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‘इंदौर में 'सिस्टम बनाम स्टूडेंट' की सियासी जंग:राहुल के मंच से छात्रों ने गिनाए मप्र के 5 मुद्दे, बीजेपी बोली- 'ये सब प्रायोजित है'




राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के छात्रों ने भर्तियों, नर्सिंग शिक्षा, शिक्षक भर्ती, आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं और परीक्षा गड़बड़ियों से जुड़े 5 मुद्दे उठाए। कांग्रेस ने इन्हें सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल बताया, जबकि बीजेपी ने कार्यक्रम को ‘प्रायोजित’ बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें कांग्रेस संगठन से जुड़े लोग शामिल थे। जानते हैं, इंदौर के मंच पर उठे इन 5 मुद्दों पर छात्रों ने क्या कहा और सरकार-बीजेपी का क्या जवाब है। मुद्दा 1: 13% ओबीसी आरक्षण पर विवाद, नियुक्तियों का इंतजार राजगढ़ की सपना गुर्जर और सतना के अखिल भारती क्रांति ने MPPSC समेत अन्य भर्तियों में 13% पद होल्ड होने का मुद्दा उठाया। सपना के मुताबिक, मार्च 2019 में OBC आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया गया था। बाद में 13% पदों को कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर होल्ड किया गया। उनका दावा है कि करीब 10 हजार पदों पर यह स्थिति है और 1.87 लाख अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। अखिल भारती ने कहा कि प्री, मेंस और इंटरव्यू पास करने के बाद भी अभ्यर्थी वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं और मानसिक दबाव झेल रहे हैं। कानूनी स्थिति: 27% OBC आरक्षण से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई 5 अगस्त को पूरी हुई। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा है। अब अदालत के फैसले का इंतजार है। मुद्दा 2: 6 साल बाद भी नर्सिंग की डिग्री नहीं, कॉल सेंटर में नौकरी नर्सिंग छात्रा याशिका दानी ने नर्सिंग शिक्षा में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 2020 में दाखिला लिया था और 4 साल का कोर्स 2024 में पूरा होना था, लेकिन 2026 में भी वे थर्ड ईयर में हैं। उनके मुताबिक, न रिजल्ट जारी हो रहे हैं और न फोर्थ ईयर की परीक्षाएं। याशिका के मुताबिक, कॉलेज की फीस भरने के लिए उन्हें कॉल सेंटर में नौकरी करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि डिग्री पूरी नहीं होने के कारण अस्पताल कम वेतन पर काम का ऑफर देते हैं। मुद्दा 3: शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग, 9 दिन से निर्जल अनशन वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थी 30 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़ी दीप्ति सिंह ठाकुर ने कहा कि चयनित होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। राजगढ़ के ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत 9 दिनों से निर्जल अनशन पर हैं। आंदोलनकारियों के मुताबिक, उनकी हालत बिगड़ रही है और वे बार-बार बेहोश हो रहे हैं। अभ्यर्थियों की मांग वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की है। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें आंदोलन में बुलाया जाए, वे आएंगे। सरकार का जवाब: रिजल्ट जारी होने के बाद पद बढ़ाने का प्रावधान नहीं शनिवार देर रात स्कूल शिक्षा विभाग ने आधिकारिक बयान जारी किया। विभाग ने दीप्ति सिंह ठाकुर और नरेंद्र राजपूत को लेकर स्थिति साफ की। दीप्ति सिंह ठाकुर: विभाग के मुताबिक, कर्मचारी चयन मंडल की चयन या प्रतीक्षा सूची में दीप्ति सिंह का नाम नहीं है। विभाग ने कहा कि परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पद बढ़ाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। नरेंद्र राजपूत: विभाग के अनुसार, नरेंद्र ने EWS श्रेणी में परीक्षा दी थी। इस श्रेणी में अंतिम चयनित अभ्यर्थी की रैंक 3621 थी, जबकि नरेंद्र की रैंक 5427 है। विभाग के मुताबिक, इस आधार पर वे नियुक्ति के पात्र नहीं हैं। मुद्दा 4: आदिवासी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल धार निवासी रवि वास्कले ने आदिवासी बहुल बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि बालाघाट मलेरिया का हॉटस्पॉट है और डायरिया व खसरा जैसी बीमारियों से 30 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में बैकलॉग के पद खाली हैं और समस्याएं उठाने वालों को निशाना बनाया जाता है। मुद्दा 5: मांगों को लेकर प्रदर्शन और कार्रवाई का आरोप देवास के खातेगांव निवासी रंजीत किसानवंशी ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कृषि भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के बाद दोबारा परीक्षा हुई, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई। रंजीत के मुताबिक, पटवारी भर्ती में एक ही कॉलेज से 10 टॉपर आने के बाद जांच आयोग बनाया गया, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना 2024 में नियुक्तियां कर दी गईं। रंजीत के मुताबिक, MPPSC की मांगों को लेकर इंदौर में धरने के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें भोपाल बुलाकर आश्वासन दिया। उनका आरोप है कि इंदौर लौटने के बाद उनके और साथी राधे जाट के खिलाफ FIR दर्ज हुई और उन्हें जेल भेज दिया गया। रंजीत ने कहा कि चार दिन बाद हाईकोर्ट से जमानत मिली। बीजेपी बोली- अपने ही कार्यकर्ताओं को मंच पर बुलाया कार्यक्रम खत्म होने के कुछ देर बाद ही बीजेपी ने पोस्टर जारी किए और आरोप लगाया कि कार्यक्रम में आम छात्रों के रूप में जिन लोगों को मंच पर अपनी बात रखने का मौका दिया गया, उनमें कुछ कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े पदाधिकारी शामिल थे। इसके बाद पार्टी नेताओं की तरफ से भी बयान सामने आए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को युवाओं पर भरोसा होता तो छात्रों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं को खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती।



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