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प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों और राजकीय विश्वविद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू हो चुका है। छात्र कक्षाओं में पहुंच गए हैं, लेकिन करीब एक माह बाद भी अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति पूरी नहीं हो सकी है। इससे कई कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति है। अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि नियुक्ति में देरी से उनकी आय भी प्रभावित हो रही है। दोबारा काम पर लौटने के निर्देश अब तक नहीं राज्य सरकार ने 17 जुलाई को अतिथि व्याख्याता नीति-2024 (संशोधित-2026) जारी की। इसके बाद भी अब तक उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पिछले सत्र में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं को दोबारा कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश कॉलेजों को नहीं मिले हैं। व्याख्याताओं की समस्या समझिए पिछले सत्र का कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो गया। नया सत्र शुरू होने के बाद भी नियुक्ति नहीं हुई। हर साल 11 माह काम का प्रावधान होने के बावजूद नियुक्ति में देरी होती है, जिससे साल में करीब 10 माह का ही मानदेय मिल पाता है। व्याख्याताओं का कहना है कि इससे आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है। नई नीति पर भी आपत्ति पहले 4 घंटे तक कक्षाएं लेने पर 2 हजार रुपए मिलते थे। 3 घंटे अतिरिक्त रुकने पर 400 रुपए प्रतिदिन अतिरिक्त कार्य भत्ता मिलता था। नई नीति में 400 रुपए का अतिरिक्त कार्य भत्ता समाप्त कर दिया गया है। अब 7 घंटे तक उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है, लेकिन भुगतान में अतिरिक्त लाभ का प्रावधान नहीं है। विभाग बोला: वित्त विभाग से अनुमति उच्च शिक्षा संचालनालय का कहना है कि वित्त विभाग से अनुमति मिलने के बाद ही नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किए जाएंगे। अतिथि व्याख्याताओं ने मांग की है कि सभी क्षेत्रीय अपर संचालकों और महाविद्यालयों को तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो और व्याख्याताओं को समय पर कार्यभार मिल सके।
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कॉलेज शुरू, लेकिन अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति अटकी:पढ़ाई और रोजगार दोनों पर असर, वित्त मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार
