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गोरखपुर में बरसात में बच्चों की हालत बिगड़ी:जिला अस्पताल में हाईग्रेड फीवर के पेशेंट बढ़ें, डॉक्टर ने दी एक्स्ट्रा ध्यान रखने की सलाह




गोरखपुर में बदलते मौसम में बच्चों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। जिला अस्पताल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. गणेश गौरव ने बताया कि जुलाई की शुरुआत से OPD में सर्दी-जुकाम, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और हाई ग्रेड फीवर के मरीजों की संख्या 10 परसेंट तक बढ़ गई है। उनका कहना है कि बरसात में बैक्ट्रीरिया तेजी से फैलता है। जिससे इंफेक्शन की समस्या बड़े ही आसानी से बढ़ जाती है। जून-जुलाई महीने को इंफेक्टेड मंथ (संक्रमित महीना) कहा जाता है। इन महीनों में तमाम तरह के कीटाणु पनपते हैं और वातावरण में फैले होते हैं। डॉक्टर ने बताया कि जीरों से 15 साल के बच्चे का स्किन काफी ज्यादा सेंसटिव रहता है। साथ ही इम्युनिटी पॉवर भी बड़ों के अपेक्षा कमजोर रहती है। ऐसे में बरसात के सीजन में उनके खान- पान और मौसम की मार से बचाव बेहद जरुरी हो जाता है। नहीं तो छोटी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। 60 से 70 पेशेंट मौसमी समस्या के रोज OPD पहुंच रहें
डॉ. गौरव ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से चाइल्ड OPD में 100 से 120 के करीब पेशेंट आ रहे हैं। जिनमें से 60 से 70 बिल्कुल नए और बुखार, सर्दी- खांसी, जुकाम , उल्टी-दस्त और पेट दर्द के होते हैं। मरीजों में 0 से 15 साल के बच्चे शामिल है। सबसे ज्यादा दिक्कत 5 साल तक के बच्चों में देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में बैक्टीरिया के एक्टिव रहने और तेजी से किसी भी जगह पनप जाने से इंफेक्शन बढ़ता है। क्यों बढ़ रही बीमारी
छोटे- छोटे बच्चे घर में या बाहर खेलते वक्त किसी भी इंफेक्टेड चीजों को अनजाने में छू देते हैं। फिर उसी हाथ से खाना या अन्य चीज खा लेते हैं। अब हाथों में छिपे कीटाणु आसानी से पेट के अंदर चले जाते और वहीं से बीमारियां शुरू हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि OPD में ज्यादा हाईग्रेड फीवर और उल्टी दस्त के मरीज पहुंच रहे हैं। बदलते मौसम में कभी बारिश और फिर धूप का बुरा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। ऐसे में ध्यान रखना है कि बच्चे न बारिश में बिल्कुल भी न भींगे। माता- पिता दें विशेष ध्यान
डॉक्टर का कहना है कि ऐसे मौसम में माता- पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। खाने- पीने से लेकर पहने- ओढ़ने तक हर चीज का ध्यान रखना जरुरी हो जाता है। थोड़ी सी भी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि बीमारी बढ़ने पर डॉक्टर के प्रिकॉशंस को फॉलो करने और छोटी- छोटी सावधानियां बरतने से कोई भी मरीज आम तौर पर एक हफ्ते में एकदम ठीक हो जाता है। लेकिन लापरवाही से हालात बिगड़ती है और कई पेशेंट को इमर्जेंसी में एडमिट करना पड़ता है। क्या हैं लक्षण
डॉ. ने बताया कि मौसम के प्रभाव में आने से बीमारी से ग्रसित बच्चों में आम तौर पर भूख न लगना, बच्चे का सुस्त हो जाना, चिड़चिड़ापन बढ़ना, शरीर या माथा गरम रहना, बार- बार उल्टी- दस्त होना, नाक जाम होना, सांस लेने में दिक्कत, नींद कम आना जैसे लक्षण देखें जाते हैं। बरतें ये सावधानियां
उन्होंने बचाव के उपाय भी बताएं…



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