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जिला कांगड़ा की सबसे पुरानी सब्जी मंडी इस समय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। मंडी में जर्जर हो चुके भवन, टपकती छतों और चारों तरफ फैली अव्यवस्था के कारण किसान और आढ़ती अपनी जान जोखिम में डालकर हर दिन कारोबार करने को मजबूर हैं। हैरत की बात यह है कि जिला कांगड़ा कृषि उपज मंडी समिति (APMC) का मुख्यालय भी इसी परिसर में स्थित है, लेकिन इसके बावजूद मंडी की दुर्दशा विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और ढुलमुल कार्यप्रणाली को उजागर कर रही है। बरसात के इस मौसम में मंडी की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है: टपकती छतें और गिरता प्लास्टर: दुकानों और प्लेटफार्म की छतों से लगातार पानी टपक रहा है। कई जगहों से प्लास्टर उखड़कर गिर रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे या अनहोनी की आशंका बनी हुई है। सफाई व्यवस्था शून्य: मंडी परिसर में चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे हैं और आवारा पशुओं की भरमार है। हर तरफ फैली बदबू के कारण सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
लाखों रुपये टैक्स देने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अकाल मंडी में लगभग 50 आढ़ती नियमित रूप से कारोबार करते हैं, जो हर साल सरकार को लाखों रुपये का यूजर टैक्स और मार्केट कमेटी फीस देते हैं। इसके बावजूद उन्हें और दूर-दराज से आने वाले किसानों को मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो रही हैं: मंडी में न तो किसानों के बैठने के लिए कोई शेड या व्यवस्था है और न ही सुचारू शौचालय की सुविधा। मटोर निवासी अमित और गुरबचन सिंह के अनुसार मंडी के बाहर सड़क पर हुए अतिक्रमण के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। किसानों और आढ़तियों की जुबानी मनोज कुमार (किसान, सहोड़ा) ने मंडी की गंदगी पर रोष जताते हुए उन्होंने कहा कि यहां इतनी ज्यादा बदबू और गंदगी है कि उनकी अपनी गौशाला भी इस मंडी से कहीं अधिक साफ-सुथरी है। विपिन और रमेश कुमार (किसान, कोटकवाला)ने बताया कि छतों से टपकता पानी और गंदगी के ढेर कभी भी बड़े हादसे या बीमारी का कारण बन सकते हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। स्थानीय आढ़ती: आढ़तियों ने मौजूदा सफाई व्यवस्था को पूरी तरह विफल बताते हुए मांग की है कि सफाई का काम संभाल रहे निजी ठेकेदार को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और नए सिरे से ठेका देकर नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन का पक्ष मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र मोंगरा ने बताया कि क्षेत्र के लिए नई सब्जी मंडी का निर्माण कार्य पहले से ही प्रगति पर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक नई मंडी पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती, तब तक पुरानी सब्जी मंडी की वर्तमान व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाएगा और बुनियादी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
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कांगड़ा सब्जी मंडी में जर्जर भवन, हादसे का खतरा:छत टपकने, गंदगी और प्लास्टर गिरने से किसान-आढ़ती परेशान
