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बारां में 172 स्वास्थ्य संस्थानों का सघन निरीक्षण:इंटेंसिव आरसीएच ड्राइव के तहत मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जांच




बारां जिले में इंटेंसिव आरसीएच (प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य) ड्राइव के तहत 172 स्वास्थ्य संस्थानों का सघन निरीक्षण किया गया। अभियान के दौरान 279 महिलाओं का 12 सप्ताह से पहले एएनसी पंजीकरण हुआ, 61 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई, जिनमें 12 एनीमिया से पीड़ित मिलीं। निरीक्षण में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता परखी गई और जहां कमियां मिलीं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। जिलेभर में चला व्यापक निरीक्षण अभियान जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जगदीश कुशवाह के निर्देशन में जिला अस्पताल, उप-जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और उप स्वास्थ्य केंद्र सहित कुल 172 चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण किया गया। अभियान का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (आरसीएच) सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना था। जिला और ब्लॉक स्तर की टीम रही सक्रिय निरीक्षण में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ डिप्टी सीएमएचओ डॉ. सीताराम वर्मा, डॉ. निशांत सैनी, डीपीएम दिलीप शर्मा, डॉ. अशोक मीणा, डीपीसी आशा कॉर्डिनेटर धर्मेन्द्र निर्विकार, डीपीसी आईईसी नीतू शर्मा, दक्षता मेंटर ब्रह्मदेव शर्मा, ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, बीसीएमओ, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, बीपीएम, बीएचएस, पीएचएस और सीएचओ ने भाग लिया। इन सेवाओं का किया गया गहन मूल्यांकन अधिकारियों ने उच्च जोखिम गर्भवती (एचआरपी) महिलाओं की पहचान और फॉलोअप, प्रसव सेवाएं, नियमित टीकाकरण, एएनसी सेवाएं, संस्थागत प्रसव, दवा एवं जांच सुविधाएं, रिकॉर्ड संधारण, साफ-सफाई, स्टाफ की उपस्थिति तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का विस्तृत मूल्यांकन किया। स्वास्थ्यकर्मियों को सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने और सभी आरसीएच गतिविधियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण में सामने आए प्रमुख आंकड़े मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जगदीश कुशवाह ने बताया कि अभियान के दौरान 12 सप्ताह से पहले 279 एएनसी रजिस्ट्रेशन हुए। 61 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई, जिनमें 12 एनीमिया से ग्रसित थीं। इसी अवधि में जिले में 12 प्रसव हुए, जिनमें 4 सिजेरियन (ऑपरेशन) के माध्यम से कराए गए। जहां भी कमियां मिलीं, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।



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