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शेखपुरा में जघन्य अपराधों में न्याय दिलाने वाले लोक अभियोजक एक जर्जर और तीन दशक पुराने कमरे में काम करने को मजबूर हैं। इस कमरे की खराब हालत के कारण उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, और किसी भी समय अप्रिय घटना होने का खतरा बना हुआ है। बारिश के दिनों में हल्की फुहार पड़ने पर भी कमरे में पानी का रिसाव होता है, जिससे पूरा कमरा तर-बतर हो जाता है। ऐसे में अभियोजकों को खड़े होकर काम निपटाना पड़ता है और कमरे में जमा पानी को बाहर निकालना पड़ता है। इसके अलावा, यह पुराना और जर्जर भवन कभी भी टूटकर गिर सकता है, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा है। जिला न्यायालय में अभियोजन कार्य के लिए गृह विभाग और विधि विभाग द्वारा अभियोजकों की तैनाती की जाती है। गृह विभाग द्वारा तैनात अभियोजन अधिकारियों के लिए तीन दशक पुराने भवन के दो कमरों का जीर्णोद्धार कर उन्हें वातानुकूलित कर दिया गया है। हालांकि, विधि विभाग द्वारा तैनात जिला लोक अभियोजक, विशेष लोक अभियोजक और अपर लोक अभियोजकों की स्थिति बदतर बनी हुई है। कमरों के अभाव में बड़ी संख्या में विशेष लोक अभियोजक और अपर लोक अभियोजक न्यायालय का कार्य निपटाने के लिए इधर-उधर भटकते देखे जाते हैं। लोक अभियोजक उदय नारायण सिंहा ने बताया कि उनके लिए आवंटित जर्जर कमरे की मरम्मत के लिए उन्होंने कई बार जिला प्रशासन से पत्राचार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि कमरे में पंखा, बल्ब जैसी आवश्यक सामग्री भी उन्हें अपने घर से लाकर लगानी पड़ी है। ऑफीसर होने के बावजूद उन्हें सभी क्लर्क और चपरासी वाले कार्य भी स्वयं निपटाने पड़ते हैं। बारिश के दिनों में इस कमरे में बैठकर गवाहों को तैयार करने आर्गुमेंट के लिए कानून की किताबों को पलटने आदि में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। लगातार अनहोनी की आशंका बनी रहती है। विधि विभाग द्वारा तैनात लगभग एक दर्जन विशेष लोक अभियोजन और अपर लोक अभियोजक को सरकारी स्तर पर तो कहीं बैठने का स्थान भी नहीं प्राप्त है।
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शेखपुरा में लोक अभियोजकों का कक्ष जर्जर:कभी भी हो सकती दुर्घटना, मरम्मत को प्रशासन को लिखा पत्र
