सकरीगली-महाराजपुर डाउन लाइन पर 8 दिन बाद मंगलवार को ट्रेनें फिर दौड़ीं। गंगा के तेज कटाव से खतरे में आए साहिबगंज-बड़हरवा रेलखंड को रेलवे ने सुरक्षित किया। 6 अक्टूबर को पहली ट्रेन संख्या 03428 साहिबगंज-हावड़ा पैसेंजर स्पेशल इस लाइन से गुजरी।
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गंगा की धारा बदलने से रेलवे तटबंध पर कटाव का खतरा बढ़ा था। तेज पानी से ट्रैक की सुरक्षा पर सवाल उठा। यात्रियों की सुरक्षा के लिए 29 सितंबर से 6 अक्टूबर तक डाउन लाइन पर ट्रेन संचालन रोका गया।
800 से ज्यादा रेलकर्मियों ने दिनरात काम कर रोका कटाव
ट्रैक बचाने के लिए 800 से ज्यादा रेलकर्मियों ने दिन-रात काम किया। 200 से अधिक वैगनों से बोल्डर डालकर कटाव रोका गया। एक सप्ताह के बचाव और मरम्मत के बाद ट्रैक सुरक्षित घोषित हुआ।
रेलवे के अनुसार, 7 अक्टूबर से इस रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन सामान्य रूट से शुरू होगा। दूसरे रास्ते से चल रही ट्रेनें अब अपने सामान्य मार्ग पर लौटेंगी।
मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में करीब 800 रेलवे कर्मचारियों, ठेका मजदूरों, पर्यवेक्षकों और अधिकारियों ने दिन-रात लगातार काम किया। काम सातों दिन चौबीसों घंटे चलता रहा। रेलवे की टीमों ने न केवल क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित किया, बल्कि भविष्य में दोबारा कटाव का खतरा कम करने के लिए भी कई तकनीकी उपाय किए।
29 सितंबर और 6 अक्टूबर की दो तस्वीरें देखिए


200 से ज्यादा वैगनों से डाले गए बोल्डर
कटाव से जूझ रहे रेलवे तटबंध को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर पत्थरों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 200 से अधिक वैगनों के जरिए बोल्डर पहुंचाकर संवेदनशील हिस्सों में डाले गए। इसके अलावा रेलवे स्लीपर और स्टोन डस्ट का भी इस्तेमाल किया गया।
इन उपायों का उद्देश्य गंगा की तेज धारा के सीधे प्रभाव को कम करना और रेलवे तटबंध को अतिरिक्त मजबूती देना था। संवेदनशील हिस्सों में नदी तट स्थिरीकरण के उपाय भी किए गए।
पोरक्यूपाइन से रोकी गई पानी की रफ्तार
रेलवे ने कटाव रोकने के लिए पारंपरिक उपायों के साथ तकनीकी संरचनाओं का भी इस्तेमाल किया। नदी की धारा की गति कम करने और तलछट के जमाव को बढ़ाने के लिए पोरक्यूपाइन संरचनाएं लगाई गईं। ये त्रिकोणीय पिरामिड जैसी संरचनाएं होती हैं, जो पानी के बहाव की ऊर्जा को कम करने और नदी तट को स्थिर करने में मदद करती हैं।
इसके साथ ही संवेदनशील स्थानों पर गेबियन बॉक्स और बोल्डर क्रेट्स लगाए गए। तार-जाल से बनी इन संरचनाओं में पत्थर भरकर तटबंध को मजबूत किया गया, ताकि मिट्टी के कटाव को रोका जा सके और नदी का दबाव सीधे रेल तटबंध पर न पड़े।

खतरे से बची रेल लाइन, बिना नुकसान के पूरा हुआ अभियान
रेलवे अधिकारियों के अनुसार राहत और पुनर्बहाली अभियान के दौरान बैंक को आगे किसी बड़े नुकसान से बचा लिया गया। लगातार निगरानी के बीच तटबंध और ट्रैक की स्थिति पर नजर रखी गई। आवश्यक तकनीकी जांच के बाद डाउन लाइन को ट्रेनों के परिचालन के लिए सुरक्षित पाया गया।मंगलवार को पहली पैसेंजर स्पेशल ट्रेन के सफलतापूर्वक गुजरने के साथ ही रेलवे ने इस चुनौतीपूर्ण अभियान के पहले चरण को पूरा कर लिया।
अब सामान्य मार्ग पर लौटेंगी ट्रेनें
डाउन लाइन के बहाल होने से साहिबगंज-बड़हरवा रेलखंड पर यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। जिन ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ था, उनमें से कई को नियंत्रित गति, बदले मार्ग या अन्य परिचालन व्यवस्था के तहत चलाया जा रहा था। अब सामान्य रेल सेवाओं की बहाली के साथ यात्रियों को पहले जैसी सुविधा मिलने लगेगी।रेलवे के अनुसार, 6 अक्टूबर को पुनर्बहाल डाउन लाइन से पहली ट्रेन चलाई गई, जबकि 7 अक्टूबर से निर्धारित समय-सारणी के अनुसार सामान्य परिचालन बहाल होगा।

डीआरएम ने टीम की मेहनत को सराहा
मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने पुनर्बहाली अभियान में जुटे अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा या रेलवे अवसंरचना पर खतरे की स्थिति में रेलवे की पहली प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा होती है। इसके साथ ही प्रभावित रेल सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने और यात्रियों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना भी रेलवे की जिम्मेदारी है।
रेलवे प्रशासन ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करने में सहयोग देने के लिए राज्य प्रशासन का भी आभार जताया। साथ ही उन सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिकों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने लगातार दिन-रात काम करके रेल परिचालन को निर्धारित समय में बहाल करने में योगदान दिया।
यात्रियों को बड़ी राहत
सकरीगली-महाराजपुर के बीच डाउन लाइन की बहाली सिर्फ एक रेल ट्रैक के दोबारा चालू होने की खबर नहीं है, बल्कि गंगा के बदलते तेवर के बीच रेलवे की चुनौतीपूर्ण लड़ाई के बाद मिली बड़ी राहत भी है। एक ओर नदी की तेज धारा रेलवे तटबंध को लगातार चुनौती दे रही थी, तो दूसरी ओर रेलवे की टीमें दिन-रात मोर्चे पर डटी थीं। बोल्डर, गेबियन बॉक्स, पोरक्यूपाइन और अन्य तकनीकी उपायों के जरिए तटबंध को सुरक्षित करने के बाद आखिरकार मंगलवार को उसी ट्रैक पर ट्रेन दौड़ी, जिसे कुछ दिन पहले यात्रियों की सुरक्षा के कारण बंद करना पड़ा था।
