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आचार्य पंडित हरिनाम दास वेदांती को महंतों ने दी श्रद्धांजलि:जगदगुरु रामदिनेशाचार्य बोले-चित्रकूट में श्रीहनुमान की गहन साधना कर कृपा प्राप्त की




श्री राम वल्लभा कुंज तृतीय आचार्य पंडित हरिनाम दास वेदांती की पुण्यतिथि समारोह पूर्वक मनाई गई।त्याग और तपस्या और विद्वता के लिए प्रसिद्ध श्रीराम वल्लभाकुंज, जानकी घाट में आयोजित समारोह में करीब 2 हजार संतों-महंतों ने हिस्सा लिया। आश्रम की समृद्ध संत परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले तृतीय आचार्य पंडित हरिनाम दास जी वेदांती की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण की गई। श्रावण कृष्ण द्वादशी के अवसर पर संतों और श्रद्धालुओं ने उन्हें नमन करते हुए उनके आध्यात्मिक योगदान को याद किया। इस अवसर पर जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि आचार्य हरिनाम दास वेदांती महाराज श्री हनुमान के अनन्य साधक थे।उन्होंने चित्रकूट की गुफा में कठोर साधना कर श्रीहनुमान की कृपा प्राप्त की।उन्होंने हनुमत वाटिका अयोध्या में जीवन के अंतिम क्षण कर कठोर साधना की। श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख और राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि उनके जैसा त्याग और सरलता देखने को नहीं मिला।वे बचपन मे अयोध्या आए। महाराज श्री का जैसे ही पहली बार दर्शन हुआ।उनकी करुणा ने संत हृदय का परिचय करा दिया।वही संस्कार है कि आज इस दास को आश्रम और सनातन धर्म की सेवा का अवसर मिला हुआ है। इस अवसर पर मणिराम दास छावनी के महंत कमलनयन दास,रामकथाकुंज के महंत डॉ रामानंद दास,अर्जुन द्वाराचार्य जगदगुरु कृपालु रामभूषण देवाचार्य, महामंडलेश्वर गिरीश दास,तुलसी दास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, रामकचेहरी मंदिर महंत शशिकांत दास,पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास, महामंडलेश्वर रामजी शरण, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय,डॉ अनिल मिश्र, प्रधानाचार्य अवनि कुमार शुक्ला आदि ने आचार्य हरिनाम दास वेदांती का पुण्य स्मरण किया। बताते चले कि श्री राम वल्लभा कुंज को अयोध्या की प्राचीन धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े प्रमुख स्थलों में माना जाता है। इस स्थान की आचार्य परंपरा में पंडित श्री राम वल्लभा शरण जी महाराज के बाद उनके कृपापात्र शिष्य श्री राम पदारथ दास जी वेदांती ने गद्दी संभाली। उनके परम धाम गमन के बाद पंडित हरिनाम दास जी वेदांती आचार्य पद पर विराजमान हुए। पंडित हरिनाम दास जी वेदांती को विद्वान, प्रभावशाली और धर्म-अध्यात्म के प्रति समर्पित संत के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने श्री राम वल्लभा कुंज की संत परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बाद उनके शिष्य रामशंकर दास जी वेदांती ने इस स्थान की गद्दी संभाली। पुण्यतिथि के अवसर पर भक्तों ने संत के चित्र एवं चरण पादुकाओं का पूजन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। आश्रम परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, राम नाम संकीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से संत को याद किया गया। आचार्य राजेंद्र शास्त्री ने बताय कि संतों की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनकी साधना, सेवा और आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में उतारने का भी अवसर है। पंडित हरिनाम दास वेदांती की स्मृति आज भी श्री राम वल्लभा कुंज की गुरु परंपरा और अयोध्या की संत परंपरा में श्रद्धा के साथ जीवित है। अवधेश कुमार तिवारी, आचार्य अनूप शास्त्री और आचार्य अरविंद शास्त्री,विदुआ महाराज ने प्रार्थना की कि संत की कृपा और आशीर्वाद सभी भक्तों पर बना रहे तथा अयोध्या की सनातन संत परंपरा इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ती रहे।



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