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चंडीगढ़ शहर की बेशकीमती हेरिटेज वस्तुओं को विदेशों में नीलाम होने से रोकने के लिए प्रशासन ने वर्ष 2011 में व्यवस्था बनाई थी। इसके बावजूद 15 साल बाद भी चंडीगढ़ की विरासत वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलामी का सिलसिला जारी है। पेरिस में चंडीगढ़ की चोरी हुई हेरिटेज वस्तुओं की नीलामी का मामला यूनेस्को तक पहुंचने के बाद अब प्रशासन से इस व्यवस्था को दोबारा सक्रिय करने की मांग उठी है। एडमिनिस्ट्रेटर एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य और एडवोकेट अजय जग्गा ने प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल को भी दोबारा सक्रिय करने का सुझाव दिया है। संस्कृति मंत्रालय ने प्रशासन को भेजे दस्तावेज जग्गा ने कहा कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के 23 जून 2026 के पत्र में बताया गया है कि पेरिस स्थित भारतीय स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ की चोरी हुई हेरिटेज वस्तुओं की नीलामी का संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने संबंधित दस्तावेज चंडीगढ़ प्रशासन को भेजकर जरूरी कार्रवाई करने को कहा है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इन वस्तुओं के मामले में सीधे कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकता, क्योंकि ये प्राचीन वस्तु और कला निधि अधिनियम-1972 के तहत ‘प्राचीन वस्तु’ या ‘कला निधि’ की श्रेणी में नहीं आतीं। 2011 में बनाई गई थी हेरिटेज बचाने की व्यवस्था जग्गा ने 22 फरवरी 2011 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी कार्यालय आदेश का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में चंडीगढ़ की हेरिटेज वस्तुओं की ऊंची कीमतों पर बिक्री और नीलामी रोकने के लिए प्रशासन को कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी बनाई गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह व्यवस्था शहर की विरासत को बचाने के लिए बनाई गई थी, तो इसे लगातार सक्रिय क्यों नहीं रखा गया। विदेशों में होने वाली नीलामी पर नजर रखने का सुझाव जग्गा ने हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल को फिर से सक्रिय करने की मांग करते हुए इसमें पंजाब विश्वविद्यालय, पीजीआई, पीईसी, पंजाब एवं हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ पुलिस समेत संबंधित संस्थानों को शामिल करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि सभी संस्थानों को मिलकर हेरिटेज वस्तुओं की पहचान, उनका रिकॉर्ड तैयार करने और सुरक्षा के लिए संयुक्त रणनीति बनानी चाहिए। विदेशों में होने वाली नीलामियों की नियमित निगरानी के साथ वस्तुओं के स्रोत और स्वामित्व का रिकॉर्ड भी तैयार किया जाना चाहिए।इसके अलावा संस्कृति मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। कानूनी रूप से संभव होने पर चंडीगढ़ की महत्वपूर्ण हेरिटेज वस्तुओं को संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है। जग्गा ने कहा कि चंडीगढ़ की विरासत सिर्फ शहर की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक धरोहर है। इसलिए किसी वस्तु के विदेश में नीलाम होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से निगरानी और सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए।
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चंडीगढ़ की हेरिटेज पर फिर खतरा:पेरिस में नीलामी का मामला यूनेस्को तक पहुंचा, 15 साल पुरानी सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय करने की मांग
