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प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना (PM-SGMBY) के तहत चंडीगढ़ में रूफटॉप सोलर को लेकर लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसका असर अब बिजली के बिलों पर भी साफ दिखने लगा है। संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, शहर के 358 घरों का कम से कम एक बिलिंग साइकिल में बिजली बिल शून्य (जीरो) आया है। यह शहर में सोलर ऊर्जा को तेजी से अपनाए जाने का संकेत माना जा रहा है। 1,368 घरों ने लगवाए रूफटॉप सोलर सिस्टम योजना के तहत अब तक चंडीगढ़ में 1,368 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश परिवारों ने अधिक क्षमता वाले सिस्टम लगवाए हैं, जो उनकी अधिकांश या पूरी बिजली की जरूरत पूरी कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, 1,200 से अधिक घरों ने 3 किलोवाट (kW) से अधिक क्षमता वाले सोलर सिस्टम स्थापित किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अब सोलर ऊर्जा को केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि बिजली के मासिक खर्च को कम करने का व्यावहारिक विकल्प मान रहे हैं। रियायती लोन लेने में लोगों की कम दिलचस्पी जहां सोलर सिस्टम लगाने की रफ्तार तेज रही, वहीं योजना के तहत मिलने वाले रियायती ऋण (कंसेशनल लोन) को अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला। फरवरी 2024 में योजना शुरू होने के बाद से चंडीगढ़ में केवल 53 ऋण आवेदन स्वीकृत हुए हैं, जबकि इनमें से अब तक 34 ऋण ही वितरित किए जा सके हैं। इससे संकेत मिलता है कि अधिकांश लोगों ने सोलर सिस्टम लगाने के लिए स्वयं के संसाधनों या अन्य वित्तीय विकल्पों का सहारा लिया, बजाय सरकारी ऋण लेने के। सरकारी इमारतों के बाद अब निजी घरों पर फोकस चंडीगढ़ देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है, जिसने सभी पात्र सरकारी भवनों और सरकारी आवासों पर रूफटॉप सोलर लगाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसी कारण वर्ष 2025-26 में शहर में नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता नहीं जुड़ी, जबकि इससे पहले वर्ष में 13.33 मेगावाट की रिकॉर्ड क्षमता जोड़ी गई थी। अब सरकारी भवनों का लक्ष्य पूरा होने के बाद प्रशासन का फोकस निजी मकानों और रिहायशी क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा के विस्तार पर है। शहर में बढ़ती सोलर स्थापना इस बात का संकेत है कि लोग बिजली के बढ़ते खर्च से राहत पाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को तेजी से अपना रहे हैं।
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चंडीगढ़ के 358 घरों का बिजली बिल हुआ जीरो:3KW से बड़े सोलर सिस्टम पर भरोसा, लोन लेने में दिखी कम रुचि
