नई दिल्ली9 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह डिजिटल अरेस्ट को आपराधिक कानून में औपचारिक रूप से परिभाषित करने और इसे कठोर सजा के साथ अलग अपराध घोषित करने पर विचार करे।
डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक बढ़ता हुआ रूप है, जिसमें जालसाज कानून लागू करने वाले अधिकारियों, अदालती कर्मचारियों या सरकारी एजेंसियों के कर्मियों के रूप में पेश होकर ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को डराते हैं। वे पीड़ितों को बंधक बनाकर पैसे देने का दबाव बनाते हैं।
CJI सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी के खिलाफ ठोस सबूतों के आधार पर राय बनने के बाद उसकी संपत्ति को फ्रीज किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कानून में बदलाव की जरूरत
- अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट एक अपराध के रूप में पहले से ही कानून में परिभाषित है। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि एक अंतर-विभागीय समिति (IDC) सिस्टम में कमियों की पहचान करने के लिए डिटेल्ड रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है।
- CJI ने कहा कि कानून में डिजिटल अरेस्ट को औपचारिक रूप से परिभाषित करने की जरूरत है। इसमें जबरन वसूली और डकैती भी शामिल हैं। इसे गंभीर परिणामों वाले एक अलग अपराध के रूप में परिभाषित करना चाहिए। यह प्रावधान भी हो कि जब आरोपी के खिलाफ कुछ सबूत मिल जाएं तो उसकी संपत्ति फ्रीज की जा सके।
- जस्टिस बागची ने डीपफेक के खतरे को बताया और कहा कि ऐसे उभरते ऑनलाइन अपराधों को परिभाषित करने के लिए सरकार को पहल करना चाहिए।
- उन्होंने कहा कि अब हमारे पास डीपफेक है। इसका उपयोग धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। आप मौजूदा कानून के तहत हैं, लेकिन आपको इसे और बेहतर बनाने की जरूरत है। आर्टिकल 142 के तहत हम किसी अपराध को परिभाषित नहीं कर सकते।
सॉलिसिटर जनरल बोले- सरकार कानून बना रही है
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए कानून पर काम कर रही है। एक ड्राफ्ट बिल तैयार किया जा रहा है, जो संभवतः डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक और अन्य ऑनलाइन अपराधों को कवर करेगा। बेंच ने कहा कि वह बुधवार को इस मामले में निर्देश पारित करेगी।
गृह मंत्रालय और CBI की समिति कर रही काम
- गृह मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया था कि उसने कमियों को दूर करने और साइबर अपराध पीड़ितों के लिए वास्तविक समय में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति का गठन किया है।
- CBI ने कोर्ट को बताया कि ये घोटाले अक्सर संगठित और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट करता है। एजेंसी अब अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल को खत्म करने के लिए इंटरपोल चैनलों का उपयोग कर रही है। गृह मंत्रालय ने विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में एक IDC बनाई गई है।
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दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के दौरान 20 जुलाई को छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। साथ ही 18 साल से कम उम्र के उन प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…

