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Rohtak News | Harpal Rana Demands 1911 Barona Panchayat Memorial


रोहतक में बरौना गांव में स्मारक बनाने की मांग करते हरपाल राणा।

रोहतक में जटराना खाप के सदस्य हरपाल राणा ने सोनीपत के गांव बरौना में स्मारक बनाने की मांग करते हुए कहा कि 1911 में देश की सबसे बड़ी गैर राजनीतिक पंचायत चौधरी भीमसेन के नेतृत्व में हुई थी। जिसमें हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली व उत्तर प्रदेश के करीब

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हरपाल राणा ने कहा कि अंग्रेजी हुकुमत के दौरान इतनी बड़ी पंचायत का होना, बहादुरी का काम है। बरौना में जहां पंचायत हुई, वहां एक स्मारक बनना चाहिए, जिसे पर 1911 की पंचायत का इतिहास भी लिखा होना चाहिए। उस समय जिन खापों, पंचायतों व लोगों ने भाग लिया, उनका विवरण आज भी मौजूद है।

पावरिया खाप से रामकिशन पावरिया।

पावरिया खाप से रामकिशन पावरिया।

पंचायत में 28 प्रस्तावों को मिली थी मंजूरी

हरपाल राणा ने कहा कि 1911 में हुई पंचायत के दौरान 28 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। इसमें 26 खापों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पंचायत में मुख्य मुद्दा शिक्षा को लेकर रखा, जिसके बाद देशभर में 11 स्कूल खोले गए, उनमें सबसे पहला स्कूल रोहतक में जाट हीरोज स्कूल है।

पंचायत का इतिहास युवाओं तक पहुंचाना

हरपाल राणा ने कहा कि स्मारक बनाने का उद्देश्य उस समय की पंचायत के इतिहास को युवाओं तक पहुंचाना है। इस बारे में गांव के प्रधान से तीसरी बार मुलाकात हुई, जिन्होंने आश्वासन दिया कि स्मारक बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।

लोकहित संस्था के अध्यक्ष चंचल नांदल।

लोकहित संस्था के अध्यक्ष चंचल नांदल।

1910 में अंग्रेज लेकर आए कानून

हरपाल राणा ने कहा कि 1911 में पंचायत से पहले 1910 में अंग्रेजी सरकार एक ऐसा कानून लेकर आई, जिसमें इतनी बड़ी पंचायत ना हो सके। बावजूद इसके 1911 में पंचायत हुई, जिसका इंग्लैंड की संसद में भी जिक्र किया गया। क्योंकि उस समय इतनी बड़ी पंचायत होना अपने आप में ऐतिहासिक कदम था।

एक से तीन एकड़ में स्मारक बनाने की मांग

हरपाल राणा ने कहा कि उस समय जहां पंचायत हुई, वहां आज मिट्टी निकालने के कारण जलभराव हो गया है, उस जमीन पर मिट्टी का भरत होना है। यह सरकारी जमीन है और स्मारक करीब एक से तीन एकड़ भूमि पर बनाने की मांग की जा रही है।

गांव बरौना में स्मारक बनना चाहिए

लोकहित संस्था के अध्यक्ष चंचल नांदल ने कहा कि गांव बरौना में स्मारक बनना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को 1911 में हुई पंचायत के बारे में जानकारी मिल सके। अंग्रेजों के राज में इतनी बड़ी पंचायत कैसे हुई, उसके बारे में जानना जरूरी है। हरपाल राणा ने जो बीड़ा उठाया है, लोकहित संस्था उनके साथ खड़ी है। इस मौके पर पावरिया खाप से रामकिशन पावरिया भी मौजूद रहे।



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