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उन्नाव में बाल श्रम अभियान, पांच श्रमिक चिन्हित:प्रतिष्ठानों पर छापेमारी, संचालकों पर कानूनी कार्रवाई




उन्नाव में वर्ष 2027 तक उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत विशेष अभियान जारी है। इसी क्रम में गुरुवार दोपहर को श्रम विभाग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) यूनिट और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने सदर तहसील क्षेत्र के गंगाघाट और शुक्लागंज में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान पांच बाल एवं किशोर श्रमिकों को चिन्हित किया गया, जिनके संबंधित प्रतिष्ठान संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सहायक श्रमायुक्त एस.एन. नागेश ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (संशोधित-2016) तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत जनपद में 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य बाल एवं किशोर श्रमिकों का चिन्हांकन कर उन्हें श्रम से मुक्त कराना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त, सड़कों पर रहने वाले और बेघर बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण प्रदान करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। गुरुवार को गठित टास्क फोर्स ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी राधेश्याम सिंह, निलेश कुमार दीक्षित और राजेंद्र कुमार के नेतृत्व में गंगाघाट और शुक्लागंज क्षेत्र में अभियान चलाया। टीम में एएचटी यूनिट के सब इंस्पेक्टर शैलेश कुमार यादव और चाइल्ड हेल्पलाइन के दिवाकर ओझा भी शामिल थे। संयुक्त टीम ने मिठाई की दुकानों और ऑटोमोबाइल प्रतिष्ठानों सहित कुल तीन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुल पांच बाल एवं किशोर श्रमिक कार्य करते हुए पाए गए, जिन्हें चिन्हित किया गया। टीम ने संबंधित सेवायोजकों को मौके पर ही निरीक्षण टिप्पणी जारी की और स्पष्ट किया कि बाल श्रम कानूनों के उल्लंघन पर उनके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। श्रम विभाग ने जनपद के सभी प्रतिष्ठान संचालकों, दुकानदारों और व्यवसायियों से अपील की है कि वे किसी भी बालक से श्रम न कराएं और बाल श्रम मुक्त उन्नाव बनाने के अभियान में प्रशासन का सहयोग करें। विभाग ने यह भी कहा कि अभियान लगातार जारी रहेगा और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



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