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रेवाड़ी में उपभोक्ता आयोग ने छात्र को भ्रमित करने वाले इंस्टीट्यूट पर 15 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। आयोग ने छात्र की फीस 9 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने के भी आदेश दिए हैं। इस फैसले से भ्रमित कर बच्चों को अपने संस्थानों में दाखिला करने वालों के लिए बड़ी नसीहत मानी जा रही है। दाखिले के बाद पता चली खामियां रेवाड़ी की एम्प्लाइज कॉलोनी निवासी छात्र दीपक यादव ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। जिसमें बताया कि उसने 2025-26 में शहर के डॉट इंस्टिट्यूट में दाखिला करवाया। दाखिले के समय इंस्टीट्यूट ने वादा किया कि उसके पास आईआईटीएन पास टीचर्स हैं और बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। एडमिशन लेने के बाद पाया कि उनके पास वादे के अनुसार आईआईटीएन टीचर्स मौजूद नहीं थे। इंस्टिट्यूट के कमरे भी बच्चों की शिक्षा के लिए उपयुक्त नहीं थे। आग लगने और किसी प्राकृतिक आपदा के समय बचाव के लिए उपकरण व सुविधा भी नहीं थी। मांगने पर भी वापस नहीं की फीस शिकायत में बताया कि इंस्टीट्यूट में शिक्षा के नियमों की अनदेखी मिली।शिकायतकर्ता ने अपने पुत्र को 10 से 15 दिन के बाद ही अपना नाम वापस ले लिया और फीस वापसी मांगी। कई बार मांगने के बाद भी जब फीस वापस नहीं की गई तो जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत पत्र दायर किया। जिला उपभोक्ता आयोग के सदस्य राजेंद्र प्रसाद एवं श्रीनिवास ने अपने संयुक्त निर्णय में पाया कि शिकायतकर्ता की शिकायत संस्थान को नोटिस भेजा, लेकिन वह आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ। जिस पर आयोग ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ता की जमा कराई गई ₹60000 फीस 9 फ़ीसदी ब्याज सहित वापस करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए ₹15000 का जुर्माना अलग से लगाया है। यह जुर्माना राशि 30 दिन के भीतर अदा करनी होगी।
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रेवाड़ी उपभोक्ता आयोग ने इंस्टीटयूट पर लगाया 15 हजार जुर्माना:बच्चे को गलत जानकारी देकर दिया दाखिला; ब्याज सहित वापस करनी होगी फीस
