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चंडीगढ़ में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों की समीक्षा के लिए प्रशासक की सलाहकार परिषद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की बैठक बुधवार को यूटी गेस्ट हाउस, सेक्टर-6 में हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने की। बैठक में शिक्षकों के खाली पद भरने से लेकर विद्यार्थियों को करियर मार्गदर्शन देने, सरकारी किताबों के दोबारा इस्तेमाल और स्कूलों के खेल मैदानों का बेहतर उपयोग करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला, प्रेस क्लब चंडीगढ़ के प्रेजीडेंट सौरभ दुग्गल, चरनजीत सिंह, लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अवि भसीन, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. पालिका अरोड़ा, पीसीएस समेत उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में तय किए गए बिंदुओं पर अब विभागों की ओर से की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए अगली बैठक 20 दिन बाद आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। समिति अगली बैठक में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर हुई प्रगति की समीक्षा करेगी। पदोन्नति कोटे के खाली पद नियमित रूप से भरने पर जोर बैठक की शुरुआत में उच्च शिक्षा निदेशक ने शिक्षा विभाग की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी। इसके बाद समिति ने शिक्षकों के खाली पदों को लेकर चर्चा की। समिति ने कहा कि पदोन्नति कोटे के रिक्त पद नियमित रूप से भरे जाने चाहिए, ताकि कर्मचारियों के करियर में अनावश्यक देरी न हो। साथ ही शिक्षकों की वरिष्ठता सूचियों को जल्द अंतिम रूप देने पर भी जोर दिया गया। समिति ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ करियर और भविष्य के लक्ष्य को लेकर उचित मार्गदर्शन देने की जरूरत बताई। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे की पढ़ाई और करियर चुनने में मदद मिलेगी। पुरानी किताबें वापस लेकर अगले बैच को देने का सुझाव सरकारी खर्च कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने को लेकर भी बैठक में अहम सुझाव दिया गया। समिति ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराती है और पाठ्यक्रम हर साल नहीं बदलता। ऐसे में जो किताबें शैक्षणिक सत्र पूरा होने के बाद अच्छी स्थिति में बच जाती हैं, उन्हें विद्यार्थियों से वापस लेकर अगले बैच को इस्तेमाल के लिए दिया जा सकता है। इस व्यवस्था से किताबों की दोबारा खरीद पर होने वाला सरकारी खर्च कम किया जा सकेगा और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग भी होगा। बैठक में स्कूलों के खेल मैदानों के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हुई। समिति ने सुझाव दिया कि जहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हों और सुरक्षा मानकों का पालन संभव हो, वहां निर्धारित समय में स्कूलों के खेल मैदान आसपास के बच्चों के लिए भी खोले जा सकते हैं। इससे बच्चों को खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए बेहतर जगह मिलेगी। साथ ही फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के साथ स्कूलों में उपलब्ध खेल सुविधाओं का अधिक प्रभावी इस्तेमाल हो सकेगा। विकास कार्यों के लिए बनेगी समन्वय समिति स्कूलों में निर्माण और अन्य विकास कार्य समय पर पूरे हों, इसके लिए अध्यक्ष ने शिक्षा विभाग और इंजीनियरिंग विभाग के बीच बेहतर तालमेल बनाने का सुझाव दिया। इसके लिए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इंजीनियरिंग विभाग की सिविल, जन स्वास्थ्य और विद्युत शाखाओं के प्रतिनिधियों की एक समन्वय समिति गठित करने की बात कही गई। समिति को संभव हो तो दो सप्ताह के भीतर गठित करने का सुझाव दिया गया, ताकि विकास कार्यों में विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण होने वाली देरी को कम किया जा सके। अध्यक्ष ने विकास कार्यों की नियमित जांच और लेखा परीक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि काम निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार हो, सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल हो और परियोजनाएं तय समय में पूरी हों, इसकी लगातार निगरानी जरूरी है। जहां भी काम में कमी या लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया गया।
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चंडीगढ़ में शिक्षकों के रिक्त पद जल्द भरने के निर्देश:सलाहकार परिषद की बैठक में फैसला, किताबों के दोबारा इस्तेमाल, खेल मैदान खोलने पर चर्चा
