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कल्पना मिश्रा के पिता की 10वें दिन हालत बिगड़ी:धरने पर मनाने पहुंची प्रशासनिक टीम; 12 से 24 सितंबर तक चलेगी सुनवाई




रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में उनके पिता का अनशन दसवें दिन भी जारी है। लगातार भूखे रहने से उनकी हालत बिगड़ गई है। अब वे बैठ भी नहीं पा रहे हैं और धरना स्थल पर लेटकर अनशन कर रहे हैं। प्रशासन की टीम उन्हें समझाने पहुंची, लेकिन उन्होंने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। पिता ने कहा अब मरने की ठान ली है, एफआईआर दर्ज होने तक नहीं उठूंगा। वे बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर की मांग कर रहे हैं। इधर, प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है। प्रशासन समझाने पहुंचा, पिता नहीं माने
पिता कई दिनों से सिरमौर चौराहे पर धरना दे रहे हैं। शुक्रवार को प्रशासन की टीम उनकी स्थिति देखने और अनशन खत्म कराने के लिए पहुंची। अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। उन्होंने अपनी मांग दोहराई। कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, वे अनशन खत्म नहीं करेंगे। 26 अगस्त को हुई थी कल्पना और नवजात की मौत
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की 26 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में मौत हुई थी। इसके बाद उनके पिता ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग शुरू की। पिता का कहना है कि बेटी को न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए
मामले में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल को सौंपी गई है। कलेक्टर के अनुसार जांच के लिए 7 बिंदु तय किए गए हैं। जांच एक महीने में पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। 12 से 24 सितंबर तक होगी सुनवाई
प्रशासन के अनुसार मामले की सुनवाई 12 सितंबर से 24 सितंबर के बीच होगी। सुनवाई प्रत्येक गुरुवार और शनिवार को होगी। सुनवाई कलेक्टर कार्यालय में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगी। मामले से जुड़े पीड़ित पक्ष, प्रत्यक्षदर्शी और आम नागरिक घटना से संबंधित साक्ष्य, लिखित बयान या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्रमाण के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त साक्ष्यों पर विचार नहीं किया जाएगा। जांच शुरू, लेकिन FIR की मांग पर अड़े पिता
प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बावजूद कल्पना के पिता एफआईआर की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि मजिस्ट्रियल जांच अपनी जगह चलती रहे, लेकिन बेटी की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होने तक वे अनशन खत्म नहीं करेंगे।



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