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मेरठ के चर्चित कपसाड़ कांड में मंगलवार यानी कल का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। दलित महिला सुनीता जाटव की हत्या और उसकी बेटी रूबी के अपहरण के आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर स्पेशल पोक्सो कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। अदालत को यह तय करना है कि घटना के समय आरोपी बालिग था या नाबालिग। पिछली सुनवाई में फैसला सुरक्षित रखने के बाद कोर्ट ने 22 जुलाई को निर्णय सुनाने की तिथि तय की थी, लेकिन उस दिन फैसला नहीं आ सका और सुनवाई 28 जुलाई के लिए टाल दी गई। अब एक बार फिर पूरे जिले की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं। 8 जनवरी, 2026 को सरधना के कपसाड़ गांव में दलित महिला सुनीता जाटव की हत्या और उसकी बेटी रूबी के अपहरण की सनसनीखेज वारदात ने पूरे जिले को हिला दिया था। घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और हालात इतने संवेदनशील हो गए थे कि पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और मीडिया की गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी गई। करीब 48 घंटे बाद पुलिस ने रूबी को सकुशल बरामद कर आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिसके बाद हालात सामान्य होने लगे। पारस की उम्र को लेकर डाली याचिका मामले ने 14 जनवरी, 2026 को नया मोड़ लिया, जब आरोपी पक्ष के अधिवक्ता बलराम सोम, संजीव राणा और विजय शर्मा ने अदालत में याचिका दाखिल कर दावा किया कि घटना के समय पारस सोम नाबालिग था। उन्होंने मुकदमे की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) में कराए जाने की मांग की। एससी-एसटी कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित अभिलेख तलब किए और नौ फरवरी को मामला जेजे बोर्ड को भेज दिया। वादी पक्ष ने शुरू से ही इस दावे का विरोध करते हुए आरोपी को बालिग बताया और उसी आधार पर कार्रवाई की मांग की। मेडिकल के बाद बालिग किया घोषित दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद जेजे बोर्ड ने सात मई को आरोपी का ओसिफिकेशन टेस्ट कराने का आदेश दिया। 12 मई को मेडिकल परीक्षण कराया गया और आठ जून को आई रिपोर्ट के आधार पर जेजे बोर्ड ने पारस सोम को बालिग घोषित कर दिया। इसके बाद आरोपी पक्ष ने जेजे बोर्ड के आदेश को चुनौती देते हुए स्पेशल पोक्सो कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की और आदेश निरस्त करने की मांग की। कोर्ट का फैसला सुरक्षित, निर्णय कल अपील पर सुनवाई के दौरान स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने जेजे बोर्ड से ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड (टीसीआर) भी तलब किया। 15 जुलाई को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पहले 22 जुलाई और फिर 28 जुलाई की तिथि तय होने के बाद अब मंगलवार को यह साफ हो जाएगा कि अदालत जेजे बोर्ड के फैसले को बरकरार रखती है या आरोपी पक्ष की अपील स्वीकार करते हुए नया आदेश पारित करती है। केस की दिशा तय करेगा कोर्ट का निर्णय यह फैसला केवल पारस सोम की उम्र तय करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरे मुकदमे की आगे की सुनवाई की दिशा भी तय होगी। यदि अदालत जेजे बोर्ड के फैसले को बरकरार रखती है तो आरोपी पर बालिग के रूप में मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। वहीं यदि अपील स्वीकार होती है तो मामले की कानूनी प्रक्रिया की दिशा बदल सकती है। इसलिए पीड़ित पक्ष, आरोपी पक्ष, पुलिस और पूरे जिले की नजरें मंगलवार को आने वाले इस अहम फैसले पर टिकी हुई हैं।
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कल तय होगी पारस सोम की उम्र, कोर्ट सुनाएगी फैसला:पोक्सो कोर्ट पर नजर, जेजे बोर्ड के निर्णय को चुनौती देने वाली अपील का मामला
