रीवा के संजय गांधी अस्पताल में शनिवार शाम जूनियर डॉक्टर ने इलाज के दौरान 66 वर्षीय मरीज को मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम के लिए मॉर्च्यूरी भेज दिया। करीब एक घंटे बाद मरीज की पल्स दोबारा चलने लगी। इसके बाद मरीज को मॉर्च्यूरी से वापस लाकर अस्पताल में
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परिजन के मुताबिक, मरीज का नाम गिरिजा प्रसाद गुप्ता है और वे सीधी के रहने वाले हैं। परिजन शुक्रवार रात 11:25 बजे गिरिजा प्रसाद को इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल लेकर आए थे। वह 4B जनरल मेडिसिन वार्ड में भर्ती हुए थे। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव सौंपने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी।
जूनियर डॉक्टर चेकअप और इलाज कर रहे थे
मरीज को मृत घोषित किए जाने के समय अस्पताल में कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उस समय जूनियर डॉक्टर मरीज का चेकअप और इलाज कर रहे थे। डॉक्टर टीके सिंह मरीज की उम्र 80 साल बता रहे हैं। जबकि दस्तावेजों में उनकी उम्र 66 साल लिखी हुई है।
प्रत्यक्षदर्शी योगेंद्र शुक्ला ने बताया-यह घटना उनके सामने हुई। किसी जीवित व्यक्ति को मृत कैसे घोषित किया जा सकता है। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। योगेंद्र शुक्ला ने कहा कि कल्पना मिश्रा मामले की जांच पहले से चल रही है। इसी बीच यह घटना सामने आई है।

SDM बोले- कभी-कभी ऐसी स्थिति हो सकती है
एसडीएम अनुराग तिवारी ने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार उपचार के दौरान गिरिजा प्रसाद की पल्स बंद हो गई थी, लेकिन दोबारा चलने लगी। एसडीएम के मुताबिक डॉक्टरों ने बताया कि कभी-कभी ऐसी स्थिति हो सकती है।
मामले में अस्पताल की व्यवस्था के साथ मरीज को मृत घोषित करने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि गिरिजा प्रसाद की जांच किस डॉक्टर ने की थी, मृत्यु की पुष्टि किस आधार पर की गई और मॉर्च्यूरी भेजने से पहले कौन-कौन सी चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की गई थी।
एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का अस्पताल में प्रदर्शन
घटना से नाराज एनएसयूआई कार्यकर्ता रात में अस्पताल परिसर में बैठ गए हैं। वे अधीक्षक से मिलने की जिद कर रहे हैं। पुलिस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच झूमा झटकी और धक्का-मुक्की हुई है। ………………………………
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रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में पहली डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन अस्पताल के मुख्य गेट पर बैठ गए। परिजन ने कहा- इलाज में डॉक्टर ने लापरवाही बरती, इसलिए जान चली गई। लापरवाह डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। पढ़ें पूरी खबर…
