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प्रदेश में खरीफ वर्ष 2025-26 की धान खरीदी 7 फरवरी को बंद हो चुकी है। अधिकांश केंद्रों से उठाव भी पूरा हो गया, लेकिन छह महीने बाद भी खरीदी और उठाव का अंतिम मिलान नहीं हुआ है। अब तक खरीदी केंद्रों में 211 करोड़ रुपए का 68 हजार टन और मार्कफेड के 78 संग्रहण केंद्रों में 149 करोड़ रुपए का 48 हजार टन धान कम मिला है। यानी प्रदेशभर में रिकॉर्ड के मुकाबले करीब 350 करोड़ रुपए का 1.16 लाख टन धान गायब है। इस गड़बड़ी की आशंका में भास्कर ने चार जिलों के 10 खरीदी और चार संग्रहण केंद्रों की पड़ताल की। रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल धान था, लेकिन मौके पर कहीं खाली मैदान, कहीं भूसा और कहीं गिनती की सड़ती बोरियां मिलीं। कार्रवाई में भी दोहरा पैमाना सामने आया है। समितियों में आधा प्रतिशत से कम कमी पर भी प्रदेशभर में सैकड़ों एफआईआर हुई हैं। दूसरी ओर, संग्रहण केंद्रों में शॉर्टेज पांच साल में आठ से 36 गुना तक बढ़ी, लेकिन कार्रवाई एक डीएमओ और कुछ कर्मचारियों तक सीमित रही। समितियों के लिए शून्य सूखत, संग्रहण केंद्रों को 1% की छूट
नियमों के अनुसार समितियों के खरीदी केंद्रों में सूखत की स्वीकार्य सीमा शून्य है। एक बोरी भी कम मिलने पर कमीशन से वसूली और एफआईआर तक होती है। संग्रहण केंद्रों को एक प्रतिशत की छूट है। इसके बावजूद 2023-24 में 9% और 2024-25 में 4.17% शॉर्टेज दर्ज हुई। जिम्मेदार अफसरों पर इतनी कमी के अनुपात में कार्रवाई नहीं हुई। कहीं कैप कवर के नीचे भूसा, कहीं सड़ती बोरियां आसुलखार: 1.75 करोड़ का धान, कैप कवर के नीचे भूसा
कांकेर के आसुलखार केंद्र में 1.75 करोड़ रुपए का 5,658 क्विंटल धान दर्ज है। मौके पर खाली मैदान में कैप कवर से ढका भूसे का ढेर मिला। लखनपुरी-उरकुड़ा: 16,154 क्विंटल दर्ज, एक बोरी भी नहीं
कांकेर के लखनपुरी-उरकुड़ा संग्रहण केंद्र में रिकॉर्ड पर 16,154 क्विंटल धान है, लेकिन मौके पर एक बोरी नहीं मिली। कोंडागांव मुख्यालय के संग्रहण केंद्र में भी 2,537 क्विंटल धान दर्ज है, जबकि केंद्र खाली मिला। तालाकुर्रा: 3,827 क्विंटल दर्ज, बचीं करीब 100 बोरियां
कांकेर की मरकाटोला समिति के तालाकुर्रा केंद्र में 1.18 करोड़ रुपए का 3,827 क्विंटल धान दर्ज है। मौके पर करीब 100 बोरियां सड़ती मिलीं। बताया गया कि मार्कफेड ने समय पर उठाव नहीं कराया। बफना: केंद्र खाली, रिकॉर्ड में 3.25% उठाव बाकी
कोंडागांव के बफना केंद्र में एक बोरी भी नहीं है, लेकिन रिकॉर्ड में 3.25% उठाव बाकी है। अंतिम मिलान में इसकी भरपाई समिति के कमीशन से होगी। नरसैयापल्ली-बम्हनी: 8,803 क्विंटल कम, एफआईआर दर्ज महासमुंद के नरसैयापल्ली केंद्र में 4,438 और बम्हनी में 4,365 क्विंटल धान कम मिला है। दोनों जगह धान की जगह भूसा मिला। डीएमओ आशुतोष कोसरिया ने बताया कि कर्मचारियों और समिति पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। आईआईटी की स्टडी में 3% से ज्यादा सूखत का दावा
खरीदी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि खाद्य निगम ने सूखत का स्तर जानने के लिए आईआईटी खड़गपुर से अध्ययन कराया गया था। रायपुर और जांजगीर के कुछ संग्रहण केंद्रों के स्टैक निगरानी में रखे गए, जिनमें 3% से ज्यादा सूखत मिलने की बात कही गई। हालांकि ये रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। 1 डीएमओ, 3 कर्मियों को सस्पेंड किया गया है। दो प्रभारियों पर एफआईआर हुई है। 15 प्रभारियों व कर्मचारियों की विभागीय जांच चल रही है। ये कहना गलत है कि संग्रहण केंद्रों की गड़बड़ी पर कार्रवाई नहीं होती।
-जितेंद्र शुक्ला, एमडी, मार्कफेड समितियों को जितना धान खरीदना है, उतना ही जमा करना होगा। उनके लिए सूखत की सीमा शून्य है। संग्रहण केंद्रों में एक प्रतिशत तक सूखत की अनुमति है।’
-अभिषेक तिवारी, प्रबंधक, अपेक्स बैंक
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कागजों में करोड़ों का धान, मौके पर मैदान या भूसा:संग्रहण केंद्रों की पड़ताल; कहीं सूखत ज्यादा, कहीं पर धान कम
