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कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के बीच हिमाचल प्रदेश में एक बड़े बेनामी भूमि सौदे का पर्दाफाश हुआ है। सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में सामने आए एक चौंकाने वाले खेल ने अब स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच को बेहद गंभीर मोड़ दे दिया है। विजिलेंस की एफआईआर के मुताबिक, यह पूरा मामला गगल एयरपोर्ट के पास पटवार सर्कल मटौर के मौजा पत्यारकर और मौजा नंदाहार में स्थित 4 कनाल 4 मरला (00-16-19 हेक्टेयर) जमीन से जुड़ा है। इस मामले में विजिलेंस ने धर्मशाला पुलिस थाने में पांच नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की है। इस मामले में अब गगल एयरपोर्ट के आसपास के राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी विजिलेंस के रडार पर आ गई है। क्या है पूरा मामला और ‘बेनामी’ का खेल? 2019 का सौदा: वर्ष 2019 में इस कीमती जमीन को खरीदने के लिए एम/एस ए-वॉन सेल्स (इंडिया) से जुड़े लोगों ने मूल भू-मालिकों के साथ सौदा तय किया, जिसकी वास्तविक कीमत करीब 2 करोड़ रुपये थी। बैकडोर पेमेंट और GPA: 2020-21 में ए-वॉन सेल्स की ओर से बैंक और नकद के माध्यम से मालिकों को भुगतान किया गया। इसके बाद 19 नवंबर 2020 को चालाकी से सनी साहनी के पक्ष में ‘जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी’ (GPA) तैयार करवा ली गई। तीसरे के नाम रजिस्ट्री: करीब तीन साल बाद, 24 अगस्त 2023 को इसी जीपीए का इस्तेमाल कर सेल डीड नंबर 981/2023 के जरिए यह जमीन रचना नागपाल के नाम पर ट्रांसफर (रजिस्ट्री) कर दी गई। बैंक खातों की जांच में खुली पोल एसआईटी ने जब इस सौदे से जुड़े बैंक खातों की पड़ताल की, तो एक अजीबोगरीब राउंड-ट्रिपिंग (रकम का घूमना) सामने आई। कागजों पर दिखाई गई सेल डीड में जमीन की कीमत चुकाने के लिए चेक का जिक्र था। लेकिन बैंक रिकॉर्ड ने साफ कर दिया कि करीब 29 लाख रुपये पहले रचना नागपाल के खाते में भेजे गए और वहां से तुरंत यह रकम वापस ए-वॉन सेल्स से जुड़े खातों में ट्रांसफर हो गई। विजिलेंस को अंदेशा है कि यह कागजी हेरफेर सिर्फ असली खरीदार और भुगतानकर्ता की पहचान छिपाने के लिए किया गया था। इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई FIR राजेश गोयल विशाल गोयल रचना नागपाल सनी साहनी संजीव कुमार एक अज्ञात व्यक्ति कागजों में नाम रचना का, कब्जा ‘ए-वॉन सेल्स’ का एसआईटी ने जब मौके पर जाकर तफ्तीश की, तो जमीन पर पूरी तरह से ए-वॉन सेल्स से जुड़े लोगों का ही नियंत्रण और कब्जा पाया गया। वहां बकायदा चारदीवारी, टिन शेड, एक अस्थायी स्टोर और बिजली का कनेक्शन भी मिला। जब जमीन के मूल मालिकों के बयान दर्ज किए गए, तो उन्होंने भी स्पष्ट किया कि उनका सौदा और पैसों का लेनदेन सीधे ए-वॉन सेल्स के साथ ही हुआ था। धारा 118 को दरकिनार करने की साजिश? विजिलेंस का आरोप है कि यह पूरी बिसात हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 118 के तहत गैर-हिमाचलियों पर लागू जमीन खरीद संबंधी कड़े प्रतिबंधों को बाईपास (दरकिनार) करने के लिए बिछाई गई थी। इस बड़े फर्जीवाड़े को लेकर पुलिस ने आईपीसी (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज बनाना और इस्तेमाल करना), 120-B (आपराधिक साजिश) और बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम की धारा 53(1) व 53(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की कमान इंस्पेक्टर अजय कुमार को सौंपी गई है।
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कांगड़ा एयरपोर्ट जमीन खरीद में SIT को मिला नया पैटर्न:रकम एक फर्म से गई, जमीन दूसरे के नाम हुई, पांच नामजद सहित 6 पर केस
