नई दिल्ली50 मिनट पहले
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वित्त मंत्रालय ने यूपीआई लेनदेन पर MDR लगाने में अमेरिकी दबाव के आरोपों को गुरुवार एक बार फिर खारिज कर दिया। साथ ही कहा कि इससे नकद लेनदेन बढ़ने की उम्मीद नहीं है।
दरअसल, 15 अक्टूबर से ₹2,000 रुपए से ज्यादा के पर्सन टु मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा। ₹75000 और उससे ज्यादा के लेनदेन पर चार्ज ₹300 रुपए होगा।
यह शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा, ग्राहकों से नहीं। व्यक्तियों के बीच भुगतान और रोजमर्रा के ज्यादातर व्यापारी भुगतान मुफ्त रहेंगे।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से कुल UPI लेनदेन की केवल 4% मात्रा प्रभावित होगी। इसलिए UPI लेनदेन घटने या कैश ट्रांजेक्शन बढ़ने की संभावना कम है।
न्यूज एजेंसी PTI ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि व्यापारी बढ़ा हुआ चार्ज ग्राहकों से न वसूलें, इसकी निगरानी के लिए सिस्टम बनाया जाएगा।

दावा- MDR किसी बाहरी दबाव में लागू किए जाने के आरोप अफवाह
वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने यह सफाई अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों के जवाब में दी। रिपोर्ट में अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को UPI सिस्टम में समान अवसर नहीं मिलने की बात कही गई थी।
रिपोर्ट में यूपीआई पर क्रेडिट लेनदेन में रुपे के मुकाबले अमेरिकी कंपनियों को समान अवसर नहीं मिलने पर भी चिंता जताई गई थी।
DFS ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “15 सितंबर का NPCI सर्कुलर रुपे क्रेडिट कार्ड के अलावा किसी दूसरे क्रेडिट कार्ड से UPI पर क्रेडिट लेनदेन की परमिशन नहीं देता।”
विभाग ने कहा, “भारत में रुपे क्रेडिट कार्ड को लोगों के बीच पसंदीदा बनाने के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से जोड़ने की स्पष्ट नीति है।”
DFS ने MDR को किसी बाहरी दबाव में लागू किए जाने के आरोप को “पूरी तरह गलत और भ्रामक” बताया।

दावा- महंगाई पर असर पड़ने की संभावना नहीं
वित्त मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम बना रहा है कि यूपीआई MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। इससे शुल्क ग्राहकों से वसूलने की आशंका दूर करने की कोशिश की जा रही है।
मंत्रालय ने पेमेंट एग्रीगेटर्स और यूपीआई से जुड़े अन्य पक्षों के साथ चर्चा शुरू कर दी है। उन्हें MDR के बारे में जानकारी दी जा रही है और ग्राहकों पर इसका बोझ नहीं डालने को कहा जा रहा है।
वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने की आशंका पर सूत्रों ने कहा कि इस कदम का महंगाई पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।
UPI-MDR पर किसने क्या कहा…
- कर्नाटक CM डीके शिवकुमार: यह समाज के हर वर्ग के साथ बड़ा अन्याय है। व्यापारी स्वाभाविक रूप से इस खर्च का बोझ आम आदमी पर डालेंगे। जनता पर ये चार्ज डालने की कोई ज़रूरत नहीं थी। हम पुरज़ोर अपील करते हैं कि इस फैसले को वापस लिया जाए।
- CPI(M) पार्टी महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य: दस साल पहले, नवंबर की एक मनहूस रात को, वे अचानक टेलीविजन पर आए थे और नोटबंदी की विनाशकारी घोषणा की थी। नए झटके का समय आ गया था और अब हमें #UPITax के रूप में वह झटका मिला है।
- केरल पूर्व सीएम पी विजयन: सरकार UPI को बड़ी फिनटेक कंपनियों के लिए कमाई का जरिया बनाने की कोशिश कर रही है। पहले लोगों को डिजिटल पेमेंट और UPI अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया और अब इसी व्यवस्था से शुल्क लेने की कोशिश हो रही है।
अमेरिकी रिपोर्ट में क्या कहा गया…
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की राष्ट्रीय व्यापार अनुमान रिपोर्ट में विदेशी व्यापार से जुड़ी बाधाओं का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सेवाओं से जुड़ी अनौपचारिक और औपचारिक नीतियों पर चिंता जताई।
उसके मुताबिक, ये नीतियां भारतीय घरेलू कंपनियों के पक्ष में दिखती हैं और विदेशी कंपनियों के लिए समान अवसर नहीं बनातीं।
अमेरिका ने यूपीआई व्यवस्था में अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सेवा प्रदाताओं की भागीदारी पर भी चिंता जताई। इसमें रुपे के साथ समान स्तर पर यूपीआई के क्रेडिट लेनदेन में भागीदारी शामिल है।
अमेरिका ने यह भी कहा कि नवंबर 2020 में NPCI ने ऑनलाइन यूपीआई भुगतान शुरू करने वाले थर्ड-पार्टी ऐप प्रदाताओं के लिए 30% बाजार हिस्सेदारी की सीमा तय की थी। यह सीमा लेनदेन की संख्या के आधार पर है।
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वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि UPI नियमों में बदलाव किसी विदेशी दबाव में नहीं लाया गया है। इससे पहले राहुल गांधी ने UPI पर टैक्स लगाने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने X पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि इस फैसले से अमेरिका को फायदा होगा और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…

