके अध्यक्ष हैं। टीम में IB के डायरेक्टर रहे तपन डेका, ISRO के पूर्व चेयरमैन एस सोमनाथ, IIT मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटि, पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट के तौर पर रिटायर्ड IAS अफसर अमृत लाल मीणा भी हैं।
  • 27 जुलाई को सरकार संसद में पेपर लीक से जुड़ा लोक परीक्षा संशोधन बिल लाई है, जिसे केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेश किया। इसमें पेपर लीक करने वालों को दस साल तक की जेल और अधिकतम दस करोड़ रुपये तक जुर्माना होगा। केंद्र सरकार ऐसे मामलों के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बना सकेगी।
  • जब धर्मेंद्र प्रधान सुबह सदन में पहुंचे तो NDA के सांसदों ने शॉल और मिथिला पॉग पहनाकर उनका स्वागत किया। ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए।
धर्मेंद्र प्रधान के संसद में ऐसे स्वागत को देखते हुए CJP ने X पर लिखा, ‘छात्र सब देख रहा हैं।’

धर्मेंद्र प्रधान के संसद में ऐसे स्वागत को देखते हुए CJP ने X पर लिखा, ‘छात्र सब देख रहा हैं।’

रशीद किदवाई बताते हैं कि सरकार चाहती है कि किसी भी तरह से संसद में चर्चा शुरू हो और इसमें सरकार का फायदा ही है। क्योंकि उसके पास दर्जनों अच्छे वक्ता हैं, जो विपक्ष पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में विपक्ष केवल हल्ला-हंगामा करके वॉकआउट कर सकता है।

सीनियर जर्नलिस्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी मनाते हैं कि सरकार कतई नहीं चाहेगी कि ऐसा ऑप्टिक्स बने कि वो विपक्ष या कांग्रेस के सामने झुक गई। मानसून सत्र के पहले हफ्ते में कुछ खास नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार पूरी कोशिश करेगी कि गतिरोध टूटे और संसद में चर्चा हो।

सरकार दिखाना चाहती है कि प्रदर्शनकारी छात्र पीएम मोदी के फैसलों के बाद खुश हैं। बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा ने कहा, ‘जो छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, वे प्रधानमंत्री को आशीर्वाद देते हुए खुशी-खुशी वहां से चले गए। लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को जिंदा रखने की कोशिश कर रही है। उन्हें संसद में आने वाले विधेयक पर बोलना चाहिए। कांग्रेस बोलने से डरती है, क्योंकि इससे उनका पर्दाफाश हो जाएगा।’

सवाल-4: क्या विपक्ष का शाह को घेरने वाला दांव उल्टा भी पड़ सकता है? जवाबः इस स्ट्रैटेजी के दो पहलू हैं और दोनों तरफ के तर्क मजबूत हैं। ये किस करवट बैठेगी, ये जनता के परसेप्शन से तय होगा…

  • सरकार के पास बहुमत है, इसलिए विपक्ष सदन में परीक्षा संशोधन बिल को रोक नहीं सकता। गतिरोध पैदा करना और मुद्दे को जिंदा रखना ही विपक्ष के पास एकमात्र हथियार बचा है।
  • रशीद किदवाई कहते हैं, ‘वे परीक्षा संशोधन बिल का विरोध तो कर नहीं सकते, इसलिए दूसरे मुद्दे उठा रहे हैं। जब बीजेपी विपक्ष में थी, तो वो भी ऐसा ही करती थी। बीजेपी के पूर्व मंत्री सुषमा स्वराज और अरुण जेटली खुद कहते थे कि सदन में गतिरोध पैदा करना विपक्ष का दायित्व है।’
  • दूसरी तरफ सरकार एक काउंटर-नैरेटिव तैयार कर चुकी है कि छात्र आंदोलन खत्म हो चुका है और मामला सुलझ गया है। विपक्ष सुलझे हुए मसले पर सिर्फ राजनीति कर रहा है, जिससे संसद ठप है और असली मुद्दों (जैसे परीक्षा सुधार बिल) पर बहस नहीं हो पा रही।

यानी विपक्ष की बाजी इस बात पर टिकी है कि जनता के बीच छात्रों पर हुए एक्शन का गुस्सा अभी ठंडा हुआ है या नहीं। अगर सेंटिमेंट अभी भी गर्म है, तो अमित शाह को घेरना कारगर हो सकता है। अगर सरकार का ‘मसला सुलझ गया’ वाला नैरेटिव हावी हो गया, तो विपक्ष की रणनीति खुद उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है।

CJP के संसद मार्च को कंट्रोल करने के लिए 20 जुलाई को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

CJP के संसद मार्च को कंट्रोल करने के लिए 20 जुलाई को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

सवाल-5: इन सबके बीच कॉकरोच जनता पार्टी का रुख क्या है?

जवाब: फिलहाल CJP ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से कोई सवाल नहीं पूछे हैं। विपक्ष की स्ट्रैटेजी पर भी CJP की तरफ से कोई समर्थन या विरोध सामने नहीं आया है।

CJP ने बार-बार अपने प्रदर्शन को गैर-राजनीतिक बताया और कहा कि हम सभी से अपील करते हैं कि वो हमारा साथ दें, भले ही आप बीजेपी से जुड़े हों। राहुल गांधी ने भी इस पूरे वाकये में एक भी बार CJP और अभिजीत दीपके का नाम नहीं लिया।

26 जुलाई को CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बयान जारी किया कि सरकार अपने वादे पूरे करे कि प्रदर्शन की वजह से किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। जिनके खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। 27 जुलाई को सौरव दास ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि देश भर में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज केसों को ट्रैक कर रहे हैं और उन्हें मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

सौरव दास ने 27 जुलाई शाम 5:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।

सौरव दास ने 27 जुलाई शाम 5:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।

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