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जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल की इमरजेंसी में व्यवस्थाएं सुधारने का नाम नहीं ले रही। इस कारण आज भी एक मानवता को शर्मशार करने वाली घटना देखने को मिली। मेडिकल इमरजेंसी में आए एक मरीज को पहले तो सही से इलाज नहीं दिया और उसे चक्कर कटाने के बाद वापस लौटा दिया। लौटते समय जब मरीज इमरजेंसी के ही गेट पर गश खाकर गिरा और मुंह से खून निकलने लगे तो उसे वापस डॉक्टरों तक पहुंचाने के लिए वहां मौजूद कर्मचारियों-गार्डों ने ट्रॉली तक उपलब्ध नहीं करवाई। मजबूरन वहां मौजूद कुछ लोगों ने टांगा-टोली करके इमरजेंसी स्थित हॉल में डॉक्टर के पास लेकर गए। तीन घंटे तक इधर-उधर घुमाता रहा हॉस्पिटल स्टाफ पीड़िता सांगानेर निवासी पूनम शर्मा ने बताया- वह अपने चाचा को अचानक दौरे पड़ने की शिकायत पर एसएमएस हॉस्पिटल लेकर पहुंचीं। लेकिन यहां इलाज के बजाय डॉक्टर, स्टाफ तीन घंटे तक इधर-उधर घुमाता रहा। इमरजेंसी में भी गए, लेकिन उचित इलाज देने के बजाय वापस घर लौटा दिया और अगले दिन ओपीडी में आने के लिए कह दिया। इमरजेंसी से निकले, रैम्प पर मुंह के बल गिरे पीड़िता ने बताया- हम परेशान होकर इमरजेंसी हॉल से चाचा को लेकर निकले और जैसे ही रैम्प से उतरे तो मरीज को दौरा आया और गश खाकर मुंह के बल गिर गया। इससे मुंह से खून आने लगा। वहां मौजूद अन्य लोगों ने सुरक्षा गार्डों और हेल्परों (ट्रॉलीमैन) से मरीज को लाने के लिए ट्रॉली मांगी तो मौके पर ट्रॉली नहीं मिली। मजबूरन चार लोगों ने टांग, हाथ पकड़कर (टांगा-टोली करके) मरीज को उठाया और इमरजेंसी हॉल फिर से लेकर गए। जिम्मेदार सीट से गायब, कर्मचारियों के भरोसे इमरजेंसी व्यवस्था इमरजेंसी में ट्रॉली, व्हील-चेयर के मैनेजमेंट के लिए अलग से मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज की नियुक्ति कर रखी है। लेकिन मरीजों को यहां सीमित मात्रा में ही ट्रॉली उपलब्ध होती है। अधिकांश मरीजों को तो रैंप पर गाड़ी से उतरने के बाद पैदल या परिजन की गोदी में ही जाना पड़ता है। व्हील चेयर तो यहां उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी व्यवस्थाएं (ट्रोली, व्हील चेयर, ट्रोली मैन) सरकार और एसएमएस हॉस्पिटल प्रशासन की तरफ से की जाती है तो उसके बावजूद मरीजों को इतनी परेशानी क्यों झेलनी पड़ती है?
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SMS इमरजेंसी में मरीज रैम्प पर गश खाकर गिरा:कर्मचारियों-गार्डों ने लाने के लिए ट्रॉली तक नहीं दी; लोग टांगा-टोली करके डॉक्टर तक लेकर पहुंचे
