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चंडीगढ़ में सरकारी डिस्पेंसरी में गुरुवार को करीब ढाई साल के बच्चे को एक्सपायरी डेट की दवा दे दी गई। बच्चा पिछले दो दिनों से बुखार से पीड़ित था। पिता ने कहा कि बेटे को पहले डॉक्टर के पास ले गए, उन्होंने तीन तरह की दवाइयां बताई। इसके बाद करीब सुबह 10 बजे डिस्पेंसरी से दवाई ली और घर चले गए। जहां पर बेटे को दो दवाइयां खिला दी, जब तीसरी दवाई खिलाने की बारी आई, तो उसके पैकेट पर लिखी डेट पर नजर पड़ गई, जिस पर अगस्त 2026 लिखा था। जिससे वह दवाई रोक दी और सीधे डिस्पेंसरी पहुंच कर शिकायत की। इधर, मामले में डिस्पेंसरी की फार्मेसी ऑफिसर नितिशा ने कहा कि यह दवा गलती से स्टॉक में रह गई और बच्चे को दे दी गई। मामला सामने आने के बाद एक्सपायरी दवा को वहां से हटा दिया गया है। डिस्पेंसरी से तीन तरह की दवाइयां ली धनास स्मॉल फ्लैट्स में रहने वाले मुकेश गुप्ता ने बताया कि उनका बेटा 2 साल 7 महीने का है और पिछले दो दिनों से उसे बुखार था। इलाज के लिए वह बच्चे को चंडीगढ़ के धनास स्मॉल फ्लैट्स स्थित डिस्पेंसरी लेकर गए थे। डॉक्टर की सलाह के बाद डिस्पेंसरी से बच्चे के लिए तीन तरह की दवाएं दी गईं। मुकेश गुप्ता के मुताबिक, घर पहुंचने के बाद उन्होंने बच्चे को दो दवाएं दे दी थीं। तीसरी दवा देने से पहले जब उन्होंने उसके पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट देखी तो पता चला कि दवा की तारीख निकल चुकी थी। बच्चे को दवाई देने से पहले पता चला उन्होंने बताया कि एक्सपायरी दवा बच्चे को देने से पहले ही इसका पता चल गया। इसके बाद उन्होंने दवा देना रोक दिया और तुरंत डिस्पेंसरी पहुंचकर स्टाफ को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरी में दवाओं की जांच में लापरवाही बरती गई। अगर वह बिना एक्सपायरी डेट देखे बच्चे को दवा दे देते तो उसे नुकसान हो सकता था। बच्चे के पिता ने डिस्पेंसरी में रखी सभी दवाओं के स्टॉक की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक्सपायरी दवा किसी दूसरे मरीज को न दी जाए, इसके लिए दवाओं की जांच जरूरी है। साथ ही, उन्होंने मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। गलती से स्टॉक में रह गई दवाई- फार्मेसी ऑफिसर मामले में डिस्पेंसरी की फार्मेसी ऑफिसर नितिशा ने कहा कि जिस दवा का स्टॉक एक्सपायर हो गया था, उसे वापस भेजा जाना था। यह दवा गलती से स्टॉक में रह गई और बच्चे को दे दी गई। उन्होंने बताया कि मामला सामने आने के बाद एक्सपायरी दवा को वहां से हटा दिया गया है। डिस्पेंसरी स्टाफ की ओर से बच्चे के पिता को मामले की जांच का भरोसा भी दिया गया है। अब यह देखा जा रहा है कि एक्सपायरी दवा स्टॉक में कैसे रह गई और मरीज को दवा देते समय इसकी जांच क्यों नहीं हुई। *************** ये खबर भी पढ़ें: मंत्री से सवाल पर सुसाइड, बेटा बोला- जबरन संस्कार कराया:न अस्थियां उठाएंगे, न भोग होगा; मरने से पहले जिनके नाम लिए, सब पर FIR हो संगरूर में गुलजार सिंह सुसाइड केस में परिवार ने प्रशासन पर जबरन अंतिम संस्कार करवाने का आरोप लगाया है। प्रशासन ने 20 लाख रुपए की आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी का आश्वासन देने के बाद अंतिम संस्कार करवाया था। (पढ़ें पूरी खबर)
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चंडीगढ़ में ढाई साल के बच्चे को दी एक्सपायरी दवा:पिता बोला- दो खिला चुके थे, तीसरी के पैकेट पर नजर पड़ी तो रोक दी
